बांग्लादेश ने अमेरिका को बताया कि वो गाजा में तैनात होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण सेना का हिस्सा बनना चाहता है। नवंबर UN रेजोल्यूशन के बाद ये पहला बड़ा कदम। सीजफायर पहली फेज पर अटका, 400+ फिलिस्तीनियों की मौत।
गाजा सीजफायर स्टक्ड: बांग्लादेश की एंट्री से बदलाव? अमेरिका के साथ बैठक में खुला राज
बांग्लादेश ने क्यों की गाजा शांति सेना में शामिल होने की पेशकश?
बांग्लादेश सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि उसने अमेरिकी अधिकारियों को स्पष्ट बता दिया है – वो गाजा में तैनात होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण सेना (International Stabilization Force) का हिस्सा बनना चाहता है। ये बात बांग्लादेश के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर खलीलुर रहमान ने वाशिंगटन में अमेरिकी डिप्लोमैट्स एलिसन हूकर और पॉल कापुर के साथ बैठक में कही। बांग्लादेशी सरकार के स्टेटमेंट में कहा गया कि रहमान ने ‘प्रिन्सिपल में’ इस मिशन में शामिल होने की दिलचस्पी जताई, लेकिन योगदान की मात्रा या तरह का जिक्र नहीं किया।
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की तरफ से तुरंत कोई जवाब नहीं आया। ये कदम उस वक्त आया जब गाजा में अक्टूबर से चला आ रहा सीजफायर पहली फेज से आगे नहीं बढ़ पाया है। UN सिक्योरिटी काउंसिल ने नवंबर के मध्य में रेजोल्यूशन पास कर ‘Board of Peace’ और उसके सहयोगी देशों को गाजा में टेम्पररी इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स तैनात करने की मंजूरी दी थी। लेकिन सीजफायर के बाद भी 400 से ज्यादा फिलिस्तीनियों और 3 इजरायली सैनिक मारे गए हैं। गाजा के 20 लाख से ज्यादा लोग टूटे घरों या टेंटों में गुजारा कर रहे हैं, जहां इजरायली फौज हटी है लेकिन हमास फिर कंट्रोल में आ गया।
गाजा सीजफायर की मौजूदा स्थिति: पहली फेज पर अटका पूरा ड्रामा
गाजा में अक्टूबर में शुरू हुआ सीजफायर अब तक सिर्फ शुरुआती फेज तक सीमित है। इजरायल और हमास अगले कदमों पर दूर-दूर तक सहमत नहीं। दोनों एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। सीजफायर शुरू होने के बाद दर्जनों झड़पें हुईं, जिसमें सैकड़ों फिलिस्तीनियों की जान गई। गाजा अब एक छोटे से इलाके में सिमट गया है, जहां लोग बर्बाद इमारतों में रह रहे हैं। भूखमरी का संकट गहराया हुआ है।
2023 के आखिर से इजरायल की मिलिट्री कार्रवाई ने गाजा को तबाह कर दिया। दर्जनों हजार फिलिस्तीनियों की मौत हुई। पूरी आबादी बेघर हुई। मानवाधिकार विशेषज्ञों, विद्वानों और UN जांच ने इसे ‘जनसंहार’ कहा। इजरायल इसे 2023 हमास हमले के बाद ‘सेल्फ डिफेंस’ बताता है, जिसमें 1200 इजरायली मारे गए और 250 से ज्यादा बंधक बनाए गए। गाजा का 80% हिस्सा नष्ट। अस्पताल, स्कूल, घर सब तबाह।
अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण सेना: UN रेजोल्यूशन का मतलब क्या?
नवंबर में UN सिक्योरिटी काउंसिल का रेजोल्यूशन ऐतिहासिक था। इसने ‘Board of Peace’ को गाजा में शांति बहाल करने के लिए टेम्पररी फोर्स तैनात करने की हरी झंडी दी। ये फोर्स सीजफायर को आगे बढ़ाने, ह्यूमैनिटेरियन एड सुनिश्चित करने और लॉ एंड ऑर्डर कायम रखने का काम करेगी। लेकिन फिलहाल ये फोर्स ग्राउंड पर तैनात नहीं हुई। इजरायल और हमास के बीच ट्रस्ट डेफिसिट बड़ी बाधा।
इस तरह की मल्टीनेशनल फोर्सेस पहले भी लीबिया, सूडान, पूर्वी तिमोर जैसे संकटों में काम कर चुकी हैं। बांग्लादेश जैसे देश, जो UN पीसकीपिंग में हमेशा आगे रहते हैं (सूडान, माली, दक्षिण सूडान में हजारों सैनिक भेज चुके), ऐसे मिशनों में अहम भूमिका निभाते हैं। बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा UN शांति सैनिक योगदानकर्ता देश है।
बांग्लादेश की एंट्री से क्या बदलेगा गाजा का समीकरण?
