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सायंपेट गांव का खौफनाक राज: 300 आवारा कुत्ते मारे गए, 9 पर केस- आखिर क्यों भड़का विवाद?

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Telangana stray dogs killed, Hanumakonda dog cull
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तेलंगाना के हनुमकोंडा में सायंपेट-अरेपल्ली गांवों में 300 आवारा कुत्तों को घातक इंजेक्शन देकर मार दिया। सरपंचों समेत 9 पर क्रूरता का केस। ग्रामीण बोले- कुत्तों का आतंक था। पूरी विवादास्पद कहानी।

कुत्तों की हत्या पर बवाल: तेलंगाना सरपंच बोले- जनता की फरियाद थी, अब कानून हाथ में कौन लेगा?

तेलंगाना के गांवों में 300 आवारा कुत्तों का कत्लेआम: सरपंचों पर केस, ग्रामीणों की गुहार

तेलंगाना के हनुमकोंडा जिले के सायंपेट और अरेपल्ली गांवों से दिल दहला देने वाली खबर आई है। जनवरी 6 से 8 के बीच करीब 300 आवारा कुत्तों को घातक इंजेक्शन देकर बेरहमी से मार दिया गया। सरपंचों, उनके पतियों, डिप्टी सरपंच, गांव के सेक्रेटरी और दो मजदूरों समेत नौ लोगों पर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 के तहत केस दर्ज हो चुका है। शायंपेट पुलिस ने एनजीओ स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन के ए गौतम की शिकायत पर एक्शन लिया। पोस्टमॉर्टम में इंजेक्शन की पुष्टि हुई।​

गांव वालों का दावा है कि ये कदम जनता की मांग पर उठाया गया। सर्पंच चुनाव में ही आवारा कुत्तों की समस्या प्रमुख मुद्दा बनी। कुत्तों ने बच्चों को काटा, रातों में भौंकते रहे, गलियों में घूमकर परेशान किया। स्किन इंफेक्शन और रेबीज का खतरा बढ़ा। लेकिन एनजीओ बोले- ये क्रूरता है। स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के सरकारी प्रोग्राम चलने चाहिए। पुलिस ने लाशें निकालकर फॉरेंसिक जांच भेजी।​​

पार्कल एसीपी सतीशबाबू ने पुष्टि की कि जांच चल रही। शिकायत में 300 कुत्ते मारे जाने का दावा, लेकिन प्रारंभिक जांच में 30-40 ही मिले। फिर भी बीएनएस 325 और एनिमल एक्ट सेक्शन 11 लगाया। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि कुत्तों के काटने से कई बीमार पड़े। डॉग बाइट केस बढ़े। सर्कल इंस्पेक्टर बोले- स्टेरलाइजेशन अपनाएं, मारना गलत।​​

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर। एनिमल वेलफेयर बोर्ड के मुताबिक 3 करोड़ स्ट्रे डॉग्स हैं। सालाना 2 करोड़ बाइट्स, 20 हजार रेबीज मौतें। तेलंगाना में भी यही हाल। सरकार का ABC प्रोग्राम (एनिमल बर्थ कंट्रोल) चलता है- पकड़ो, नसबंदी, वैक्सीन, छोड़ो। लेकिन गांवों में अमल कम। लोग खुद कार्रवाई करते। राजस्थान, महाराष्ट्र में भी ऐसे केस।

कानूनी पक्ष क्या?
प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 की धारा 11 में अनावश्यक दर्द देना जुर्म। सजा 3 महीने कैद या 50 रुपये जुर्माना। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्ट्रे डॉग्स प्रॉपर्टी नहीं, लोक सर्विस का हिस्सा। नगर निगम जिम्मेदार। 2023 के फैसले में मारना बैन। स्टेरलाइजेशन जरूरी।

गांव की कहानी
सायंपेट और अरेपल्ली में कुत्ते बढ़े। बच्चे स्कूल जाते डरते। रात को झुंड आक्रमण। सरपंच चुनाव में वोट इसी पर मिले। दो मजदूर हायर किए, इंजेक्शन लगवाए। लाशें दफनाईं। एनजीओ को भनक लगी, शिकायत। पुलिस पहुंची, खुदाई। इंजेक्शन के निशान।​

आंकड़ों की सच्चाई

विवरणआंकड़ेस्रोत
कुत्ते मारे गए300 (शिकायत), 30-40 (जांच)
आरोपी9 (सरपंच समेत)
भारत स्ट्रे डॉग्स3 करोड़AWBI
सालाना डॉग बाइट्स2 करोड़WHO
रेबीज मौतें20,000ICMR

एनिमल एक्टिविस्ट्स की मांग

  • स्टेरलाइजेशन सेंटर खोलें।
  • वैक्सीनेशन ड्राइव।
  • फीडर्स को प्रोत्साहन।
  • सरपंचों को ट्रेनिंग।
    गौतम बोले- सरकार ABC लागू करे।​

ग्रामीणों का पक्ष

  • कुत्तों ने 50+ बाइट्स किए।
  • बच्चे डरते।
  • सरकारी मदद न आई।
  • चुनावी वादा पूरा किया।
    TOI ने बुजुर्गों से बात की, सबने समर्थन।

भारत में स्ट्रे डॉग मैनेजमेंट

  • ABC प्रोग्राम: पकड़ो-नसबंदी-छोड़ो।
  • NGO पार्टनरशिप।
  • फीडिंग पॉइंट्स।
  • रेबीज वैक्सीन।
    मुंबई, दिल्ली में सफल। तेलंगाना को सीखना।

पिछले केस

  • राजस्थान सीकर: डॉग शूट।
  • झुंझुनू: 25 कुत्ते मारे।
  • महाराष्ट्र: पॉइजनिंग।
    हर जगह विवाद।

क्या करें आम आदमी?

  • कुत्तों को फीड करें, लेकिन कंट्रोल्ड।
  • लोकल बॉडी को शिकायत।
  • NGO जॉइन।
  • स्टेरलाइजेशन सपोर्ट।

सरकार का रोल

  • बजट बढ़ाएं।
  • वेट डाक्टर तैनात।
  • जन जागरूकता।
  • कानून सख्त।

ये घटना दो पहलुओं को दिखाती। एक तरफ क्रूरता, दूसरी जनता का दर्द। बीच का रास्ता स्टेरलाइजेशन। तेलंगाना सरकार को अब कदम उठाने। वरना ऐसे कत्लेआम रुकेंगे नहीं।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. तेलंगाना में कितने कुत्ते मारे गए?
    शिकायत में 300, जांच में 30-40। सायंपेट-अरेपल्ली में इंजेक्शन से।​
  2. आरोपी कौन?
    दो सरपंच, पति, डिप्टी, सेक्रेटरी, दो मजदूर। 9 पर केस।
  3. कानून क्या कहता?
    एनिमल क्रुएल्टी एक्ट 1960। सजा कैद/जुर्माना। सुप्रीम कोर्ट: स्टेरलाइजेशन।
  4. ग्रामीण क्यों खुश?
    कुत्तों के काटने से परेशान। चुनावी मुद्दा।
  5. समाधान क्या?
    ABC प्रोग्राम- नसबंदी, वैक्सीन। NGO मदद।​

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