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Planet Nine का सच:Neptune के बाहर छिपा नया ग्रह?

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Neptune के बाहर Planet Nine  या Y का सबूत मिला। क्विपर बेल्ट के ऑर्बिटल टिल्ट्स से नया ग्रह संभव। नासा, रुबिन ऑब्जर्वेटरी की खोजें और सौरमंडल के रहस्य जानें।

सौरमंडल का नौवां ग्रह: Planet Nine की खोज में नई प्रगति

पिछले आर्टिकल में हमने सौरमंडल के चंद्रमाओं की खूबसूरती देखी – टाइटन से यूरोपा तक। अब बात करते हैं सौरमंडल के किनारे पर छिपे रहस्यमय ग्रह की, जिसे प्लैनेट नाइन या प्लैनेट Y कहते हैं। नेपच्यून से बाहर क्विपर बेल्ट में अजीबोगरीब ऑर्बिटल टिल्ट्स मिले हैं, जो किसी बड़े ग्रह के प्रभाव को दिखाते हैं। नासा और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ग्रह पृथ्वी से छोटा लेकिन बुध से बड़ा हो सकता है, सूरज से 100-200 गुना दूर घूमता हो। 2016 से ये थ्योरी चल रही है, 2025 में नए डेटा से मजबूती मिली। ISRO के चंद्रयान और NASA की मिशन्स से सौरमंडल समझ बढ़ा है। ये ग्रह मिला तो सौरमंडल का नक्शा बदल जाएगा।

Planet Nine क्या है और क्यों खोजा जा रहा?
प्लैनेट नाइन की थ्योरी कैलटेक के माइकल ब्राउन और कोंस्तेंटिन बैत्यागिन ने दी। क्विपर बेल्ट के 50 आइस बॉडीज के ऑर्बिट्स 15 डिग्री टिल्टेड हैं, जो पासिंग स्टार्स या नॉर्मल फॉर्मेशन से मेल नहीं खाते। अमीर सिराज की टीम ने सिमुलेशन्स से पाया कि प्लैनेट Y सूरज से 80 AU दूर, 10 डिग्री टिल्ट पर फिट बैठता है। NASA JPL के अनुसार, इसका प्रभाव 96-98% सिग्निफिकेंट है। भारतीय संदर्भ में, इसे ‘काला ग्रह’ कह सकते हैं। वेदों में सूर्य के 9 ग्रहों का जिक्र है – क्या ये वैज्ञानिक प्रमाण? स्टडीज दिखाती हैं कि ये ग्रह सौरमंडल बनने के समय ही बना।

क्विपर बेल्ट: सौरमंडल का आखिरी फ्रंटियर
नेपच्यून के बाहर क्विपर बेल्ट आइस बॉडीज का रिंग है, प्लूटो इसी में है। यहां प्राइमॉर्डियल क्लस्टर्स मिले – पुराने आइस बॉडीज जो प्लैनेटरी माइग्रेशन दिखाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की स्टडी में पाया गया कि ये क्लस्टर्स 4.5 अरब साल पुराने हैं। प्लैनेट नाइन इन्हें हर्ड करता है। NASA कैसिनी मिशन से टाइटन जैसे चंद्रमाओं की तरह, क्विपर रहस्य खोल रहा। भारत का AstroSat UV डेटा इसमें मदद कर सकता है। WHO जैसी एजेंसी नहीं, लेकिन NASA-UNESA कोलैबोरेशन से डेटा शेयर होता है।

डिस्कवरी के सबूत और साइंटिफिक बैकिंग

  • ऑर्बिटल टिल्ट्स: 80 AU से बाहर 15 डिग्री टिल्ट, प्लैनेट नाइन अकेला नहीं कर सकता।
  • सिमुलेशन्स: कंप्यूटर मॉडल्स में Y ग्रह फिट।
  • स्टैट्स: 96% सिग्निफिकेंस, स्ट्रॉन्ग लेकिन कन्फर्म नहीं।
    मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की 2025 स्टडी में मोलिब्डेनम आइसोटोप्स से थिया इम्पैक्ट लिंक। NIH जैसा NIH नहीं, लेकिन Planetary Science Journal में पब्लिश। ISRO के मंगलयान से सौरमंडल डायनामिक्स समझ बढ़ा।

