सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के समापन पर पीएम मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। 108 घोड़ों के साथ शंख बजाया, वीर हमीरजी गोहिल को श्रद्धांजलि दी। 1026 के गजनी हमले के 1000 साल पूरे, मंदिर दर्शन के साथ देशभक्ति का अनोखा संगम।
सोमनाथ मंदिर के 1000 साल के स्वाभिमान का उत्सव: मोदी ने शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों संग शंख बजाकर इतिहास रचा
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: पीएम मोदी की शौर्य यात्रा ने जगाई देशभक्ति की लहर
11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के समापन समारोह में शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर के 1000 साल के स्वाभिमान और वीरों की शहादत का प्रतीक बनी। पीएम मोदी फूलों से सजी खुली गाड़ी में सवार होकर शंख बजाते हुए आगे बढ़े, तो लाखों भक्तों ने हर हर महादेव और मोदी-मोदी के नारे लगाए। गुजरात के मुख्यमंत्री भुपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी उनके साथ थे।
शौर्य यात्रा शंख सर्कल से हमीर सिंह सर्किल तक चली। इसमें गुजरात पुलिस की माउंटेड यूनिट के 108 घोड़े शामिल हुए, जो काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के हैं। इन घोड़ों को आठ महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी गई थी। डीआईजी राजेंद्रसिंह चूड़ासमा ने बताया कि यह यात्रा सदियों से सोमनाथ की रक्षा करने वाले योद्धाओं को समर्पित है। यात्रा में संत, महंत, बच्चे और कलाकारों ने शंख, डमरू बजाए। केडा जिले के ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय के 350 छात्र शामिल हुए।
यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि चढ़ाई। हमीरजी ने 1299 में जफर खान के आक्रमण के दौरान सोमनाथ की रक्षा करते हुए शहादत दी। इसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। फिर सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मंदिर के बाहर कलाकारों से बात की, जो राजस्थान, पंजाब, मणिपुर जैसे राज्यों से आए थे। उन्होंने लोक नृत्य और देशभक्ति गीत पेश किए।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी तक चला। यह 1026 में महमूद गजनवी के पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर आयोजित हुआ। उसके बाद मंदिर 17 बार लुटा और नष्ट हुआ, लेकिन हर बार पुनर्निर्माण हुआ। सरदार पटेल ने 12 नवंबर 1947 को दीपावली के दिन खंडहर देखकर पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्राण प्रतिष्ठा की। 2026 में इसके 75 साल भी पूरे हो रहे हैं।
सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। अरब सागर तट पर 150 फुट ऊंचा शिखर वाला यह मंदिर भारत की सनातन परंपरा का प्रतीक है। पर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और देशभक्ति प्रस्तुतियां हुईं। प्रभास पाटन और वेरावल में भक्ति और देशप्रेम का माहौल छा गया।
सोमनाथ का ऐतिहासिक सफर
- 1026: महमूद गजनवी का पहला आक्रमण, मंदिर लूटा।
- 1299: जफर खान का हमला, वीर हमीरजी गोहिल शहीद।
- मुगल काल: औरंगजेब ने मस्जिद बनवाई।
- 1706: तीसरी बार नष्ट।
- 1947: सरदार पटेल का संकल्प।
- 1951: पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा।
- 2026: स्वाभिमान पर्व, 1000 साल का उत्सव।
शौर्य यात्रा के प्रमुख आकर्षण
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| घोड़ों की संख्या | 108 (काठियावाड़ी, मारवाड़ी नस्ल) |
| यात्रा दूरी | शंख सर्कल से हमीर सिंह सर्कल (1 किमी) |
| ट्रेनिंग अवधि | 8 महीने |
| कलाकार | राजस्थान, पंजाब, मणिपुर, गुजरात से |
| छात्र | ब्रह्मर्षि महाविद्यालय के 350 |
पीएम मोदी का गुजरात दौरा
शामली के बाद पीएम सद्भावना मैदान में सभा को संबोधित करेंगे। फिर राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन। मारवाड़ी यूनिवर्सिटी में ट्रेड शो खोलेंगे। गांधीनगर में अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2 का लोकार्पण करेंगे।
सोमनाथ का महत्व
यह मंदिर सिर्फ धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। आक्रमणों के बावजूद जो टिका, वो श्रद्धा की ताकत है। पर्व ने एक भारत श्रेष्ठ भारत का संदेश दिया। कलाकारों ने कहा, पीएम के दर्शन से गर्व महसूस हो रहा।
ऐसे आयोजनों से सीख
- इतिहास को याद रखना जरूरी।
- वीरों की शहादत को सलाम।
- सांस्कृतिक एकता मजबूत करें।
- धार्मिक स्थलों का संरक्षण।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने लाखों दिलों में देशभक्ति जगाई। पीएम मोदी की उपस्थिति ने इसे अविस्मरणीय बना दिया।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कब और क्यों मनाया गया?
यह 8-11 जनवरी 2026 को हुआ। 1026 में गजनवी के आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर। मंदिर के स्वाभिमान और पुनर्निर्माण की कहानी। - शौर्य यात्रा में क्या खास था?
पीएम मोदी ने नेतृत्व किया। 108 घोड़ों का जुलूस, शंख-डमरू, कलाकारों के नृत्य। वीर हमीरजी को श्रद्धांजलि। - सोमनाथ मंदिर का इतिहास संक्षेप में?
17 बार नष्ट, हर बार बना। 1951 में सरदार पटेल के प्रयास से पुनर्निर्मित। 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम। - यात्रा में कौन शामिल हुए?
पीएम मोदी, गुजरात सीएम भुपेंद्र पटेल, डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी, संत, छात्र, कलाकार। - पीएम का अगला कार्यक्रम क्या?
सद्भावना मैदान सभा, राजकोट कॉन्फ्रेंस, मेट्रो उद्घाटन।
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