नोएडा सेक्टर 150 में घने कोहरे में युवराज मेहता (27) की SUV 70 फीट गहरे गड्ढे में गिरी। 2 घंटे छत पर चिल्लाए, पिता को फोन किया ‘पापा बचाओ’। रेस्क्यू लेट, डूब गए। लापरवाही की शिकायत।
सेक्टर 150 का काला सच: नो साइनेज, नो रिफ्लेक्टर- टेकी ने आखिरी कॉल में मांगी थी जान
नोएडा का दिल दहला देने वाला हादसा: गड्ढे में डूबते टेकी ने पिता को लगाए 10 कॉल- पापा मुझे बचा लो
17 जनवरी 2026 की रात करीब 12 बजे नोएडा के सेक्टर 150 में एक ऐसा हादसा हुआ जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से ड्यूनहंबी कंपनी की नाइट शिफ्ट खत्म कर अपनी ग्रैंड विटारा SUV में घर लौट रहे थे। घना कोहरा, अंधेरा और ATS ले ग्रैंडियोस के पास खुला गड्ढा- बस यही काफी था उनकी जान लेने को। उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल तोड़कर 70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज तैरना नहीं जानते थे, फिर भी गाड़ी से बाहर निकले और छत पर चढ़ गए। वहां से उन्होंने पिता राजकुमार मेहता को 10 बार फोन किया- पापा, गहरे गड्ढे में गिर गया, डूब रहा हूं, मुझे बचा लो।
युवराज बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे। मां की मौत 2 साल पहले हुई थी, बहन UK में। वो ताता यूरिका पार्क सोसाइटी में अकेले रहते थे। पिता ने बताया कि बेटा बहुत मेहनती था, एग्जाम क्रैक कर करियर बनाया। आखिरी कॉल में बोला, मैं मरना नहीं चाहता। फोन का फ्लैशलाइट जलाकर हाथ हिलाया, मदद की गुहार लगाई। आवाज साफ सुनाई दे रही थी लेकिन कोहरे में विजिबिलिटी जीरो। पिता कुछ ही मिनट में पहुंचे, पुलिस भी आई लेकिन कोई तैराकी वाला नहीं।
पासरबाई मोनिंदर ने जान जोखिम में डालकर पानी में कूदकर ढूंढा लेकिन न मिला। युवराज के दोस्त पंकज टोकस ने गुस्सा जताया- पुलिस वाले पानी में उतरे ही नहीं क्योंकि तैरना नहीं आता। क्रेन बुलाई गई, फायर डिपार्टमेंट, SDRF आई लेकिन उनके पास इक्विपमेंट नहीं। गाजियाबाद से NDRF को बुलाया, 1 घंटे लगे। करीब 2 घंटे तक युवराज छत पर लड़े रहे। 1:45 बजे चीखें रुक गईं। सुबह 4:30 बजे शव बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
परिवार ने लापरवाही का केस दर्ज किया। नो रिफ्लेक्टर्स, नो साइनेज, टूटी बाउंड्री, अनकवर्ड ड्रेन। लोकल रेजिडेंट्स ने महीनों से शिकायत की थी। MP महेश शर्मा, MLA तेजपाल सिंह नागर ने भी कहा था लेकिन कोई एक्शन नहीं। हादसे के बाद गड्ढे में कचरा भर दिया। प्रोटेस्ट हुए, कैंडल मार्च निकला। नोएडा अथॉरिटी ने बैरिकेड्स लगाए। पुलिस बोली जांच होगी, नेग्लिजेंस मिली तो एक्शन।
नोएडा के रोड सेफ्टी पर सवाल
| समस्या | विवरण | खतरा |
|---|---|---|
| खुले गड्ढे | कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए | रात में घातक |
| कोहरा+कोई लाइट | विजिबिलिटी 0 | एक्सीडेंट बढ़े |
| टूटी बाउंड्री | डेवलपर्स की लापरवाही | गाड़ियां गिरना |
| ड्रेन अनकवर्ड | पानी भरना आसान | डूबने का रिस्क |
पिछले हादसे
- 2025: ग्रेटर नोएडा में 3 मौतें खुले गड्ढों से।
- 2024: सेक्टर 62 में बाइक सवार डूबा।
- औसतन 20% रोड डेथ्स कंस्ट्रक्शन से।
कैसे बचें?
- फुल बीम हेडलाइट्स, स्पीड 30 kmph कोहरे में।
- GPS चेक, अनजान रोड अवॉइड।
- इमरजेंसी नंबर सेव: 112।
- फ्लोटिंग डिवाइस कार में रखें।
- लोकल अथॉरिटी को रिपोर्ट करें खुले गड्ढे।
कानूनी एंगल
- IPC 304A: लापरवाही से मौत- 2 साल कील।
- Noida Authority Act: सेफ्टी वायलेशन।
- हाई कोर्ट गाइडलाइंस: रिफ्लेक्टर्स अनिवार्य।
केस चलेगा।
परिवार का दर्द
पिता बोले, बेटा 2 घंटे जूझता रहा। डाइवर रस्सी से बचाता तो जान बच जाती। भीड़ ने वीडियो बनाए, मदद न की। सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
नोएडा अथॉरिटी का जवाब
सुरक्षा सुधार जरूरी
- LED रिफ्लेक्टर्स हर 50 मीटर।
- CCTV कंस्ट्रक्शन साइट्स पर।
- नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाएं।
- फाइन डेवलपर्स पर।
युवराज की मौत व्यर्थ न जाए। नोएडा जैसे शहरों में सेफ्टी पहले। टेकी की चीख सबको झकझोर गई।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- नोएडा हादसे में क्या हुआ?
SUV गड्ढे में गिरी, युवराज 2 घंटे छत पर लड़े, डूब गए। - युवराज ने क्या कहा पिता को?
पापा, गहरे गड्ढे में हूं, डूब रहा, बचा लो। 10 कॉल लगाए। - रेस्क्यू में देरी क्यों?
कोहरा, इक्विपमेंट शॉर्टेज। NDRF को 1 घंटा लगा। - लापरवाही किसकी?
नो रिफ्लेक्टर्स, टूटी वॉल, अनकवर्ड ड्रेन। शिकायतें इग्नोर। - अब क्या एक्शन?
प्रोब चल रही, नेग्लिजेंस पर केस। बैरिकेड्स लगे।
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