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यूपी वोटर लिस्ट में 18% कटौती: मुस्लिम बहुल जिलों पर विपक्ष का हमला, आयोग ने खोला राज!

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उत्तर प्रदेश SIR रिवीजन के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम हटे। मुस्लिम बहुल जिलों में 18.75% कटौती, राज्य औसत 18.70% के बराबर। विपक्ष ने उठाए सवाल, आयोग ने बताया कारण। पूरी जानकारी।

सहारनपुर से संभल तक: SIR रिवीजन में वोटर कटने का सच, क्या 2027 चुनाव प्रभावित?

यूपी वोटर लिस्ट रिवीजन: मुस्लिम बहुल जिलों में डिलीशन राज्य औसत के बराबर, विपक्ष सवाल उठा रहा

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। 6 जनवरी को पब्लिश हुई लिस्ट में कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ नाम (18.70%) हटा दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि मुस्लिम बहुल 10 जिलों- रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, बलरामपुर, बरेली, मेरठ, बहराइच में औसत कटौती 18.75% रही, जो राज्य औसत से लगभग बराबर। विपक्ष का दावा था कि अल्पसंख्यक इलाकों को निशाना बनाया गया, लेकिन आंकड़े उल्टा बयान दे रहे।​

चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर नवदीप रिंवा ने स्पष्ट किया कि डिलीशन के मुख्य कारण मृत मतदाता, स्थायी पलायन, वेरिफिकेशन के दौरान अनुपस्थिति और डुप्लीकेट एंट्रीज हैं। SIR 4 नवंबर से 26 दिसंबर 2025 तक चली, जिसे 15 दिन बढ़ाया गया क्योंकि 2.97 करोड़ नाम खतरे में थे। 1.72 लाख पोलिंग बूथ पर 5.76 लाख BLO (बूथ लेवल एजेंट्स) ने घर-घर जाकर चेक किया। फाइनल रोल 6 मार्च 2026 को आएगा। क्लेम्स-ऑब्जेक्शन्स के लिए 6 फरवरी तक Form-6 भरें।​

हाई डिलीशन वाले जिले ज्यादातर अर्बन हैं। लखनऊ में 30%, गाजियाबाद 28.83%, कानपुर 25.50%, मेरठ 24.65%, प्रयागराज 24.64%। इनमें सिर्फ सहारनपुर और मेरठ में मुस्लिम आबादी राज्य औसत से ऊपर। बलरामपुर (नेपाल बॉर्डर) में 25.98% कटौती हुई- 15.83 लाख से घटकर 11.71 लाख वोटर। कारण- अनकलेक्टेड फॉर्म्स, डुप्लीकेट्स, पुरानी डेथ/माइग्रेशन रिकॉर्ड्स। यहां 2022 चुनाव में 47-52.81% वोटिंग हुई, राज्य औसत 61.03% से कम।​

विपक्षी दलों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा आयोग को अल्पसंख्यक वोटर्स के नाम बहाल करने चाहिए। कांग्रेस ने रश्ड प्रोसेस का आरोप लगाया। लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि मुस्लिम बहुल जिलों में कटौती औसत के आसपास। मुरादाबाद में 15.76% (3.87 लाख नाम), सहारनपुर में 16.37% (4.32 लाख)। संभल में 20% तक। ये जिले 28 विधानसभा सीटें कवर करते, जहां 2022 में BJP-NDA को 11, SP गठबंधन को 17 मिलीं।​

SIR का उद्देश्य साफ वोटर लिस्ट बनाना था। पहले 15.44 करोड़ वोटर थे, अब ड्राफ्ट में 12.55 करोड़। ये 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम। अर्बन एरियाज में ज्यादा डिलीशन क्योंकि माइग्रेशन हाई। रूरल बलरामपुर जैसा अपवाद। आयोग ने पार्टियों को BLO दिए, ट्रांसपेरेंसी रखी।​

प्रमुख जिलों में डिलीशन %

जिलाडिलीशन %कुल वोटर पहले (लाख)बचे वोटर (लाख)विशेषता
लखनऊ30%अर्बन हाई
गाजियाबाद28.83%नोएडा प्रभाव
बलरामपुर25.98%15.8311.71रूरल, नेपाल बॉर्डर
मेरठ24.65%मुस्लिम बहुल
सहारनपुर~16.37%4.32 लाख कटहाई ड्रॉप
मुरादाबाद15.76%3.87 लाख कट6 विधानसभा

मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति

  • रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर: 15-19% कटौती।
  • अमरोहा, बरेली: औसत के करीब।
  • बहराइच: मध्यम।
    राज्य औसत से कोई खास अंतर नहीं।​

SIR प्रक्रिया स्टेप बाय स्टेप

  • 4 नवंबर-26 दिसंबर: घर-घर सर्वे।
  • 1.72 लाख बूथ, 5.76 लाख BLO।
  • 6 जनवरी: ड्राफ्ट जारी।
  • 6 फरवरी तक: ऑब्जेक्शन।
  • 6 मार्च: फाइनल लिस्ट।

विपक्ष के आरोप

  • SP: मुस्लिम वोटर्स प्रभावित।
  • कांग्रेस: जल्दबाजी।
    आयोग: डेटा आधारित डिलीशन।

2022 वोटिंग vs डिलीशन
बलरामपुर के 4 विधानसभा: तुलसीपुर (47%), गैंसड़ी (52.81%)। कम टर्नआउट वाले इलाकों में ज्यादा पुरानी एंट्रीज।

2027 चुनाव पर असर

  • साफ लिस्ट से सही वोटिंग।
  • माइग्रेशन एक्टिव एरियाज प्रभावित।
  • पार्टियां फॉर्म-6 पर फोकस।

लोगों के लिए टिप्स

  • वोटर आईडी चेक करें: sec.up.nic.in
  • Form-6 भरें ऑनलाइन/BOOTH।
  • डुप्लीकेट हटवाएं।
  • फाइनल लिस्ट 6 मार्च।

ये रिवीजन लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। विपक्ष सवाल उठाएगा, लेकिन डेटा साफ है। मतदाता जागरूक रहें, नाम चेक करवाएं। 2027 में सही वोट पड़े, यही मकसद।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. यूपी SIR में कितने वोटर नाम हटे?
    2.89 करोड़ (18.70%), 15.44 करोड़ से घटकर 12.55 करोड़।
  2. मुस्लिम बहुल जिलों में डिलीशन कितना?
    18.75%, राज्य औसत 18.70% के बराबर।
  3. डिलीशन के मुख्य कारण क्या?
    मृत्यु, पलायन, अनुपस्थिति, डुप्लीकेट।
  4. ऑब्जेक्शन कब तक भर सकते हैं?
    6 फरवरी 2026 तक Form-6 से।
  5. फाइनल वोटर लिस्ट कब?
    6 मार्च 2026 को जारी।

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