आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर नगर निगम चुनाव में वोट डालने के बाद NOTA के खिलाफ चेतावनी दी। बोले- सभी को नकारने से अनचाहा उम्मीदवार जीतता है। लोकतंत्र में वोट पहली जिम्मेदारी। पूरी बातें।
RSS चीफ बोले- NOTA से अनियंत्रित ताकतें मजबूत होंगी, लोकतंत्र बचाने को वोट जरूरी
मोहन भागवत का NOTA पर सख्त रुख: सभी को नकारोगे तो अनचाहा व्यक्ति कैसे जीतेगा
14 जनवरी 2026 को नागपुर में महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव के दौरान एक बड़ा बयान सामने आया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वोट डालने के बाद पत्रकारों से कहा कि NOTA बटन दबाना ठीक नहीं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सभी उम्मीदवारों को नकार देने से आखिरकार वही व्यक्ति चुना जाता है जिसे कोई नहीं चाहता। भागवत ने नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एनएमसी) चुनाव में सुबह पहली ड्यूटी मानकर वोट किया और लोगों से अपील की कि सबसे अच्छे उपलब्ध विकल्प को चुनें।
भागवत जी का कहना था, ‘NOTA का मतलब सबको ठुकराना है, और ऐसा करने से अनचाही शक्ति को बढ़ावा मिलता है।’ उन्होंने लोकतंत्र में वोट को पहली नागरिक जिम्मेदारी बताया। ‘चुनाव के दिन वोटिंग सबसे बड़ा कर्तव्य बन जाता है। मैंने इसलिए सुबह ही वोट डाला।’ महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के लिए 15,000 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। नागपुर में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। पिछले चुनाव बीजेपी ने जीते थे।
महाभारत का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा, ‘भीष्म पितामह ने कहा था- अराजकता सबसे बुरी स्थिति है। शासक न होना सबसे खराब। किसी का होना अनीश्वरता से बेहतर। हर नजरिए से यही जरूरी है।’ NOTA को असंतोष व्यक्त करने का तरीका मानते हुए भी उन्होंने सलाह दी कि उम्मीदवारों में बेहतर को ढूंढें। ‘संतुलित सोचकर, जनहित देखकर वोट दो। लोकतंत्र की रीढ़ चुनाव हैं, वोट नागरिकों का कर्तव्य।’
भागवत ने मतदाताओं से भारी संख्या में投票 करने को कहा। ‘चुनाव आयोग कहता है, मीडिया कहता है, हम भी कहते हैं- सब वोट दो। नतीजे वक्त पर आएंगे, लेकिन कोशिश चलती रहे। एक दिन सबमें अच्छाई जागेगी।’ ये बयान महाराष्ट्र सिविक पोल्स के ठीक बीच आया जब वोटिंग जोरों पर थी। एनएमसी में 111 वार्ड्स के लिए मुकाबला तल्ख।
NOTA का इतिहास और विवाद
2013 में सुप्रीम कोर्ट ने NOTA को वैध बनाया। लोगों को सभी को न नकार सकें। लेकिन इसका असर सीमित। अगर NOTA सबसे ज्यादा वोट पाए तब भी टॉप उम्मीदवार जीतता। भागवत का तर्क यही है कि ये नेगेटिव वोटिंग अनचाहे को फायदा देती। 2019 लोकसभा में 1.06% वोट NOTA पर। विधानसभा में औसतन 1-2%। लेकिन लोकल चुनावों में असर ज्यादा।
महाराष्ट्र सिविक पोल्स 2026 के आंकड़े
| नगर निगम | उम्मीदवार | मुख्य दल | पिछले विजेता |
|---|---|---|---|
| नागपुर | 500+ | बीजेपी vs कांग्रेस | बीजेपी |
| ठाणे | 800+ | सभी दल | बीजेपी |
| पुणे | 1200+ | एनसीपी vs बीजेपी | बीजेपी |
| कुल | 15,000+ | विविध | – |
आरएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान
आरएसएस सालों से वोटिंग पर जोर देता है। भागवत ने कई बार कहा- वोट न देना अपराध। 2024 लोकसभा में संघ ने घर-घर जाकर जागरूक किया। इस बार सिविक पोल्स पर फोकस। नागपुर आरएसएस का गढ़। भागवत का बयान संगठन की लाइन साफ करता है।
NOTA के फायदे-नुकसान
- फायदे: असंतोष दिखाता, पार्टियों को सुधारने को मजबूर।
- नुकसान: अच्छे उम्मीदवार हार सकते, खराब जीत। भागवत जैसा तर्क।
विकल्प: इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों को बढ़ावा।
लोकतंत्र में वोट का महत्व
भागवत ने कहा, ‘लोकतंत्र चुनाव पर टिका। वोट न सिर्फ हक, कर्तव्य।’ महाभारत से सीख- व्यवस्था जरूरी। अराजकता से समाज बर्बाद। आज के दौर में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी। कुछ सहमत, कुछ NOTA के हक में।
महाराष्ट्र चुनावों का बैकग्राउंड
महाराष्ट्र में बीजेपी की मजबूती। शिंदे सरकार के बाद सिविक बॉडीज में दबदबा। कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना यूबीटी मुकाबले में। नागपुर में बीजेपी का लक्ष्य दोबारा कंट्रोल। वोटिंग शांतिपूर्ण, 60% टर्नआउट अनुमान।
भागवत के अन्य बयान
- 2024 में बोले- वोट सबसे बड़ा धर्म।
- पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण पर फोकस।
- हमेशा जिम्मेदार वोटिंग की अपील।
वोटिंग टिप्स भागवत स्टाइल
- जनहित देखें।
- संतुलन सोचें।
- सुबह पहला काम वोट।
- NOTA से बचें।
भागवत का संदेश साफ है। लोकतंत्र बचाने को सक्रिय वोटिंग। महाराष्ट्र चुनाव नतीजे 16 जनवरी को। नागपुर में BJP लीड। ये बयान पूरे देश के मतदाताओं के लिए गाइड। जागरूक बनें, सही चुनें।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- मोहन भागवत ने NOTA क्यों ठुकराया?
सभी नकारने से अनचाहा उम्मीदवार मजबूत होता। बेहतर को चुनें। - नागपुर चुनाव कब हुए?
14 जनवरी 2026 को, 29 महानगर निगमों के लिए। - भागवत ने अराजकता का जिक्र क्यों किया?
महाभारत से उदाहरण- शासक न होना सबसे बुरा। - वोटिंग को कर्तव्य क्यों कहा?
लोकतंत्र की रीढ़। पहली जिम्मेदारी। - महाराष्ट्र पोल्स में कितने उम्मीदवार?
15,000 से ज्यादा, नागपुर में बीजेपी vs कांग्रेस मुख्य।
- anarchy voting risks
- Bhagwat Mahabharata reference
- civic poll voter turnout
- election participation importance
- Maharashtra civic polls 2026
- Mohan Bhagwat NOTA warning
- Nagpur Municipal Corporation elections
- NOTA dangers democracy
- RSS chief voter advice
- undesirable candidate promotion
- vote best available option
- voter duty RSS
Leave a comment