सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शारजील इमाम को बेल देने से इनकार किया तो JNU कैंपस में SFI, DSF, AISA से जुड़े छात्रों ने PM मोदी और HM शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए। BJP ने इसे ‘शहरी नक्सल’ की साजिश बताया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद JNU में मोदी-शाह विरोधी नारे: BJP बोली – ‘टुकड़े गैंग’ फिर सक्रिय
JNU में उमर खालिद बेल रिजेक्ट पर विवादित नारे: मोदी-शाह के खिलाफ स्लोगनबाजी, BJP ने ‘शहरी नक्सल’ कहा
6 जनवरी 2026 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कैंपस में एक बार फिर स्लोगनबाजी का विवाद खड़ा हो गया। सुप्रीम कोर्ट के 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शारजील इमाम को बेल देने से इनकार के फैसले के तुरंत बाद कैंपस में लेफ्ट-विंग छात्र संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए।
साबरमती हॉस्टल के बाहर रात में हुए प्रदर्शन में करीब 30–40 छात्र मौजूद थे, जो स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े बताए जा रहे हैं। नारे जैसे “मोदी-शाह की कबर खोदेंगे” और अन्य कथित “एंटी-इंडिया” स्लोगन लगाए गए।
5 जनवरी को JNU पर 2020 हमले की 6वीं बरसी भी थी। JNU टीचर्स यूनियन (JNUTA) ने इसे “क्रूर हमला” बताते हुए याद किया, जबकि JNUSU ने ‘गोरिल्ला ढाबा’ इवेंट आयोजित कर विरोध जताया।
BJP का तीखा हमला: “शहरी नक्सल और टुकड़े गैंग”
बीजेपी नेताओं ने इस स्लोगनबाजी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे “टुकड़े इकोसिस्टम” का काम बताया और स्लोगन लगाने वालों को “शहरी नक्सल” व “एंटी-इंडिया गुट” कहा।
बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने X पर लिखा, “शहरी नक्सल उमर खालिद और शारजील इमाम के समर्थन में साबरमती हॉस्टल के बाहर रात में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध नहीं, एंटी-इंडिया विचारधारा का अपनाना है! बौद्धिक आतंकवादी प्रोफेसर, डॉक्टर या इंजीनियर हो सकते हैं।”
उमर खालिद और शारजील इमाम को बेल न मिलने का केस
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद (पूर्व JNU छात्रसंघ नेता) और शारजील इमाम को बेल देने से इनकार कर दिया। दोनों पर UAPA (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के तहत देश-विरोधी गतिविधियों का आरोप है। छात्र संगठनों ने इसे “छात्र आवाज दबाने की कोशिश” बताया।
JNU में अन्य मुद्दे भी
प्रदर्शन का एक हिस्सा कैंपस लाइब्रेरी में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी और मैग्नेटिक गेट्स लगाने के विरोध का भी था। दिल्ली पुलिस ने कुछ JNUSU पदाधिकारियों को नोटिस जारी किए थे।
2020 JNU हमले की याद
5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में मास्क पहने हमलावरों ने छात्रों–शिक्षकों पर हमला किया था। JNUTA और JNUSU ने इसे याद करते हुए कहा कि जिम्मेदार आज भी अज्ञात हैं।
5 FAQs
- JNU में कौन से नारे लगाए गए?
PM मोदी और HM शाह के खिलाफ विवादित नारे जैसे “मोदी-शाह की कबर खोदेंगे” लगाए गए। - कौन संगठन शामिल थे?
SFI, DSF और AISA से जुड़े 30–40 छात्र साबरमती हॉस्टल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। - BJP ने क्या कहा?
शहजाद पूनावाला और प्रदीप भंडारी ने इन्हें ‘शहरी नक्सल’, ‘टुकड़े गैंग’ और ‘एंटी-इंडिया’ बताया। - बेल किसको न मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शारजील इमाम को बेल देने से इनकार किया। - JNU में अन्य विरोध क्या था?
फेशियल रिकग्निशन टेक और मैग्नेटिक गेट्स के खिलाफ, साथ ही 2020 हमले की 6वीं बरसी।
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