कर्नाटक का AI-आधारित करतव्य सिस्टम अब 1.3 लाख सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस ट्रैक कर रहा। आधार eKYC, फेशियल रिकग्निशन, जियोफेंसिंग से प्रॉक्सी खत्म। हेल्थ-एजुकेशन में लागू, पूरे राज्य में विस्तार।
AI से स्मार्ट गवर्नेंस: कर्नाटक के करतव्य ने जीता अवॉर्ड, 5 लाख स्टूडेंट्स पर भी लागू
कर्नाटक का AI करतव्य: 1.3 लाख सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस अब मोबाइल सेल्फी से ट्रैक
कर्नाटक सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस में नया कीर्तिमान रचा है। उनका AI-आधारित अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम ‘करतव्य’ (KAAMS) अब 1.3 लाख सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति ट्रैक कर रहा है। ये पुराने बायोमेट्रिक डिवाइसों का स्मार्ट विकल्प है, जो सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस (CeG) ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के तहत घर में बनाया। मोबाइल-फर्स्ट ऐप आधार eKYC, AI फेशियल रिकग्निशन (लिवनेस डिटेक्शन के साथ) और GIS जियोफेंसिंग यूज करता है। कर्मचारी 100 मीटर रेडियस में ऑफिस आकर सेल्फी लेते हैं, रीयल-टाइम लोकेशन वैरिफाइड अटेंडेंस दर्ज।
पुराने सिस्टम की कमियां दूर। बायोमेट्रिक मशीनें खराब होतीं, प्रॉक्सी अटेंडेंस आम। करतव्य में AI सेल्फी को रजिस्ट्रेशन फोटो से मैच करता, लिवनेस चेक फोटो/वीडियो प्रॉक्सी रोकता। जियोफेंसिंग गलत लोकेशन ब्लॉक। अब विधान सौधा से फील्ड ऑफिस तक डैशबोर्ड पर लाइव डेटा। हेल्थ और एजुकेशन डिपार्टमेंट में पहले लागू, अब अन्य में फेज्ड रोलआउट। सीनियर ऑफिशियल बोले, ‘मैनुअल इंटरवेंशन कम, सिक्योर वैरिफिकेशन।’
1.3 लाख यूजर्स का आंकड़ा यूजर एक्सेप्टेंस दिखाता। कॉस्ट सेविंग बायोमेट्रिक हार्डवेयर से, वेंडर लॉक-इन खत्म। हाल ही में गवर्नेंस नाउ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समिट 2025 में ‘बेस्ट यूज ऑफ बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी’ कैटेगरी में एक्सीलेंस अवॉर्ड मिला।
करतव्य के फीचर्स
- आधार eKYC वेरिफिकेशन।
- AI फेशियल रिकग्निशन + लिवनेस डिटेक्शन।
- 100m जियोफेंसिंग।
- HRMS इंटीग्रेशन।
- रीयल-टाइम डैशबोर्ड।
- प्रॉक्सी/मैनिपुलेशन अलर्ट।
कर्नाटक के अन्य AI इनिशिएटिव्स
- 50 लाख स्कूल स्टूडेंट्स के लिए AI अटेंडेंस।
- मजल प्रिंट: गाय-भैंस के लिए बायोमेट्रिक, किसानों को सही बेनिफिट।
- सारांश: AI से गवर्नमेंट ऑर्डर्स समरी, तेज डिसीजन।
- AI-ML सेल: चैटबॉट्स, ग्रिवांस सॉल्यूशन।
कर्मचारी प्रभाव
| पहले (बायोमेट्रिक) | अब (करतव्य AI) | फायदा |
|---|---|---|
| मशीन डाउन, लेट मार्किंग | मोबाइल सेल्फी, कहीं भी | हमेशा ऑन |
| प्रॉक्सी आम | लिवनेस + जियोफेंस | 99% एक्यूरेट |
| मैनुअल रिपोर्ट | लाइव डैशबोर्ड | इंस्टेंट ट्रैक |
| वेंडर कॉस्ट | इन-हाउस ऐप | जीरो मेंटेनेंस |
पायलट सक्सेस
हेल्थ डिपार्टमेंट में डॉक्टर्स की अनुपस्थिति घटी। PHC में स्टाफ प्रेजेंट। DPAR प्रिंसिपल सेक्रेटरी पंकज कुमार पांडे बोले, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से अकाउंटेबिलिटी बढ़ी। 5 लाख कर्मचारियों के लिए प्लान।
चुनौतियां और सॉल्यूशन
- प्राइवेसी: डेटा गवर्नमेंट सर्वर, प्राइवेट शेयर नहीं।
- इंटरनेट: ऑफलाइन मोड, बाद में सिंक।
- ट्रेनिंग: वीडियो ट्यूटोरियल्स।
- रिजिस्टेंस: अवेयरनेस कैंप्स।
कॉस्ट बेनिफिट
- बायोमेट्रिक AMC: सालाना 50 करोड़।
- करतव्य: जीरो हार्डवेयर कॉस्ट।
- ROI: 6 महीने में रिकवर।
अवॉर्ड जीतकर बेंगलुरु AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को बूस्ट।
भविष्य प्लान्स
- पूरे 5 लाख कर्मचारियों पर रोलआउट।
- AI एनालिटिक्स: लेटकमी पैटर्न।
- इंटीग्रेशन: पेरोल, लीव मैनेजमेंट।
- अन्य राज्य कॉपी करेंगे।
कर्मचारियों के अनुभव
‘शुरू में अजीब लगा लेकिन आसान। अब ऑफिस आने का रूटीन।’ – हेल्थ वर्कर
‘प्रॉक्सी बंद से टीम वर्क बेहतर।’ – एजुकेशन ऑफिसर
ऐप रेटिंग 4.5+।
राष्ट्रीय प्रभाव
कर्नाटक पहला राज्य AI अटेंडेंस में। अन्य राज्य वॉच कर रहे। डिजिटल इंडिया को सॉलिड एग्जांपल। प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, भ्रष्टाचार कम।
करतव्य ने साबित किया AI गवर्नेंस चेंजर। पारंपरिक तरीकों को अलविदा। स्मार्ट कर्नाटक का असली स्वागत।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- करतव्य AI सिस्टम क्या है?
कर्नाटक का मोबाइल ऐप आधारित अटेंडेंस। सेल्फी + जियोफेंसिंग से ट्रैक। - कैसे काम करता?
100m ऑफिस रेडियस में सेल्फी। AI मैच, लिवनेस चेक। - कितने कर्मचारी कवर?
1.3 लाख, 5 लाख तक प्लान। - प्रॉक्सी कैसे रोकता?
फेशियल रिकग्निशन + लोकेशन वैरिफाई। - कॉस्ट कितना?
इन-हाउस, जीरो हार्डवेयर। अवॉर्ड विनर।
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