केरल बुक फेस्टिवल में शशि थरूर ने नेहरू को लोकतंत्र का संस्थापक कहा, लेकिन 1962 युद्ध में कुछ गलतियां स्वीकार कीं। बीजेपी पर नेहरू को हर समस्या का दोषी बनाने का आरोप लगाया। बैलेंस्ड नजरिया।
KLIBF में थरूर का तंज: बीजेपी हर समस्या का नेहरू को दोषी बनाती, लोकतंत्र के जनक को भूल गई
थरूर ने नेहरू की तारीफ के साथ आलोचना भी की
शशि थरूर ने केरल लेजिस्लेटिव असेंबली इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल (KLIBF) के चौथे संस्करण में नेहरू पर खुलकर बोला। उन्होंने कहा कि वे नेहरू के दिमाग और नजरिए के बड़े प्रशंसक हैं, जिन्होंने भारत में लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। लेकिन वे नेहरू के सभी विश्वासों और नीतियों का 100% समर्थन नहीं करते। थरूर ने जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को मानना जरूरी है, लेकिन उन्हें हर समस्या का दोषी ठहराना अन्यायपूर्ण है।
थरूर ने कहा, ‘मैं नेहरू का फैन हूं, लेकिन अंधभक्त नहीं। नेहरू ने लोकतंत्र स्थापित किया, लेकिन कुछ फैसलों पर सवाल उठ सकते हैं।’ यह बयान नेहरू की विरासत पर चल रही राजनीतिक बहस को ताजगी देता है, जहां कांग्रेस नेहरू को हीरो मानती है तो बीजेपी उनकी कई नीतियों की आलोचना करती है।
1962 युद्ध पर थरूर का स्वीकारोक्ति
थरूर ने 1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार की आलोचना का कुछ आधार है। नेहरू के कुछ फैसलों को उस हार का आंशिक कारण माना जा सकता है। लेकिन उन्होंने तुरंत जोड़ा कि अब बीजेपी हर मुद्दे पर नेहरू को जिम्मेदार ठहराती है, चाहे वो संबंधित हो या न हो।
यह बयान नेहरू-आलोचना की बहस को नया मोड़ देता है। नेहरू पर फॉरवर्ड पॉलिसी, आर्मी तैयारी की कमी जैसे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन थरूर ने इसे आंशिक मानते हुए ओवर-सिम्प्लिफिकेशन पर तंज कसा।
बीजेपी पर ‘एंटी-नेहरू’ का तीर
थरूर ने बीजेपी सरकार को नेहरू-विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं ये नहीं कहूंगा कि वे लोकतंत्र-विरोधी हैं, लेकिन नेहरू-विरोधी जरूर हैं। नेहरू को सुविधाजनक बली का बकरा बना दिया गया है।’ थरूर का यह स्टैंड उनकी बैलेंस्ड राजनीति को दिखाता है, जो पार्टी लाइन से अलग हटकर आलोचना करते हैं।
थरूर ने हालिया राजनीतिक घटनाओं का जिक्र न करते हुए नेहरू को हर समस्या – अर्थव्यवस्था से विदेश नीति तक – का दोषी बनाने को गलत बताया। यह बीजेपी की नेहरू-बैशिंग पर अप्रत्यक्ष प्रहार था।
थरूर का लेखन सफर और पढ़ने की सलाह
सत्र में थरूर ने अपना लेखन सफर साझा किया। बचपन में अस्थमा के कारण किताबें उनकी साथी बनीं, जब टीवी या मोबाइल नहीं था। उनका पहला उपन्यास बचपन में लिखा लेकिन स्याही गिरने से खराब हो गया। श्री नारायण गुरु की जीवनी उनकी 28वीं किताब है।
उन्होंने 1989 की सटायरिकल बुक ‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’ का जिक्र किया, जो भारत में उस समय नया था। युवाओं को सलाह दी कि कम पेज वाली छोटी किताबें समय की कमी वाले दौर में बेहतर। कॉलेज डेज में सेंट स्टीफंस में वे एंटनी बने तो मीरा नायर क्लियोपेट्रा। उन्होंने कविता ‘हाउ टू स्लीप एट नाइट’ के पंक्तियां भी सुनाईं।
केरल की पढ़ने की संस्कृति पर तारीफ
थरूर ने कहा कि दुनिया भर में पढ़ने की आदत घट रही है, लेकिन केरल अभी भी आगे है। KLIBF जैसे आयोजन इसे मजबूत करते हैं। यह बयान केरल की साक्षरता दर (94% से ऊपर) और पुस्तक प्रेम को रेखांकित करता है।
नेहरू की विरासत: योगदान vs आलोचना
नेहरू (1889–1964) ने स्वतंत्र भारत को लोकतांत्रिक संविधान, गैर-संरेखण नीति, आईआईटी/आईआईएम जैसे संस्थान दिए। लेकिन आलोचक 1962 हार, आर्थिक मॉडल, कश्मीर हैंडलिंग पर सवाल उठाते हैं। थरूर का बयान दोनों पक्षों को मान्यता देता है।
नेहरू पर बीजेपी की आलोचना:
- 1962 युद्ध: फॉरवर्ड पॉलिसी, इंटेलिजेंस फेलियर।
- अर्थव्यवस्था: सोशलिस्ट मॉडल से ग्रोथ रेट कम।
- लेकिन थरूर कहते हैं – ये आंशिक, न कि सब कुछ।
थरूर का राजनीतिक स्टैंड
थरूर की यह टिप्पणी उनकी नेचुरल डिप्लोमैटिक स्टाइल दिखाती है। वे कांग्रेस में रहते हुए भी पार्टी हाई कमांड की अंधभक्ति से अलग रहते हैं। नेहरू पर बैलेंस्ड व्यू ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी।
नेहरू vs बीजेपी: प्रमुख विवाद
5(FAQs)
- थरूर ने नेहरू पर क्या कहा?
नेहरू लोकतंत्र के संस्थापक हैं, लेकिन उनकी सभी नीतियां परफेक्ट नहीं। 1962 जैसे मामलों में गलतियां स्वीकारनी होंगी। - बीजेपी पर थरूर का तंज क्या था?
बीजेपी नेहरू-विरोधी है और उन्हें हर समस्या का ‘कन्वीनियेंट स्केपगोट’ बना रही। - KLIBF में थरूर ने क्या साझा किया?
अपना लेखन सफर, पहली किताब, केरल की पढ़ने संस्कृति और युवाओं को छोटी किताबें पढ़ने की सलाह। - 1962 युद्ध में नेहरू का दोष क्या?
थरूर के अनुसार, कुछ फैसले हार का आंशिक कारण बने, लेकिन सब कुछ नेहरू पर लादना गलत। - थरूर की कितनी किताबें हैं?
श्री नारायण गुरु की जीवनी 28वीं किताब। ‘ग्रेट इंडियन नॉवेल’ सटायरिकल क्लासिक।
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