सुप्रीम कोर्ट ने ECI को आदेश दिया- पश्चिम बंगाल SIR में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले 1.25 करोड़ वोटरों के नाम ग्राम पंचायतों पर चस्पां करें। 10 दिन में आपत्ति, सुनवाई का मौका। व्हाट्सएप सर्कुलर बंद।
बंगाल चुनाव से पहले SC का हस्तक्षेप: 1.25 करोड़ नामों की लिस्ट पब्लिक करो, सुनवाई का मौका दो
सुप्रीम कोर्ट का पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट विवाद में बड़ा हस्तक्षेप: 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करें
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर ब्रेक लगा दिया। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और ज्योमलया बागची की बेंच ने चुनाव आयोग (ECI) को साफ आदेश दिया कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ कैटेगरी में आए 1.25 करोड़ वोटरों के नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक और वार्ड ऑफिसों पर चस्पां करें। कोर्ट ने कहा कि 2 करोड़ नोटिस जारी हो चुके हैं, लोगों पर तनाव है। हर वोटर को दस्तावेज जमा करने और सुनवाई का पूरा मौका मिले।
SIR तीन कैटेगरी में चल रहा- मैप्ड, अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी। तीसरी में पिता का नाम मिसमैच, उम्र में गैप कम (15 साल से कम) या ज्यादा (50 साल से ज्यादा), दादा-नाती के बीच असंगतियां। कोर्ट ने कहा कि ये मामूली बातें भी फ्लैग हो रही हैं। नोटिस पाने वाले 10 दिन में आपत्ति करें, दस्तावेज जमा करें। असंतोषजनक पेपर पर मौके पर सुनवाई। रसीद जरूर दें, फैसला लिखित कारणों से। वेस्ट बंगाल सरकार मैनपावर और कानून-व्यवस्था दे।
कोर्ट ने ECI के व्हाट्सएप सर्कुलर पर सख्ती दिखाई। कपिल सिब्बल ने बताया कि 300 जगहों पर सुनवाई हो रही, 1900 चाहिए। बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को मदद की इजाजत मांगी। श्याम दीवान ने कहा कि एक जिले में 2.30 लाख फ्लैग। जस्टिस बागची बोले, ’15 साल की उम्र गैप मां-बेटे में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी? चाइल्ड मैरिज यहाँ हकीकत है।’ नोबेल विजेता अमर्त्य सेन को भी नोटिस मिला। ECI के राकेश द्विवेदी ने कहा कि एल्गोरिदम से चेकिंग। कोर्ट ने फौरन सर्कुलर जारी करने को कहा।
SIR टाइमलाइन और आंकड़े
| चरण | तारीख | विवरण |
|---|---|---|
| नोटिस डेडलाइन | 19 जनवरी 2026 | दावा-आपत्ति |
| सुनवाई | 7 फरवरी तक | दस्तावेज चेक |
| फाइनल लिस्ट | 14 फरवरी | विधानसभा चुनाव के लिए |
| फ्लैग्ड वोटर | 1.25 करोड़ | लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी |
राजनीतिक विवाद
ममता बनर्जी ने इसे BJP का हथियार कहा। ‘ड्यूबियस कैटेगरी’ बताया। ECI ने 2002 वोटर लिस्ट से लिंकिंग चेक की। कोलकाता, हावड़ा जैसे जिलों में ज्यादा फ्लैग। विपक्ष ने वोटर पर्ज का आरोप लगाया। कोर्ट ने पारदर्शिता पर जोर दिया।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के उदाहरण
- पिता का नाम: राम vs रामचंद्र
- उम्र गैप: मां-बेटे में 14 साल
- दादा-नाती: 40 साल अंतर
- स्पेलिंग: साहा vs शाहा
ये मामूली लगें लेकिन ECI ने ERONET पोर्टल पर फ्लैग किया।
कोर्ट के मुख्य निर्देश
- नाम ग्रासरूट लेवल पर डिस्प्ले।
- 10 दिन आपत्ति विंडो।
- दस्तावेज रिसीविंग रसीद।
- अस्वीकार पर लिखित कारण।
- सुनवाई में व्यक्तिगत/प्रतिनिधि मौजूदगी।
- स्टेट से मैनपावर, लॉ एंड ऑर्डर।
ECI का बचाव
- 2 करोड़ नोटिस वैरिफिकेशन के लिए।
- फर्जी वोटर रोकना मकसद।
- SOP फॉलो।
लेकिन कोर्ट ने तनाव को माना। ‘सामान्य लोगों का स्ट्रेस समझें।’
पब्लिक इंपैक्ट
- ग्रामीण इलाकों में दौड़-भाग।
- बुजुर्ग, गरीब प्रभावित।
- BLA मदद अगर मंजूर हुई तो राहत।
फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को। अप्रैल-मई चुनाव।
कानूनी कोण
- पारदर्शिता अनुच्छेद 14।
- नेचुरल जस्टिस सुनवाई।
- ECI की पावर लेकिन फेयर प्रोसेस।
सिब्बल ने लिस्ट पब्लिश और डेट सुझाया।
भविष्य प्रभाव
वोटरों के लिए टिप्स
- आधार, पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट रखें।
- पंचायत जाकर चेक करें।
- 10 दिन में एक्शन लें।
- रसीद लें।
ये फैसला वोटर अधिकारों की जीत। पारदर्शिता से विवाद कम होगा। बंगाल चुनाव साफ-सुथरा होगा।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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