ED ने सुप्रीम कोर्ट में TMC लीगल सेल के व्हाट्सएप चैट्स दिखाए। कलकत्ता हाईकोर्ट में 9 जनवरी को हंगामा प्लान्ड था। ‘कोर्ट नंबर 5 में सब आ जाओ’ संदेश वायरल। ममता रैली का भी कॉल। मामला गंभीर।
कोर्ट में हंगामा: ED ने TMC के व्हाट्सएप चैट उजागर किए, ‘सब आ जाओ’ संदेश से खुला राज!
ED का सुप्रीम कोर्ट में धमाका: TMC लीगल सेल के व्हाट्सएप चैट्स से खुला कोर्ट हंगामे का राज
9 जनवरी 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 5 में जो हंगामा हुआ, वो कोई सहज घटना नहीं थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में खुलासा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लीगल सेल ने व्हाट्सएप ग्रुप ‘लीगल माइंड्स’ में मैसेज भेजकर वकीलों को जुटाया था। बंगाली में लिखा था- ‘आज 09.01.2026, कोर्ट नंबर 5, आइटम नंबर 10। सब आ जाओ।’ फिर दोपहर 1 बजे बी गेट पर इकट्ठा होने और ममता बनर्जी की ED छापों के खिलाफ रैली में शामिल होने का कॉल। बस और गाड़ियां तैयार।
I-PAC केस की सुनवाई शुरू भी न हुई थी कि वकील कोर्टरूम में धक्कम-धक्के करने लगे। जस्टिस सुव्रा घोष ने कई बार कहा कि केस से जुड़े न हों तो बाहर जाओ। लेकिन हंगामा शांत न हुआ। उन्होंने 5 मिनट का अल्टीमेटम दिया और खुद कोर्ट से बाहर चली गईं। सुनवाई 14 जनवरी तक टल गई। ED का कहना है कि ये सब प्लान्ड था, कोर्ट को प्रेशर डालने की साजिश। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘ये स्पॉन्टेनियस नहीं, TMC लीगल विंग का काम।’ कोर्ट बोला, ‘कोर्ट जंतर-मंतर बन गया?’
I-PAC क्या है? इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी, TMC का इलेक्शन कंसल्टेंसी फर्म। ED ने कोयला घोटाले की जांच में 8 जनवरी को उनके ऑफिस और डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर छापे मारे। आरोप है कि ममता बनर्जी ने जांच में दखल दिया, पुलिस अधिकारियों संग। ED ने CBI जांच की मांग की। TMC ने भी पिटीशन दाखिल की। लेकिन कोर्ट में अव्यवस्था ने सब लटका दिया। 14 जनवरी को हाईकोर्ट ने एडवाइजरी जारी की- सिर्फ सीनियर काउंसल, असिस्टेंट और AOR अंदर।
व्हाट्सएप चैट्स का स्क्रीनशॉट ED ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। पहले मैसेज- कोर्ट नंबर 5 में इकट्ठा हो। फिर ममता रैली का न्योता। रिपब्लिक टीवी ने एक्सेस किया। ये ‘लीगल माइंड्स’ ग्रुप TMC लीगल सेल का। ED का आरोप- कोर्ट प्रोसीडिंग्स प्रभावित करने की कोशिश। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘मॉबोक्रेसी’ कहा, बहुत गंभीर मुद्दा।
ED-TMC जंग का इतिहास लंबा। कोयला, स्कूल जॉब्स, मनी लॉन्ड्रिंग में दर्जनों केस। ममता सरकार ED को ‘राजनीतिक हथियार’ बताती है। ED कहती है TMC भ्रष्टाचार छिपा रही। I-PAC पर छापे से TMC में हड़कंप। प्रतीक जैन के घर से डॉक्यूमेंट्स जब्त। कोयला स्मगलिंग का कनेक्शन।
प्रमुख घटनाक्रम समयरेखा
- 8 जनवरी: ED छापे I-PAC ऑफिस और प्रतीक जैन घर।
- 9 जनवरी: हाईकोर्ट में हंगामा, जस्टिस घोष वॉकआउट।
- 14 जनवरी: ED सुप्रीम कोर्ट में चैट्स पेश, TMC पर आरोप।
- हाईकोर्ट एडवाइजरी जारी।
ED के प्रमुख आरोप TMC पर
| आरोप | विवरण |
|---|---|
| कोर्ट हस्तक्षेप | वकीलों को भेजे मैसेज, हंगामा कराया |
| जांच में दखल | ममता ने पुलिस को फोन, छापे रुकवाए |
| कोयला घोटाला | I-PAC का कनेक्शन, डॉक्यूमेंट्स जब्त |
| मॉबोक्रेसी | सुप्रीम कोर्ट ने निंदा की |
TMC का पक्ष
पार्टी कहती है ED राजनीतिक बदले की कार्रवाई कर रही। हंगामा वकीलों का स्पॉन्टेनियस प्रोटेस्ट। चैट्स फेक या कन्टेक्स्ट से बाहर। ममता ने रैली में ED को घेरा। लेकिन ED के सबूत मजबूत। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस लिया।
कानूनी निहितार्थ
- कोर्ट की अवमानना हो सकती।
- CBI जांच की मांग।
- वकीलों पर कार्रवाई संभव।
सुप्रीम कोर्ट गंभीर, आगे सुनवाई होगी।
पश्चिम बंगाल में ED vs TMC
| साल | केस | स्टेटस |
|---|---|---|
| 2025 | स्कूल जॉब्स | सुप्रीम कोर्ट |
| 2025 | कोयला स्मगलिंग | जांच जारी |
| 2026 | I-PAC छापे | हाईकोर्ट/सुप्रीम |
वकीलों की भूमिका
बार काउंसिल पर सवाल। क्या राजनीतिक दबाव? जस्टिस घोष का वॉकआउट उदाहरण। कोर्ट में अनुशासन जरूरी। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी।
राजनीतिक प्रभाव
2026 चुनाव से पहले बंगाल में घमासान। BJP-ED को सपोर्ट। TMC पर CBI-ED का दबाव। ममता की रैली में भीड़। लेकिन चैट्स ने नुकसान पहुंचाया।
सीख और चेतावनी
- कोर्ट राजनीतिक अखाड़ा नहीं।
- व्हाट्सएप सावधानी से।
- न्यायपालिका की गरिमा बचाएं।
ED का ये खुलासा मिसाल बनेगा।
सुप्रीम कोर्ट अब इस पर फैसला लेगा। TMC-ED जंग तेज। बंगाल की सियासत गर्म। क्या CBI जांच होगी? देखते हैं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- TMC लीगल सेल ने क्या मैसेज भेजे?
‘कोर्ट 5 में सब आ जाओ, फिर ममता रैली में।’ बस व्यवस्था तैयार। - कोर्ट में क्या हुआ 9 जनवरी को?
वकील हंगामा, जस्टिस घोष वॉकआउट। सुनवाई टली। - I-PAC केस क्या है?
ED छापे कोयला घोटाले में। ममता पर दखल आरोप। - सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
‘मॉबोक्रेसी, जंतर-मंतर नहीं।’ गंभीर मुद्दा। - आगे क्या होगा?
CBI जांच मांग, वकीलों पर कार्रवाई संभव।
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