राजस्थान के अजमेर में स्थित विश्व प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह फिर सुर्खियों में है। सोमवार को जिला कोर्ट में एक याचिका दायर हुई, जिसमें दावा किया गया कि ये पवित्र स्थल मूल रूप से भगवान शिव का मंदिर था।
अजमेर दरगाह का राज: महाराणा प्रताप सेना की याचिका, क्या ASI खोलेगी इतिहास?
अजमेर शरीफ दरगाह: शिव मंदिर का दावा, नई याचिका में ASI सर्वे की मांग
राजस्थान के अजमेर में स्थित विश्व प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह फिर सुर्खियों में है। सोमवार को जिला कोर्ट में एक याचिका दायर हुई, जिसमें दावा किया गया कि ये पवित्र स्थल मूल रूप से भगवान शिव का मंदिर था। याचिकाकर्ता महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से सर्वे कराने की मांग की। परमार ने कहा, ‘मैं लंबे समय से इस मुद्दे पर लड़ रहा हूं। राष्ट्रपति को पहले भी याचिका दी, जो राजस्थान मुख्य सचिव को भेजी गई।’ वकील एपी सिंह ने पुष्टि की कि याचिका डिस्ट्रिक्ट जज कोर्ट में दाखिल हुई।
अजमेर शरीफ दरगाह भारत के सबसे पवित्र मुस्लिम तीर्थस्थलों में शुमार है। यहां सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्फ गरीब नवाज की मजार है। फारस से 1192 में अजमेर आए चिश्ती ने 1236 तक यहां डेरा डाला। उनकी मृत्यु के बाद मुगल बादशाह हुमायूं ने बनवाई। अकबर हर साल तीर्थयात्रा करते, शाहजहां ने मस्जिदें जोड़ीं। लाखों हिंदू-मुस्लिम चादर चढ़ाते हैं। लेकिन अब विवाद गरमाया- क्या नीचे शिव मंदिर है?
ये पहली बार नहीं। 2024 में हिंदू सेना अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने याचिका दी, दावा किया दरगाह शिव मंदिर पर बनी। अजमेर सिविल कोर्ट (वेस्ट) नंबर 1 में सीसीटीवी लगाने, डिस्प्यूटेड एरिया सील करने की मांग। गुप्ता बोले, दीवार पर शिव फोटो, शिवलिंग मौजूद। दरगाह कमिटी रेनोवेशन के बहाने सबूत मिटा रही। सितंबर 2024 वाली याचिका में किताब ‘अजमेर: हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव’ का हवाला दिया- मंदिर का मलबा दरगाह में यूज।
परमार की नई याचिका में कहा, स्थल प्राचीन शिव मंदिर था। ASI सर्वे से सच्चाई सामने आएगी। ये दावा ग्यानवापी, मथुरा, वाराणसी जैसे केसों से मिलता। कोर्ट ने नोटिस जारी किए- माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्ट्री, ASI, दरगाह कमिटी को। विवादास्पद किताबों, दस्तावेजों से हवाला। लेकिन इतिहासकार कहते हैं, चिश्ती 1191-92 में दिल्ली-लाहौर होते अजमेर पहुंचे। संस्कृत सीखी, हिंदू विद्वानों से बहस। चिश्ती सिलसिला शुरू किया। कोई डेमोलिशन प्रूफ नहीं।
अजमेर का इतिहास गहरा। अजयमेरू नाम से राजपूतों का किला। पृथ्वीराज चौहान का समय। चिश्ती ने गरीबों की मदद से प्रसिद्धि पाई। दरगाह कॉम्प्लेक्स में मस्जिदें, मेहमानखाना, लाइब्रेरी। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में नामांकित। हिंदू भी श्रद्धा रखते- अमिताभ बच्चन, सोनू निगम चादर चढ़ा चुके। विवाद से सद्भाव को ठेस?
ASI सर्वे केस टाइमलाइन
- 1192: चिश्ती अजमेर आगमन।
- 1236: चिश्ती समाधि।
- 16वीं सदी: हुमायूं मजार बनवाई।
- अकबर-शाहजहां: मस्जिदें।
- 2024: विष्णु गुप्ता याचिका।
- जनवरी 2026: राजवर्धन परमार याचिका।
पिछली याचिकाओं की स्थिति
| याचिकाकर्ता | साल | मांग | स्टेटस |
|---|---|---|---|
| विष्णु गुप्ता (हिंदू सेना) | 2024 | सीलिंग, CCTV, शिवलिंग जांच | नोटिस जारी |
| विष्णु गुप्ता | नवंबर 2024 | फिजिकल सर्वे | कोर्ट नोटिस |
| राजवर्धन परमार | 2026 | ASI सर्वे | नई दाखिल |
चिश्ती का जीवन
- फारस जन्म, हेरात (अफगानिस्तान) में उस्ताद मिले।
- भारत प्रवेश, मुल्तान में संस्कृत पढ़ी।
- दिल्ली-लाहौर-अजमेर।
- चिश्ती ऑर्डर शुरू, कुतबुद्दीन बख्तियार काकी शिष्य।
गरीब नवाज उपनाम।
दावा के आधार
- किताबें: ‘अजमेर हिस्टोरिकल’, मलबा दावा।
- दीवार पर शिव चित्र, शिवलिंग।
- प्राचीन मंदिर अवशेष।
लेकिन ASI रिपोर्ट्स में कोई पुष्टि नहीं।
सद्भाव की मिसाल
- हिंदू-मुस्लिम एकता: उर्स में लाखों।
- बॉलीवुड स्टार्स चादर।
- पर्यटन: सालाना करोड़ों विजिटर।
विवाद से नुकसान?
राजस्थान में ऐसे केस
आध्यात्मिक महत्व
चिश्ती ने प्रेम, करुणा सिखाई। दरगाह सभी धर्मों के लिए। विवाद इतिहास दोहराता? सर्वे से सच्चाई खुले, लेकिन शांति बनी रहे।
ऐसे विवादों से सीख
- तथ्य जांचें, अफवाह न फैलाएं।
- ASI सर्वे निष्पक्ष हो।
- सद्भाव बनाए रखें।
- इतिहास सम्मान।
अजमेर शरीफ विवाद ने एक बार फिर धार्मिक सद्भाव पर सवाल उठाए। याचिका स्वीकार होगी या खारिज? ASI क्या कहेगा? समय बताएगा। लेकिन ख्वाजा गरीब नवाज का संदेश अमर- सबका भला।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- अजमेर दरगाह पर शिव मंदिर का दावा क्या है?
याचिकाकर्ता कहते हैं प्राचीन शिव मंदिर पर बनी, मलबा यूज। ASI सर्वे मांग। - ख्वाजा चिश्ती कब अजमेर आए?
1192 में, 1236 तक रहे। गरीब नवाज कहलाए। - पिछली याचिकाएं क्या हुईं?
2024 में विष्णु गुप्ता की- नोटिस जारी, शिवलिंग-CCTV मांग। - दरगाह कौन बनवाई?
हुमायूं ने मजार, अकबर-शाहजहां ने मस्जिदें। - विवाद का असर क्या?
सद्भाव पर खतरा, लेकिन लाखों श्रद्धालु आते। सर्वे से स्पष्टता।
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