सोमनाथ शौर्य यात्रा में पीएम मोदी ने कहा- स्वतंत्रता के बाद गुलामी की मानसिकता ने हमारा गौरवशाली इतिहास मिटाने की कोशिश की। आक्रमणकारियों को लुटेरा बताकर अत्याचार छिपाए गए। सोमनाथ 1000 साल की शक्ति का प्रतीक।
सोमनाथ शौर्य यात्रा: पीएम मोदी का बड़ा हमला- ‘गुलामी की मानसिकता ने हमारा गौरवशाली इतिहास मिटाने की कोशिश की’
सोमनाथ शौर्य यात्रा: पीएम मोदी ने खोला इतिहास का राज
गुजरात के सोमनाथ में रविवार को एक ऐसी शौर्य यात्रा निकली, जिसने सदियों पुरानी वीरता की कहानी को फिर से जीवंत कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस यात्रा में हिस्सा लिया और इसके बाद विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास हार का नहीं, बल्कि बार-बार उठ खड़े होने की प्रेरणा का है। उन्होंने खुलकर कहा कि स्वतंत्रता के बाद कुछ लोग जिनकी गुलामी की मानसिकता थी, उन्होंने हमारा गौरवशाली अतीत मिटाने की पूरी कोशिश की।
यह शौर्य यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का हिस्सा थी, जो 8 से 11 जनवरी 2026 तक चली। यात्रा में गुजरात पुलिस के माउंटेड यूनिट के 108 घोड़े शामिल हुए, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक बने। पीएम मोदी ने डमरू बजाया, शंखनाद किया और रास्ते भर उमड़े जनसमूह को प्रणाम किया। राजस्थान, पंजाब, मणिपुर जैसे राज्यों के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पीएम ने वीर हमीरजी गोहिल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने मंदिर की रक्षा में जान दी।
सोमनाथ का 1000 साल पुराना इतिहास
सोमनाथ मंदिर 12 आदिज्योतिर्लिंगों में से पहला है, जो अरब सागर तट पर खड़ा है। 1026 में महमूद गजनवी ने पहली बार इसे लूटा और तोड़ा। इतिहासकारों के अनुसार, कुल 17 बार इस मंदिर पर आक्रमण हुए। हर बार इसे नेस्तनाबूद करने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार भक्तों और योद्धाओं ने इसे फिर से खड़ा किया। पीएम मोदी ने कहा कि आक्रमणकारी सोचते थे उन्होंने जीत ली, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का ध्वज लहरा रहा है।
मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी भी प्रेरक है। स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका बीड़ा उठाया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्राण प्रतिष्ठा की। लेकिन पीएम ने खुलासा किया कि तब भी कुछ ताकतें इसके खिलाफ थीं। मंदिर के पुनर्निर्माण को रोकने की कोशिश हुई, राष्ट्रपति के दर्शन पर आपत्ति जताई गई।
गुलामी की मानसिकता ने इतिहास क्यों तोड़ा-मरोड़ा?
