महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने 1995-99 शिवसेना-बीजेपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। प्रोजेक्ट कॉस्ट जानबूझकर बढ़ाकर अरबों की लूट हुई। एनसीपी नेता ने खोले पुराने राज, राजनीतिक बवाल मचा। पूरी डिटेल्स पढ़ें।
अजित पवार का धमाका: 1995-99 सेना-बीजेपी राज में प्रोजेक्ट कॉस्ट जानबूझकर क्यों बढ़ाई गई?
अजित पवार का 1995-99 सेना-बीजेपी राज पर विस्फोटक आरोप: प्रोजेक्ट कॉस्ट जानबूझकर बढ़ाए गए
महाराष्ट्र की राजनीति में भूकंप आ गया है। एनसीपी के दिग्गज नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार ने शिवसेना-बीजेपी की 1995 से 1999 वाली सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उस दौर में सिंचाई और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के खर्च को जानबूझकर ऊंचा करके अरबों रुपये की लूट मचाई गई। अजित पवार ने कहा कि कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से बेसिक कॉस्ट को कई गुना बढ़ा दिया जाता था। ये बयान विधानसभा सत्र के दौरान आया, जिसने पुराने घोटालों को फिर से जिंदा कर दिया।
अजित पवार ने स्पष्ट कहा कि 1995-99 में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन की सरकार में प्रोजेक्ट कॉस्ट को डेलिबरेटली इन्फ्लेट किया जाता था। सिंचाई विभाग के बड़े प्रोजेक्ट्स में ये खेल सबसे ज्यादा हुआ। उदाहरण के तौर पर, छोटे बांध या नहर प्रोजेक्ट की असली लागत 100 करोड़ होती, तो फाइलों में 300-400 करोड़ दिखा दिए जाते। फर्क का पैसा कमीशन के रूप में बंट जाता। अजित ने नाम लिए बिना कहा कि मंत्री, विधायक और ठेकेदार सब इसमें शरीक थे। ये सिस्टमेटिक लूट थी, जो राज्य के खजाने को खोखला कर रही थी।
ये आरोप कोई नया नहीं। महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच 2012 में हुई थी, जब विजय पंधारे जैसे अफसरों ने 70,000 करोड़ के इरिगेशन स्कैम का पर्दाफाश किया। उस वक्त भी 1995-99 के प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठे थे। अजित पवार खुद उस दौर में मंत्री थे, लेकिन एनसीपी में आने के बाद उन्होंने कई बार पुरानी सरकारों पर उंगली उठाई। अब डिप्टी सीएम पद पर रहते हुए ये बयान राजनीतिक हमला लगता है। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने तीखा जवाब दिया कि ये पुरानी बातें उछालकर वर्तमान सरकार को बदनाम करने की चाल है।
1995-99 शिवसेना-बीजेपी राज का बैकग्राउंड
उस समय मनोहर जोशी पीएमओ थे, नारायण राणे जैसे नेता सिंचाई मंत्री। शिवसेना की ताकत मुंबई-पुणे बेल्ट में थी। राज्य में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू हुए- वारासgaon बांध, कृष्णा वैली प्रोजेक्ट्स। लेकिन लागत कंट्रोल नहीं हुआ। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ इरिगेशन में 20,000 करोड़ की अनियमितता हुई। ठेकेदारों को ओवरपेमेंट, सब-पॉन्टैक्टर्स को फायदा। अजित पवार ने कहा कि टेंडर प्रोसेस में ही खेल शुरू हो जाता। सबसे कम बोली देने वाले को नकारकर ऊंचे रेट वाले को कॉन्ट्रैक्ट।
प्रमुख प्रभावित प्रोजेक्ट्स की लिस्ट
- वारासgaon नदी घाटी प्रोजेक्ट: कॉस्ट 141 एकड़ जमीन के लिए मार्केट रेट से नीचे लीज।
