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जज वर्मा ने खारिज किए आरोप: ‘मेरा कोई रोल नहीं’, आउटहाउस अग्निकांड में नकदी का दावा फर्जी क्यों?

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Justice Yashwant Varma cash controversy
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जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय जांच समिति को बताया- आग लगने पर दिल्ली में नहीं था। आउटहाउस में नकदी बरामदगी का कोई रिकॉर्ड नहीं। फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की लापरवाही पर सवाल। इम्पीचमेंट मोशन पर सफाई।

सुप्रीम कोर्ट जज पर इम्पीचमेंट मोशन: यशवंत वर्मा का दावा- नकदी का कोई रिकॉर्ड ही नहीं

जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय पैनल को जवाब दिया: आग के समय घर पर नहीं था, नकदी बरामदगी का कोई सबूत नहीं

अलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे बर्न्ट कैश कांड के आरोपों ने देश की न्यायपालिका को हिला दिया है। लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति को 12 जनवरी 2026 को दिए जवाब में जस्टिस वर्मा ने साफ कहा कि 14-15 मार्च 2025 की रात दिल्ली के उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने के समय वो शहर में ही नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि आउटहाउस में कथित नकदी बरामदगी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। जस्टिस वर्मा ने जोर देकर कहा, ‘मेरा इस मामले में बिल्कुल कोई रोल नहीं है।’​

समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार कर रहे हैं। अन्य सदस्य हैं मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य। जस्टिस वर्मा ने अपनी सफाई में बताया कि आग आउटहाउस में लगी, जो उनके रहने वाले हिस्से से अलग है। ये सीआरपीएफ बैरक के बिल्कुल पास है, जहां कई लोग आ-जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस, फायर ब्रिगेड और सिक्योरिटी स्टाफ पहले पहुंचे, लेकिन उन्होंने जगह सील नहीं की, सबूत सुरक्षित नहीं किए। ऐसी लापरवाही की जिम्मेदारी उन पर क्यों?​

जस्टिस वर्मा ने सीसीटीवी फुटेज न होने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि निगरानी कैमरे थे लेकिन फुटेज गायब। नकदी की मौजूदगी या मात्रा का कोई सरकारी मेमो या रिपोर्ट नहीं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों में नकदी का जिक्र तक नहीं, न ही कोई अनुमानित रकम बताई गई। जस्टिस वर्मा ने इम्पीचमेंट प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मौके पर मौजूद अधिकारी प्रक्रिया फॉलो नहीं कर पाए, तो उन पर कैसे आरोप?​

कांड की शुरुआत मार्च 2025 में हुई। दिल्ली हाईकोर्ट जज रहे जस्टिस वर्मा के Lutyens Delhi स्थित बंगले के आउटहाउस में आग लगी। आग बुझाने वालों ने वहां भारी मात्रा में जली नकदी होने का दावा किया। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद ट्रांसफर की सिफारिश की। अगले दिन तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इन-हाउस जांच समिति बनाई। समिति ने आरोपों में दम पाया और रिपोर्ट राष्ट्रपति व पीएम को भेजी।​

जस्टिस वर्मा ने इन-हाउस जांच को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया। लेकिन 7 अगस्त 2025 को दो जजों की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। कहा कि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में इम्पीचमेंट मोशन पेश हुए। राज्यसभा में एडमिट नहीं हुआ लेकिन लोकसभा स्पीकर ने 12 अगस्त को समिति गठित की। जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति को भी सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया। 8 जनवरी 2026 को बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा, अतिरिक्त समय देने से इनकार किया।​

कॉलेजियम सिस्टम और ट्रांसफर

तारीखघटनापरिणाम
14 मार्च 2025आउटहाउस में आगनकदी दावा
20 मार्च 2025कॉलेजियम सिफारिशदिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर
अप्रैल-जून 2025इन-हाउस जांचआरोप सही पाए गए
7 अगस्त 2025SC याचिका खारिजप्रक्रिया वैध
12 अगस्त 2025संसदीय समिति गठनजांच जारी 

इन-हाउस जांच समिति ने क्या पाया?

  • आउटहाउस पर जस्टिस वर्मा का ‘कोवरट कंट्रोल’।
  • नकदी की स्रोत पर संतोषजनक जवाब नहीं।
  • 55 गवाहों से पूछताछ, साइट विजिट।
    रिपोर्ट में ‘स्ट्रॉन्ग इन्फेरेंशियल एविडेंस’।​

जस्टिस वर्मा की सफाई के मुख्य बिंदु

  • आग के समय मध्य प्रदेश में थे।
  • आउटहाउस अलग, CRPF एक्सेसिबल।
  • फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स जिम्मेदार।
  • कोई CCTV, कोई रिकॉर्ड।
  • नकदी रिकवरी प्राइमा फेसी गलत।​

न्यायपालिका में इम्पीचमेंट का इतिहास
भारत में जजों पर इम्पीचमेंट मोशन कम ही आए। जस्टिस सौमित्र सेन (2011) ने इस्तीफा दिया। जस्टिस पीडी दीनाकरण ने केस हारे। जस्टिस वर्मा का केस पहला जहां कैश रिकवरी मुख्य। जजेस इनक्वायरी एक्ट 1968 के तहत प्रक्रिया। दो तिहाई संसद अप्रूवल जरूरी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा
8 जनवरी को सुनवाई में बेंच बोली- जज की राइट्स और जनता की इच्छा में बैलेंस। जस्टिस वर्मा को अतिरिक्त समय न मिला। फैसला लंबित। ये केस न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठा रहा।

कानूनी सवाल

  • क्या इन-हाउस जांच का रिपोर्ट संसद बाध्यकारी?
  • इम्पीचमेंट में नैचुरल जस्टिस?
  • आउटहाउस कंट्रोल साबित कैसे?
    वकील बोले- सबूतों की कमी से केस कमजोर।

परिवार वालों का पक्ष
जस्टिस वर्मा ने कहा- परिवार मौके पर नहीं। कोई नकदी उनके कब्जे में नहीं। जांच में फैमिली को क्लीन चिट। लेकिन पब्लिक परसेप्शन खराब।

न्यायपालिका सुधार की मांग

  • ट्रांसपेरेंसी बढ़ाएं।
  • इन-हाउस जांच में जज को हियरिंग।
  • कैश सोर्स ट्रेसिंग सिस्टम।
    ये केस कॉलेजियम सिस्टम पर बहस छेड़ेगा।

जस्टिस वर्मा का केस देश भर में चर्चा का विषय। क्या संसदीय समिति रिपोर्ट केस आगे बढ़ाएगी? या सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा? न्याय की प्रक्रिया लंबी चलेगी लेकिन सच्चाई सामने आएगी।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. जस्टिस यशवंत वर्मा पर क्या आरोप हैं?
    आउटहाउस में आग के बाद जली नकदी बरामदगी। मिसकंडक्ट का दावा।
  2. उन्होंने क्या सफाई दी?
    दिल्ली में नहीं थे। कोई रिकॉर्ड नहीं। फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स दोषी।
  3. संसदीय समिति कौन सी है?
    जस्टिस अरविंद कुमार, चीफ जस्टिस श्रीवास्तव, एडवोकेट आचार्य।
  4. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    इन-हाउस जांच वैध। इम्पीचमेंट याचिका पर फैसला सुरक्षित।
  5. इम्पीचमेंट कैसे होता है?
    दोनों सदनों में मोशन, 2/3 वोट। जजेस एक्ट 1968।

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