Home झारखण्ड खरसावां गोलीकांड शहादत का उद्देश्य अधूरा : देवेन्द्र नाथ महतो
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खरसावां गोलीकांड शहादत का उद्देश्य अधूरा : देवेन्द्र नाथ महतो

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खरसावां हॉट मैदान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन।

खरसावां । नव वर्ष का पहला दिन 1 जनवरी को पूरी दुनिया के लिए भले जश्न का दिन हैं।लेकिन, झारखंड के लिए काला दिन हैं।आज ही के दिन आजाद भारत की पहली वर्ष 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड में हज़ारों आदिवासी मूलवासी शहीद हुये।आज के दिन शहीद स्थल खरसावां में हज़ारों लोग जुटते हैं।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेताओं व समर्थकों – कार्यकर्ताओं ने खरसावां के शहीदों को नमन किया।वहीं किता मैदान सरायकेला में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता, पूर्व मुखिया, पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का दामन थामा।मौके पर जेएलकेएम के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि भारत लंबे समय के बाद गुलामी की जंजीर को तोड़ते हुए 1947 को आजाद हुआ।आजादी के बाद हमारा भारत देश राज्य पुनर्गठन में व्यस्त था।सरायकेला – खरसावां रियासतों को उड़ीसा में विलय करने का 14 – 15 दिसंबर 1947 को अनौपचारिक घोषणा हो चुकी थी।जो 1 जनवरी 1948 ई. को लागू होना था।
सरायकेला- खरसावां- चक्रधरपुर को उड़ीसा में विलय के विरुद्ध 1 जनवरी 1948 को हजारों आदिवासी – मूलवासी पीठ में राशन, कंधा में तीर – धनुष लिए खरसावां हाट मैदान में आयोजित रैली में जुटे थे। “झारखंड राज्य हमारा हैं,हमें झारखंड चाहिए” का नारा लगा रहे थे।लेकिन, उड़ीसा पुलिस द्वारा निर्दयी तरीके से गोलियों की बौछार किया गया। आधे घंटे तक नरसंहार हुआ। खरसावां हाट मैदान खून का समंदर, लाशों का पहाड़ बना, हजारों आदिवासी मूलवासी शहीद हुए।खरसावां गोलीकांड में खून बहाने,त्याग, बलिदान,कुर्बानी देने के परिणामस्वरूप सरायकेला- खरसावां- चक्रधरपुर को उड़ीसा में विलय करना रद्द हुआ और झारखंड का जन्म हुआ एवं पेशा कानून बनी।
घटना के 77 वर्ष बाद भी वह दर्द ताजा हैं, ज़ख्म भरा नहीं हैं।झारखंड गठन के 25 साल बाद भी स्थानीय नीति, नियोजन नीति , परीक्षा कैलेण्डर लागू नहीं होना, अवैध तरीके से जल जंगल जमीन का लूट होना, झारखंडी आदिवासी मूलवासी युवाओं को रोजगार नहीं मिलना शहीदों का अपमान है।समस्त झारखंड वासियों को एकजुट होकर शहीदों के सपनों का झारखंड बनाना होगा। तभी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मौके पर सरायकेला प्रत्याशी प्रेम मार्डी ने कहा कि शहीदों का सपना साकार करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
कोल्हान अध्यक्ष नवीन महतो ने कहा कि शहीदों के सपने को साकार करने के लिए समस्त झारखंडी को एकजुट होना होगा।
कार्यक्रम में देवेन्द्र नाथ महतो, प्रेम मार्डी , नवीन महतो, सृजन हाईबुरू, गोपेश महतो, वीना देवी, सविता देवी, मीनाक्षी देवी, भानुमति देवी एवं अन्य सैकड़ों लोग उपस्थित हुए।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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