- कृष्णा वैली डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन: 70,000 करोड़ का अनुमानित नुकसान।
- छोटे बांध और नहरें: हर प्रोजेक्ट में 2-3 गुना इन्फ्लेशन।
- लावासा सिटी प्रोजेक्ट: शरद पवार विजन, लेकिन अजित पर आरोप।
ये प्रोजेक्ट्स आज भी विवादों में हैं।
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले के आंकड़े
| दौर | प्रोजेक्ट्स | अनुमानित इन्फ्लेशन | प्रभावित किसान |
|---|---|---|---|
| 1995-99 (सेना-बीजेपी) | 500+ | 20,000 करोड़+ | 50 लाख |
| 1999-2009 (कांग्रेस-एनसीपी) | 1000+ | 70,000 करोड़ | 1 करोड़ |
| 2014-19 (बीजेपी) | 300 | 10,000 करोड़ | 30 लाख |
राजनीतिक संदर्भ
अजित पawar का ये बयान महाराष्ट्र की जटिल राजनीति का हिस्सा लगता है। 2019 में एनसीपी-शिवसेना गठबंधन टूटा, अजित ने बीजेपी जॉइन की। 2023 में फिर ड्रामा, अब फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम। शिवसेना (उद्धव) और एमएनएस राज ठाकरे पर भी निशाना। अजित का कहना है कि वो सच बोल रहे, क्योंकि अब पारदर्शिता लानी है। लेकिन विपक्ष कहता है ये सरकार बचाने की चाल। विधानसभा में हंगामा हुआ, स्पीकर ने बहस रोकी।
अजित पवार के पुराने विवाद
- 2012 इरिगेशन स्कैम: 70,000 करोड़ आरोप, इस्तीफा लेकिन क्लीन चिट।
- 2013 इंदापुर स्पीच: ‘डैम में पेशाब डालूं?’ वाला बयान, माफी मांगी।
- लावासा प्रोजेक्ट: जमीन सस्ते में दी।
- बारामती बैंक स्कैम: सीट छोड़ी।
फिर भी 8वीं बार डिप्टी सीएम। राजनीति में सर्वाइवल का रिकॉर्ड।
विपक्ष का रिएक्शन
- शिवसेना (शिंदे): ‘पुरानी कलंकित फाइलें निकाल रहे।’
- उद्धव ठाकरे: ‘अजित खुद दोषी थे, अब दूसरों पर दोषारोपण।’
- बीजेपी: ‘विकास पर फोकस करें, पुरानी राजनीति न करें।’
- एनसीपी (अजित गुट): ‘सच सामने लाना जरूरी।’
ये बयानबाजी चुनावी साल में महाराष्ट्र को गरमा सकती है।
आरोपों का असर
- सिंचाई विभाग की पुरानी फाइलें खंगाली जा सकतीं।
- ठेकेदारों पर नजर, पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स जांच।
- किसानों में उम्मीद, लेकिन अविश्वास भी।
महाराष्ट्र में 55% खेती सिंचाई पर निर्भर। घोटाले से लाखों प्रभावित। अब पारदर्शिता ई-टेंडरिंग से।
1995-99 सरकार की उपलब्धियां और कमियां
उपलब्धियां: मुंबई मिल्स बंद, विकास शुरू। हाईवेज, मेट्रो की नींव।
कमियां: कॉस्ट ओवररन, कमीशन कल्चर। पर्यावरण नियम तोड़े।
अजित का दावा सही साबित हुआ तो सेना-बीजेपी की साख डगमगाएगी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- अजित पवार ने 1995-99 सरकार पर क्या आरोप लगाया?
प्रोजेक्ट कॉस्ट जानबूझकर इन्फ्लेट करने का। सिंचाई प्रोजेक्ट्स में अरबों लूट। - उस दौर में कौन सी सरकार थी?
शिवसेना-बीजेपी गठबंधन। मनोहर जोशी सीएम। - अजित पवार खुद उस वक्त क्या कर रहे थे?
मंत्री पद पर। लेकिन अब एनसीपी से आरोप लगा रहे। - सिंचाई घोटाले का अनुमानित नुकसान क्या?
70,000 करोड़ से ज्यादा, 1995-2009 तक। - क्या इस बयान से राजनीतिक बवाल मचेगा?
हां, विधानसभा में हंगामा। विपक्ष ने तीखा जवाब दिया।
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