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उत्तर प्रदेश चुनावी रोल में बड़ा झटका: 18% डिलीशन, ड्राफ्ट अब 6 जनवरी को – क्या है कारण?

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UP Electoral Rolls Cleanup: Highest 18% Deletions Expected, New Booths Cause Delay
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उत्तर प्रदेश SIR ड्राफ्ट रोल अब 6 जनवरी को, 18.7% या 2.89 करोड़ वोटर नाम कट सकते हैं। 15,030 नई बूथों से तीसरी बार डिले। दावा-आपत्ति 6 जनवरी से 6 फरवरी तक, फाइनल लिस्ट 6 मार्च।

यूपी SIR में 2.89 करोड़ वोटर गायब? ड्राफ्ट रोल तीसरी बार टला, दावा-आपत्ति 1 महीना!

उत्तर प्रदेश SIR ड्राफ्ट रोल फिर टला: 18% वोटर नाम कटने का खतरा, 2.89 करोड़ प्रभावित

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स की प्रकाशन तारीख बुधवार से बढ़ाकर 6 जनवरी कर दी। प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, इस प्रक्रिया से 2.89 करोड़ मतदाताओं या कुल इलेक्टोरेट का 18.70% नाम कट सकते हैं। ये अभियान 27 अक्टूबर से 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा, लेकिन यूपी में तीसरी बार शेड्यूल बदला गया। मुख्य कारण 15,030 नई पोलिंग बूथों का निर्माण।​

उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर नवदीप रिनवा ने बताया कि नाम नए बूथों में शिफ्ट होंगे, पार्ट नंबर्स अलॉट होंगे, BLO नियुक्त होंगे। 6 जनवरी को सभी नई बूथों पर रोल पब्लिश होगा। दावा-आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी तक ली जाएंगी। नोटिस जारी, दावों का निपटारा 6 जनवरी से 27 फरवरी तक। फाइनल वोटर लिस्ट 6 मार्च को आएगी।​

डिलीशन के संभावित कारण

मतदाता नाम कटने के मुख्य कारण:

  • मृत (deceased): रिकॉर्ड्स से मैच न करना।
  • शिफ्टेड/अनुपस्थित (shifted/abssent): स्थानांतरित या गायब।
  • डुप्लिकेट एनरोलमेंट: एक से ज्यादा जगह नाम।
  • अन्य: फर्जी, पुराने।

कोई भी पार्टी हाई डिलीशन पर अनियमितता का आरोप नहीं लगा रही। यूपी सबसे ऊपर, तमिलनाडु (15%) और गुजरात (14.5%) पीछे।​

SIR क्या है और क्यों जरूरी?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन इलेक्टोरल रोल्स को साफ-सुथरा बनाने का विशेष अभियान। हर 5-10 साल में होता। 2025 में 12 राज्यों में: यूपी, बिहार, झारखंड, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, दिल्ली। उद्देश्य फर्जी वोटर हटाना, नए जोड़ना, सटीकता बढ़ाना।​

यूपी में कुल मतदाता करीब 15.5 करोड़। 18.7% डिलीशन से 2.89 करोड़ नाम प्रभावित। ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत (10-12%) से दोगुना। 2024 लोकसभा चुनावों के बाद पहली बड़ी क्लीनअप।​

राज्यवार डिलीशन अनुमान तालिका

राज्यकुल मतदाता (करोड़)डिलीशन %प्रभावित (करोड़)
उत्तर प्रदेश15.518.72.89
तमिलनाडु6.215.00.93
गुजरात5.114.50.74
बिहार7.612.00.91
झारखंड2.511.50.29

नई पोलिंग बूथों का खेल

यूपी में रेशनलाइजेशन से 15,030 नई बूथ बनीं। ये वोटर सुविधा के लिए – 1200 वोटर प्रति बूथ लिमिट। नाम ट्रांसफर, BLO अपॉइंटमेंट में समय लगा। रिनवा: “नए बूथों पर रोल पब्लिश जरूरी, इसलिए डिले।” ये बदलाव 2027 विधानसभा चुनावों से पहले वोटर बेस साफ करेगा।​

राजनीतिक प्रभाव और चिंताएं

  • BJP: क्लीनअप से फर्जी वोटर हटेंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • SP-Congress: बड़े पैमाने पर डिलीशन से गरीब/ग्रामीण प्रभावित? लेकिन कोई विरोध नहीं।
  • 2024 LS में यूपी 80/80 BJP जीती, साफ रोल्स से फायदा।

दावा-आपत्ति विंडो: मतदाता क्या करें?

6 जनवरी से 6 फरवरी: ऑनलाइन (voters.eci.gov.in), BLO से, हेल्पलाइन 1950। दस्तावेज: आधार, वोटर ID, राशन कार्ड। 27 फरवरी तक फैसला। गलत डिलीशन सुधार संभव।​

राष्ट्रीय संदर्भ: SIR का व्यापक असर

12 राज्यों में कुल 8-10 करोड़ डिलीशन संभव। चुनाव आयोग: “वोटर रोल्स 100% सटीक होंगे।” 2026-27 चुनावों (यूपी विधानसभा) से पहले जरूरी। डिजिटल टूल्स: ECI ऐप, SMS अलर्ट।​

यूपी इलेक्टोरल हिस्ट्री

  • 2019 LS: 14.34 करोड़ वोटर
  • 2022 विधानसभा: 15.02 करोड़
  • 2024 LS: 15.45 करोड़ (अपडेटेड)
    SIR से 2027 तक 16 करोड़+ संभव, लेकिन क्लीन।​

चुनौतियां और समाधान

  • ग्रामीण पहुंच: BLOs घर-घर।
  • डुप्लिकेट चेक: आधार लिंकिंग।
  • मृत्यु रिकॉर्ड: CSR से मैच।

ECI का लक्ष्य: जीरो फेक वोटर। यूपी जैसे बड़े राज्य में सफलता मॉडल बनेगा।​

5 FAQs

  1. यूपी SIR ड्राफ्ट रोल कब पब्लिश होगा?
    6 जनवरी 2026 को, 15,030 नई बूथों के कारण तीसरी बार टला।​
  2. कितने वोटर नाम कट सकते हैं?
    2.89 करोड़ या 18.7% कुल इलेक्टोरेट के।​
  3. डिलीशन के मुख्य कारण क्या?
    मृत, शिफ्टेड, अनुपस्थित, डुप्लिकेट नाम।​
  4. दावा-आपत्ति कब तक?
    6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक।​
  5. फाइनल वोटर लिस्ट कब?
    6 मार्च 2026 को पब्लिश होगी।​

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