सुप्रीम कोर्ट ने SIR मामले में EC से सवाल किया- क्या आयोग के पास अपने नियम तोड़ने की असीम शक्ति? ‘अनियंत्रित घोड़ा नहीं बन सकता’। RP एक्ट की धारा 21 का हवाला। सुनवाई जारी।
मतदाता सूची पर SC की चेतावनी: चुनाव आयोग नियम तोड़कर सिविल अधिकारों से खिलवाड़ नहीं कर सकता
सुप्रीम कोर्ट ने EC को लताड़ा: SIR में ‘अनियंत्रित घोड़े’ की तरह शक्ति का दुरुपयोग नहीं चलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ा संदेश दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या EC के पास अपने ही नियम तोड़ने और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) की अनदेखी करने की असीमित शक्ति है? चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस ज्योमाला बाघची की बेंच ने कहा, ‘EC अनियंत्रित घोड़े की तरह नहीं भाग सकता। मतदाता सूची के संशोधन से लोगों के सिविल अधिकार प्रभावित होते हैं, इसलिए प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।’
ये टिप्पणी वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी के तर्कों पर आई, जो EC की ओर से पेश हुए। कोर्ट ने RP Act की धारा 21(2) का हवाला दिया, जो मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने की प्रक्रिया निर्धारित करती है। CJI ने कहा, ‘वोटर लिस्ट रिवीजन से सिविल परिणाम होते हैं। अगर नागरिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं तो धारा 2 के अनुसार प्रक्रिया क्यों न अपनाई जाए?’ जस्टिस बाघची ने जोर दिया, ‘कोई भी शक्ति असीमित या न्यायिक समीक्षा से परे नहीं। नियम 21 में बंधन हैं। गहन संशोधन के लिए नए नियम बनाकर 4 से 13 तक लागू करने पड़ेंगे।’
SIR क्या है? चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर चलाया जाने वाला विशेष अभियान, जिसमें मतदाता सूचियों की गहन जांच होती है। विपक्षी दल और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने याचिका दायर कर कहा कि EC अपने नियम तोड़ रही। कई राज्यों में लाखों वोटरों के नाम कटे या जोड़े गए बिना उचित नोटिस। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या EC को RP Act से छूट है?
EC का पक्ष
द्विवेदी ने दलील दी कि SIR हर बार नया प्रोसेस नहीं बना सकते। RP Act ही प्रक्रिया बताता है। धारा 21 अलग डोमेन में काम करती। लेकिन कोर्ट असहमत। बोली, ‘शक्ति कमजोर न हो लेकिन अनियंत्रित भी न रहे। नियमों का पालन जरूरी।’
SIR विवाद के प्रमुख बिंदु
| मुद्दा | EC का दावा | याचिकाकर्ताओं का तर्क | SC टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| प्रक्रिया | RP Act फॉलो | नियम 4-13 अनुपालन नही | अनियंत्रित घोड़ा नहीं |
| नोटिस | पर्याप्त दिया | लाखों को नाम कटे | सिविल अधिकार प्रभावित |
| समय | 5 साल चक्र | चुनाव से पहले जल्दबाजी | निष्पक्षता जरूरी |
| शक्ति | वैधानिक | असीमित नहीं | न्यायिक समीक्षा होगी |
महत्वपूर्ण धाराएं
- RP Act धारा 21(2): मतदाता सूची संशोधन का तरीका।
- धारा 21(3): गहन रिवीजन के लिए नए नियम।
- नियम 25: प्रक्रिया का फ्रेमवर्क।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये नागरिक अधिकारों से जुड़ा मसला।
राजनीतिक संदर्भ
SIR कई संवेदनशील राज्यों में चल रहा- बिहार, यूपी, महाराष्ट्र। विपक्ष का आरोप- वोटर लिस्ट मैनिपुलेशन। ADR ने डेटा दिखाया कि गरीब इलाकों में ज्यादा डिलीशन। EC ने साफ-सफाई अभियान बताया। लेकिन कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत याद दिलाए।
कोर्ट की चिंताएं
- क्या EC नियम बना सकता या तोड़ सकता?
- वोटर को नाम हटने का नोटिस क्यों न मिले?
- चुनाव से पहले SIR का टाइमिंग संदिग्ध।
सुनवाई जारी, फैसला बाकी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
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