ईरान ने फूड इम्पोर्ट पर सब्सिडी बंद की, जिससे भारत के प्रीमियम बासमती चावल के ₹2,000 करोड़ के शिपमेंट्स बंदरगाहों पर अटक गए। पंजाब-हरियाणा के मिलर्स परेशान, सालाना 12 लाख टन (₹12,000 करोड़) का निर्यात जोखिम में। रियाल का रिकॉर्ड गिरावट और US सैंक्शन्स मुख्य कारण।
बासमती ट्रेड क्राइसिस: ईरान ने फूड इम्पोर्ट सब्सिडी रोकी, भारत के 12 लाख टन बासमती का क्या होगा?
ईरान सैंक्शन्स का बासमती झटका: भारत के ₹2,000 करोड़ माल अटका, पंजाब-हरियाणा मिलर्स परेशान
ईरान ने फूड इम्पोर्ट पर सब्सिडी बंद करने के फैसले से भारत के प्रीमियम बासमती चावल निर्यात को बड़ा झटका लगा। कम से कम ₹2,000 करोड़ मूल्य के शिपमेंट्स अब इंटरनेशनल पोर्ट्स पर अटके हैं। पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख बासमती उत्पादक राज्यों के उत्पादक व मिलर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
ईरानी रियाल के रिकॉर्ड गिरावट के बाद यह दूसरा झटका है। US सैंक्शन्स टाइटनिंग से रियाल का मूल्य USD के मुकाबले इतना गिरा कि ईरान सरकार ने सालों पुरानी फूड इम्पोर्ट सब्सिडी रोक दी। पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रणजीत सिंह जोसन ने कहा कि निर्यातक अब ट्रेड जारी रखने को हिचकिचा रहे हैं।
ईरान–भारत बासमती ट्रेड का महत्व
ईरान भारत का सबसे बड़े बासमती खरीदारों में से एक। सालाना लगभग 12 लाख टन (₹12,000 करोड़ मूल्य) आयात करता। पंजाब-हरियाणा से 40% सप्लाई। ईरान का घरेलू हार्वेस्ट जून 21 के आसपास आता, तब इम्पोर्ट रुक जाता; सितंबर से फिर शुरू। इस लीन पीरियड में भारतीय निर्यातक इन्वेंटरी बिल्ड करते। अब सब्सिडी बंद से कैश फ्लो टाइट।
बार्टर सिस्टम भी बंद
पहले US सैंक्शन्स से बैंकिंग चैनल बंद होने पर ईरान–भारत बार्टर ट्रेड चला (भारत ईरानी तेल आयात करता, बदले बासमती-चाय-दवा निर्यात)। भारत ने ईरानी तेल आयात बंद कर दिया, लेकिन ईरान ने कुछ समय फूड आयात जारी रखा। अब सब्सिडी कट से यह भी रुक गया।
रियाल क्रैश: एक्सचेंज रेट का असर
ईरान–इजराइल तनाव से पहले रियाल USD के मुकाबले 90,000 था। अब 1,50,000 तक गिरा। पहले फूड इम्पोर्ट के लिए प्रेफरेंशियल रेट 28,500 रियाल/USD था। अब सब्सिडी बंद से इम्पोर्ट कॉस्ट आसमान छू रहा।
मिलर्स पर असर: दाम गिरे, किसान प्रभावित
बंद शिपमेंट्स से मिलर्स का कैश फ्लो चिपटा। प्रोसेस्ड बासमती वैरिएंट्स के दाम ₹3-4 प्रति किलो गिरे। अगर लंबा चला तो किसानों की कमाई प्रभावित होगी। अगले प्रोक्योरमेंट सीजन से पहले नुकसान।
| प्रभावित पक्ष | मुख्य समस्या | अनुमानित नुकसान |
|---|---|---|
| निर्यातक | शिपमेंट अटके | ₹2,000 करोड़ |
| मिलर्स | कैश फ्लो टाइट, दाम गिरावट | ₹3-4/kg |
| किसान | कमाई प्रभावित | सालाना ₹12,000 करोड़ निर्यात जोखिम |
भारत के बासमती निर्यात का नक्शा
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती निर्यातक। 2024-25 में कुल निर्यात 50 लाख टन+। ईरान टॉप खरीदार (12 लाख टन)। अन्य: सऊदी, यूएई, इराक। ईरान बंद से वैकल्पिक बाजार ढूंढना चुनौती।
सरकारी/व्यापारिक कदम
– APEDA: वैकल्पिक मार्केट्स (मिडिल ईस्ट, अफ्रीका) एक्सप्लोर।
– मिलर्स एसोसिएशन: ईरान सरकार से सब्सिडी बहाल की मांग।
– भारत सरकार: डिप्लोमेसी से US सैंक्शन्स पर बात। लेकिन ईरानी रियाल क्रैश मुख्य समस्या।
भविष्य का अनुमान
ईरान जून तक इम्पोर्ट रुकाता ही है, लेकिन सब्सिडी न लौटी तो सालाना ₹12,000 करोड़ का झटका। मिलर्स को स्टॉक डंप करना पड़ सकता। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फोकस।
5 FAQs
- ईरान ने बासमती इम्पोर्ट क्यों रोका?
रियाल क्रैश (1,50,000/USD) से फूड इम्पोर्ट सब्सिडी बंद। पहले 28,500 रियाल/USD प्रेफरेंशियल रेट था। - भारत का कितना नुकसान हुआ?
₹2,000 करोड़ के शिपमेंट्स पोर्ट्स पर अटके। सालाना ईरान को 12 लाख टन (₹12,000 करोड़) निर्यात। - पंजाब-हरियाणा पर क्या असर?
मिलर्स का कैश फ्लो चिपटा, बासमती दाम ₹3-4/kg गिरे। किसानों की कमाई जोखिम में। - बार्टर ट्रेड का क्या हुआ?
ईरान–भारत बार्टर (तेल बदले बासमती) बंद। बैंकिंग चैनल सैंक्शन्स से पहले से ही बंद। - निर्यातक क्या करें?
वैकल्पिक बाजार ढूंढें, स्टॉक होल्ड न करें। APEDA से सहायता लें।
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