वर्ल्ड बैंक की ‘A Breath of Change’ रिपोर्ट: इंडो-गंगा क्षेत्र में 10 लाख असामयिक मौतें, 10% GDP नुकसान। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर इनकार का आरोप लगाया। कोयला प्लांट्स बंद, एयरशेड मैनेजमेंट जरूरी।
प्रदूषण का खौफ: 10% GDP नुकसान, कांग्रेस बोली- मोदी सरकार की नकारने वाली नीति खतरे की घंटी
वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट का बम: 10 लाख मौतें, 10% GDP नुकसान- प्रदूषण पर मोदी सरकार की आंखें बंद क्यों?
वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट ‘A Breath of Change’ ने भारत के प्रदूषण संकट को आईने दिखा दिया। इंडो-गंगा मैदान और हिमालयी पहाड़ियों में रोजाना करीब 10 लाख लोग जहरीली हवा में सांस लेते हैं। नतीजा- सालाना 10 लाख असामयिक मौतें और इलाके के GDP का 10% नुकसान। कांग्रेस के जयराम रमेश ने इसे मोदी सरकार पर हमला बोला। बोले, ‘ये रिपोर्ट समयानुकूल है। सरकार इनकार मोड में क्यों है?’ रिपोर्ट में साफ रोडमैप है- कोयला प्लांट्स पर सख्ती, पुराने यूनिट्स बंद, एयरशेड बेस्ड मैनेजमेंट।
रिपोर्ट के आंकड़े खौफजदा करने वाले। गंगा मैदान में PM2.5 लेवल WHO स्टैंडर्ड से 10 गुना ज्यादा। औसत जीवन प्रत्याशा 3 साल कम हो गई। आर्थिक नुकसान- उत्पादकता घटी, मेडिकल खर्च बढ़ा। दक्षिण एशिया में 60% लोग 35 µg/m³ से ज्यादा प्रदूषण झेल रहे। दिल्ली-NCR में हालात बदतर। जनवरी 2026 में AQI 300 पार हो गया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मौतों का डेटा नकारा तो जनता भड़क गई।
कांग्रेस की मांगें पुरानी
- 1981 के एयर पॉल्यूशन एक्ट की समीक्षा।
- NAAQS 2009 को PM2.5 फोकस्ड अपडेट।
- नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) का विस्तार- 131 शहरों से पूरे देश।
- GRAP में सख्ती, छूट बंद।
मोदी सरकार पर ‘इनकार संस्कृति’ का तंज।
प्रदूषण के स्रोत और हिस्सेदारी
- इंडस्ट्री: 51% (कोयला प्लांट्स सबसे बड़े)
- वाहन: 27%
- फसल जलाना: 17%
- बाकी: कचरा, बायोमास कुकिंग
दिल्ली में सर्दियों में सब जमा हो जाता।
GRAP स्टेजेस: क्या होता है
वर्ल्ड बैंक के सुझाव
- एयरशेड मैनेजमेंट: राज्य边界 पार कोऑर्डिनेशन।
- कोयला यूनिट्स पर एमिशन स्टैंडर्ड सख्त।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट बूस्ट, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स।
- दिल्ली अकेले से नहीं चलेगा, पूरे क्षेत्र को।
2030 तक PM2.5 35 µg/m³ से नीचे लाने की चुनौती।
सरकारी कदम: कितने कारगर?
- NCAP: 40% कटौती टारगेट 2026 तक (2017 से)।
- BS-VI वाहन, EV पुश।
- हार्वेस्टर सब्सिडी स्टबल बर्निंग रोकने को।
- नई एयर क्वालिटी कमीशन।
लेकिन लागू न होना बड़ी समस्या।
प्रदूषण का स्वास्थ्य असर
- सांस की बीमारियां: 7.2% दैनिक मौतें टॉप 10 शहरों में।
- हार्ट अटैक, स्ट्रोक रिस्क दोगुना।
- बच्चे-अस्पताल में 30% केस प्रदूषण से।
- लैंसेट स्टडी: PM2.5 से करोड़ों प्रभावित।
आर्थिक बोझ
- 10% GDP लॉस: प्रोडक्टिविटी, हेल्थकेयर।
- किसान: फसल उत्पादन 20% कम।
- टूरिज्म: दिल्ली-NCR में मंदी।
ग्लोबल वार्मिंग से आर्कटिक रूट्स प्रभावित।
राज्यों की जिम्मेदारी
- पंजाब-हरियाणा: स्टबल बर्निंग 40% योगदान।
- UP-बिहार: इंडस्ट्री अनियंत्रित।
- राजस्थान-MP: डस्ट स्टॉर्म्स।
एयरशेड अप्रोच जरूरी।
आम आदमी क्या करे?
- N95 मास्क, इनडोर एयर प्यूरीफायर।
- कार पूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट।
- घर में चूल्हा बंद, LPG इस्तेमाल।
- पेड़ लगाएं, कचरा न जलाएं।
कांग्रेस vs सरकार
रमेश बोले, ‘मोदी जी कितने दिन इनकार करेंगे?’ सरकार का जवाब- NCAP प्रोग्रेस, इंटरनेशनल AQI अविश्वसनीय। जनता GRAP सख्ती चाहती।
NCAP प्रोग्रेस 2025
- 131 शहरों में 20-40% टारगेट।
- PM10 में कुछ सुधार (अहमदाबाद, सोलापुर)।
- PM2.5 मॉनिटरिंग बढ़ी लेकिन लक्ष्य दूर।
भविष्य की राह
- कार्बन ट्रेडिंग 2026।
- 33-35% एमिशन इंटेंसिटी कट 2030।
- WHO गाइडलाइंस फॉलो।
सियासत से ऊपर उठकर एक्शन जरूरी।
वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट चेतावनी है। 10 लाख जिंदगियां दांव पर। GDP का 10% डूब रहा। मोदी सरकार को जागना होगा। एयरशेड मैनेजमेंट, कोयला बंदी, ट्रांसपोर्ट रिफॉर्म। साफ हवा सबका हक।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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