चक्रवात दित्वाह ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई – 212 मौतें, लाखों प्रभावित। भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु से NDRF, IAF भेजे। तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट।
क्यों बरपा श्रीलंका पर दित्वाह का कहर: मौतों का आंकड़ा 200 पार, भारत ने कैसे थामा पड़ोसी का हाथ?
चक्रवात दित्वाह श्रीलंका के लिए एक भयानक सपना साबित हुआ है। 26 नवंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद ये तेजी से चक्रवात में बदल गया। श्रीलंका के केंद्रीय पहाड़ी इलाकों और पूर्वी तट पर भारी बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन पैदा कर दिए। डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के मुताबिक, 30 नवंबर तक 212 लोग मारे जा चुके हैं, 218 लापता हैं और 9,98,918 लोग प्रभावित हुए हैं। ये आंकड़े अभी और बढ़ सकते हैं क्योंकि कई इलाके अभी भी कटे हुए हैं।
श्रीलंका की ये सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा में से एक है। चक्रवात ने 20,000 से ज्यादा घर उजाड़ दिए, 1,22,000 लोग अस्थायी शिविरों में शरण ले चुके हैं। कोलंबो के उत्तरी इलाकों में केलानी नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया। बिजली, पानी और इंटरनेट सेवाएं एक तिहाई देश में बाधित हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसनायके ने इमरजेंसी घोषित कर दी और जिला सचिवों को 50 मिलियन श्रीलंकाई रुपये तक खर्च करने की छूट दी। स्थानीय मस्जिदें जैसे दलाला थिया मस्जिद भोजन बांट रही हैं – चावल, चिकन और दाल का करी।
भारत ने सबसे तेज मदद भेजी। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत NDRF की दो टीमें (80 जवान) श्रीलंका पहुंचीं। IAF के C-130J और IL-76 विमानों ने 21 टन राहत सामग्री कोलंबो भेजी। INS सुकन्या विशाखापत्तनम से रवाना होकर और सामान ले जा रही है। IAF हेलीकॉप्टरों ने जोखिम भरे इलाकों से भारतीय नागरिकों समेत लोगों को बचाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के लोगों के प्रति संवेदना जताई और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत और मदद का भरोसा दिया। ये भारत-श्रीलंका भाईचारे का शानदार उदाहरण है।
दित्वाह चक्रवात की उत्पत्ति और वैज्ञानिक कारण
दित्वाह का जन्म बंगाल की खाड़ी में गर्म समुद्री सतह (28-30°C) से हुआ। कम ऊर्ध्वाधर विंड शीयर (10-15 नॉट्स) और नमी भरी मानसूनी हवाओं ने इसे ताकत दी। IMD के अनुसार, ये उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा और तमिलनाडु-पुडुचेरी तट से 60 किमी दूर रुका। हवाओं की रफ्तार 70-80 किमी/घंटा तक पहुंची, जो 90 तक गुस्त की। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात जल्दी बनते हैं क्योंकि यहां नदियों का मीठा पानी गर्म परत बनाता है। जलवायु परिवर्तन ने इसे और तेज किया – खाड़ी 3 गुना तेज गर्म हो रही है।
श्रीलंका पहले से बाढ़-भूस्खलन के आदी है, लेकिन दित्वाह ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। DMC और IWMI ने सैटेलाइट से बाढ़ पूर्वानुमान किया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन पॉलिसी में 24/7 ईOC और मल्टी-हाजर्ड वार्निंग सिस्टम हैं, लेकिन भारी बारिश (300 मिमी+ 24 घंटे में) ने सब बहा दिया। प्रांतों, जिलों और ग्राम स्तर पर समन्वय है, लेकिन संसाधनों की कमी रही।
भारत में असर: तमिलनाडु पर भारी बारिश का खतरा
भारत में चक्रवात ने तमिलनाडु-पुडुचेरी में भारी तबाही की। IMD ने रेड अलर्ट जारी किया – cuddalore, नागापट्टिनम, मयिलादुतुरै, विल्लुपुरम, चेंगलपट्टू में बेहद भारी बारिश। चेन्नई के लिए ऑरेंज अलर्ट। 3 मौतें हुईं, रामेश्वरम-नागापट्टिनम जलमग्न। 38 SDRF-NDRF टीमें तैनात, अन्य राज्यों से 10 और। हवाई अड्डे पर उड़ानें रद्द, मछुआरों को समुद्र न जाने की हिदायत। तूफान तट के समानांतर चलेगा, लैंडफॉल नहीं।
5 FAQs
- चक्रवात दित्वाह कहां से शुरू हुआ?
ये 26 नवंबर को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में कम दबाव से बना। गर्म समुद्र ने ताकत दी। - श्रीलंका में कितनी मौतें हुईं?
DMC के अनुसार 212 मौतें, 218 लापता। आंकड़े बढ़ सकते हैं। - भारत ने क्या मदद भेजी?
ऑपरेशन सागर बंधु: NDRF 80 जवान, 21 टन राहत, IAF प्लेन-हेली, INS सुकन्या। - तमिलनाडु में क्या खतरा है?
IMD रेड अलर्ट: भारी बारिश, बाढ़। 38 टीमें तैनात। - भविष्य में कैसे बचें?
IMD अलर्ट सुनें, ऊंचाई पर जाएं, साफ पानी इस्तेमाल करें।
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