वेरा C. रुबिन ऑब्जर्वेटरी: अगला बड़ा स्टेप
चिली में 2025-26 से शुरू होने वाला ऑब्जर्वेटरी हर 3 दिन स्काई स्कैन करेगा। इसका 8.4 मीटर मिरर नए ऑब्जेक्ट्स ढूंढेगा। साइंटिस्ट्स उम्मीद करते हैं कि 2030 तक प्लैनेट Y कन्फर्म हो जाए। NASA और ESA के ज्वाइंट मिशन से डेटा आएगा। भारतीय वैज्ञानिक भी इसमें पार्टिसिपेट कर रहे। अगर मिला तो प्लैनेटरी फॉर्मेशन थ्योरीज बदलेंगी।

प्लैनेट नाइन के संभावित गुण

  • साइज: अर्थ से छोटा, नेपच्यून जैसा या छोटा।
  • ऑर्बिट: 10,000-20,000 साल का एक चक्कर।
  • कम्पोजिशन: आइस-रॉक, गैस जायंट संभव।
  • लाइफ पॉसिबिलिटी: चंद्रमा जैसे यूरोपा की तरह सबसरफेस ओशन?
    NASA आर्टिस्ट कॉन्सेप्ट्स इसे डार्क आइस वर्ल्ड दिखाते।

सौरमंडल पर असर: क्या अर्थ को खतरा?
प्लैनेट नाइन अर्थ को प्रभावित नहीं करेगा – बहुत दूर। लेकिन ये बताएगा कि जुपिटर ने प्लैनेट्स कैसे माइग्रेट किए। प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल्स थ्योरी से लिंक। ICMR नहीं, लेकिन NASA हेल्थ इम्पैक्ट स्टडीज में स्पेस रेडिएशन लिंक। भारतीय ज्योतिष में राहु-केतु जैसे।

भविष्य की मिशन्स

  • NASA न्यू होराइजन्स एक्सटेंशन।
  • ESA फ्यूचर आउटर सोलर सिस्टम प्रोब।
  • ISRO का भविष्य क्विपर मिशन?
    Thirty Metre Telescope (भारत-जापान) से एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल सर्च।

मिथ्स vs फैक्ट्स

  • मिथ: प्लैनेट X खतरा। फैक्ट: स्टेबल ऑर्बिट।
  • मिथ: एलियंस का बेस। फैक्ट: नैचुरल फॉर्मेशन।

प्लैनेट नाइन ट्रैकिंग टेबल

सबूतविवरणमहत्व
ऑर्बिटल टिल्ट्स15 डिग्री, 80 AU बाहरग्रह प्रभाव साबित
क्लस्टर्सप्राइमॉर्डियल आइस बॉडीजपुरानी हिस्ट्री
सिमुलेशन्स96% सिग्निफिकेंटY मॉडल फिट
ऑब्जर्वेटरीरुबिन 2026 सेडायरेक्ट इमेजिंग

ये खोज सौरमंडल को नया आयाम देगी। स्काई वॉचर्स, टेलीस्कोप उठाएं!

5-6 FAQs

  1. प्लैनेट नाइन कहां है?
    नेपच्यून से बाहर क्विपर बेल्ट में, 100-200 AU दूर।
  2. ये कितना बड़ा है?
    पृथ्वी से छोटा, नेपच्यून जैसा या कम।
  3. कन्फर्म कब होगा?
    रुबिन ऑब्जर्वेटरी से 2030 तक।
  4. भारत की क्या भूमिका?
    ISRO डेटा और TMT प्रोजेक्ट।
  5. लाइफ पॉसिबल?
    सबसरफेस ओशन संभव।
  6. खतरा है?
    नहीं, ऑर्बिट स्टेबल।

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