पीएम मोदी ने सीधे निशाना साधा कि स्वतंत्रता के बाद कुछ इतिहासकारों और राजनीतिक ताकतों ने धार्मिक आक्रमणों को महज ‘लूट’ बता दिया। स्कूल की किताबों में पढ़ाया गया कि सोमनाथ को सिर्फ खजाने के लिए तोड़ा गया, नफरत, अत्याचार और आतंक का क्रूर इतिहास छिपा दिया गया। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी सभ्यता से कटना चाहते थे।
2026 में सोमनाथ प्राण प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे हो रहे हैं। पीएम ने चेतावनी दी कि जो ताकतें तब मंदिर के खिलाफ थीं, वे आज भी मौजूद हैं। तलवारें छिपी साजिशों में बदल गई हैं। तुष्टिकरण करने वाले चरमपंथी मानसिकता वालों के आगे झुक जाते हैं।
शौर्य यात्रा का महत्व और संदेश
शौर्य यात्रा का मतलब है वीरता की याद। इसमें वे योद्धा शामिल हैं जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। पीएम ने कहा कि 1000 साल पहले जो माहौल था, आज भी वो प्रेरणा हमें अगले 1000 साल के लिए तैयार करे। हमें एकजुट रहना होगा, हर विभाजनकारी शक्ति को हराना होगा।
यात्रा के दौरान डमरू की गूंज, भगवान शिव से जुड़े वाद्ययंत्रों की ध्वनि ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लोग फूल बरसा रहे थे, मोदी-मोदी के नारे गूंज रहे थे। भवनगर के पिनाकिन गोयल जैसे भक्त बोले कि सोमनाथ में पीएम का आना सौभाग्य का क्षण है।
सोमनाथ के पुनर्निर्माण की पूरी कहानी
| घटना | वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| महमूद गजनवी का पहला आक्रमण | 1026 | मंदिर पहली बार ध्वस्त |
| कुल दर्ज आक्रमण | 17 बार | हर बार पुनर्निर्माण |
| सरदार पटेल का संकल्प | 1947 के बाद | स्वतंत्र भारत में पहल |
| राजेंद्र प्रसाद की प्राण प्रतिष्ठा | 11 मई 1951 | आधुनिक मंदिर उद्घाटन |
| स्वाभिमान पर्व | 8-11 जनवरी 2026 | 1000 साल पूरे, 75 साल पुनर्निर्माण |
आक्रमण और पुनर्निर्माण की समयरेखा
- 1026: गजनवी का आक्रमण, मंदिर तोड़ा।
- मध्यकाल: औरंगजेब समेत कई आक्रमण।
- 1947: आजादी के बाद पटेल जी का नेतृत्व।
- 1951: राष्ट्रपति प्रसाद ने प्रतिष्ठा।
- आज: सोमनाथ विश्व में शक्ति का प्रतीक।
पीएम ने कहा कि सोमनाथ जैसे हजारों तीर्थस्थल हमारी ताकत के प्रतीक हैं। इन स्थानों ने सदियों तक हमारी परंपरा को जिंदा रखा।
आज के समय का संदेश
पीएम मोदी ने साफ कहा कि हमें जागरूक रहना है। एकजुट होकर हर ऐसी ताकत को शिकस्त देनी है जो हमें बांटना चाहे। सोमनाथ का सफर सृजन का है, जो विनाश पर जीतता है। उन्होंने गुजरात दौरे के दौरान अन्य कार्यक्रम भी किए- राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन, अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 लॉन्च।
यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला था। सोमनाथ ने साबित किया कि सृजन समय लेता है, लेकिन यही टिकता है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने पूरे देश को एकजुट होने का संदेश दिया। पीएम का संबोधन भावुक और प्रेरक था। हर हर महादेव की गूंज सोमनाथ से निकलकर देश भर में फैल गई।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सोमनाथ शौर्य यात्रा कब और क्यों निकाली गई?
शौर्य यात्रा 11 जनवरी 2026 को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत निकाली गई। यह उन योद्धाओं को सम्मान देने के लिए थी जिन्होंने मंदिर की रक्षा में जान दी। इसमें 108 घोड़े शामिल हुए। - पीएम मोदी ने सोमनाथ भाषण में क्या मुख्य बात कही?
पीएम ने कहा कि गुलामी की मानसिकता ने स्वतंत्र भारत में हमारा गौरवशाली इतिहास मिटाने की कोशिश की। आक्रमणों को लूट बताकर अत्याचार छिपाए गए। - सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण कब हुआ?
1026 में महमूद गजनवी ने पहला आक्रमण किया। कुल 17 बार मंदिर ध्वस्त हुआ, लेकिन हर बार पुनर्निर्मित। - स्वतंत्र भारत में सोमनाथ का पुनर्निर्माण कैसे हुआ?
सरदार पटेल के नेतृत्व में 1951 में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्राण प्रतिष्ठा की। तब भी विरोध हुआ था। - सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य क्या था?
यह 1026 के 1000 साल और 1951 के 75 साल पूरे होने पर आयोजित हुआ। सभ्यता की शक्ति और एकता का संदेश देने के लिए।
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