बांग्लादेश का ये ऐलान स्ट्रैटेजिक है। मुस्लिम बहुल देश होने से फिलिस्तीन के प्रति सहानुभूति स्वाभाविक। लेकिन UN मिशन में हिस्सेदारी से वो न्यूट्रल प्लेयर बनेगा। अमेरिका को बताना इसलिए जरूरी क्योंकि US इस Board of Peace का लीडर है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दबाव है, ऐसे मिशनों से फंडिंग और इंटरनेशनल इमेज बूस्ट मिलता है।
अन्य देश भी दिलचस्पी ले रहे हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन जैसे मुस्लिम देशों ने बातचीत की है। यूरोपीय देश सशर्त साथ। लेकिन इजरायल को न्यूट्रल फोर्स चाहिए, जिसमें अरब देशों का वेटेज कम हो। बांग्लादेश की एंट्री से साउथ एशियन प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। भारत ने अभी चुप्पी साधी है।
गाजा संकट का बैकग्राउंड: 2023 से अब तक
बांग्लादेश का UN पीसकीपिंग इतिहास
- दुनिया का नंबर 2 UN ट्रूप कॉन्ट्रिब्यूटर (7000+ सैनिक तैनात)
- सूडान (UNMISS), माली (MINUSMA), दक्षिण सूडान में अहम भूमिका
- दशकों से न्यूट्रल, प्रोफेशनल शांति सैनिक
- गाजा जैसे संवेदनशील मिशनों में पहली बार दिलचस्पी
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर?
भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। गाजा में बांग्लादेश की एंट्री से साउथ एशिया का वेटेज बढ़ेगा। भारत ने फिलिस्तीन को हमेशा सपोर्ट किया लेकिन UN मिशनों में सतर्क रहता है। बांग्लादेश का कदम रोहिंग्या संकट के बाद उसकी इंटरनेशनल इमेज सुधारने का प्रयास लगता है। दोनों देशों के बीच कोई टेंशन नहीं।
गाजा में स्थिरीकरण की चुनौतियां
- हमास vs इजरायल ट्रस्ट गैप
- ह्यूमैनिटेरियन एड डिलीवरी
- रिकंस्ट्रक्शन फंडिंग (100 अरब डॉलर+)
- सिक्योरिटी वेक्यूम भरना
- लंबे समय तक तैनाती
भविष्य में क्या होगा?
अगर अमेरिका सहमत हुआ तो बांग्लादेश शायद 500-1000 सैनिक भेजे। पहले ट्रेनिंग, फिर गाजा डिप्लॉयमेंट। लेकिन सीजफायर फेज 2 पर प्रोग्रेस जरूरी। इजरायल को न्यूट्रल फोर्स मंजूर हो, हमास हथियार ड्रॉप करे। UN का रोल अहम। ये मिशन सालों चल सकता है।
बांग्लादेश का ये कदम गाजा के भविष्य के लिए नया टर्निंग पॉइंट हो सकता है। लेकिन रियल चेंज तो इजरायल-हमास बातचीत से ही आएगा।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- बांग्लादेश ने गाजा फोर्स में शामिल होने की इच्छा कब जताई?
अमेरिकी डिप्लोमैट्स के साथ वाशिंगटन बैठक में। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर खलीलुर रहमान ने प्रिन्सिपल में दिलचस्पी बताई। - गाजा इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स कब बनेगी?
नवंबर 2025 UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन से मंजूर। Board of Peace लीड करेगा लेकिन अभी तैनाती नहीं हुई। - सीजफायर के बाद गाजा में कितने मारे गए?
400 से ज्यादा फिलिस्तीनियों और 3 इजरायली सैनिक। पहली फेज से आगे प्रोग्रेस नहीं। - बांग्लादेश का UN पीसकीपिंग में रिकॉर्ड क्या है?
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ट्रूप कॉन्ट्रिब्यूटर। सूडान, माली जैसे मिशनों में हजारों सैनिक। - भारत का गाजा मिशन पर स्टैंड क्या है?
भारत ने अभी कोई ऐलान नहीं किया। फिलिस्तीन समर्थन लेकिन सतर्क नीति।
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