सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन को ‘हमेशा के लिए नुकसान’ बताया। विशेषज्ञ समिति गठित कर खनन मुद्दों की गहन जांच होगी। राजस्थान ने कोई अवैध खनन न करने का भरोसा दिया। पुरानी परिभाषा पर रोक जारी।
अरावली में अवैध खनन का खतरा: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों गठित की विशेषज्ञ समिति, जानें पूरा सच?
अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और विशेषज्ञ समिति का फैसला
दिल्ली से गुजरात तक फैली अरावली पहाड़ियां आज संकट में हैं। ये दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाएं हैं, जो रेगिस्तान को रोकती हैं, भूजल भरती हैं और हवा साफ रखती हैं। लेकिन अवैध खनन ने इन्हें चट्टानों का ढेर बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 21 जनवरी 2026 को साफ कहा- अवैध खनन से ‘हमेशा के लिए नुकसान’ हो सकता है। इसलिए कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया। ये समिति खनन के हर पहलू की गहन जांच करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अरावली के खनन और इससे जुड़े मुद्दों पर पूरी तरह जांच जरूरी। बेंच में जस्टिस ज्योमल्य बागची और विपुल पंचोली भी थे। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर से चार हफ्ते में पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम मांगे। ये समिति कोर्ट के निर्देशन में काम करेगी। राजस्थान सरकार ने भरोसा दिया कि अवैध खनन नहीं होगा। कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 के आदेश को स्थगित रखा, जिसमें अरावली की नई परिभाषा मानी गई थी।
अरावली विवाद की शुरुआत कहां से हुई? 2024 में कोर्ट ने खनन पर सख्ती बरती। पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने परिभाषा दी- 100 मीटर ऊंचाई वाली चोटी को ‘अरावली हिल’ और 500 मीटर दूरी पर दो चोटियों को ‘रेंज’ कहा। लेकिन इससे बड़े इलाके खनन के लिए खुल सकते थे। किसान और पर्यावरण संगठनों ने विरोध किया। दिसंबर 2025 में कोर्ट ने इसे स्थगित किया। कहा- अस्पष्टताएं दूर करनी होंगी। अब नई समिति पुरानी रिपोर्ट जांचेगी, खनन जोखिम बताएगी।
अरावली क्यों खास? ये 700 किलोमीटर लंबी श्रृंखला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात से गुजरती है। यहां जैव विविधता है- तेंदुआ, हिरण, सैकड़ों पक्षी। ये थार रेगिस्तान को फैलने से रोकती। भूजल रिचार्ज करती। लेकिन खनन ने गड्ढे बना दिए। गुणवत्ता वाली चूना पत्थर निकलता है, जिससे सीमेंट इंडस्ट्री फलती। लेकिन नुकसान बड़ा- मिट्टी कटाव, बाढ़, प्रदूषण। ICMR और पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट्स कहती हैं कि खनन से जल स्तर 20-30 मीटर गिरा।
अवैध खनन कैसे पनपता? राजस्थान में सबसे ज्यादा। ट्रक रातोंरात पत्थर ले जाते। स्थानीय माफिया कमाऊ। 2025 में सैटेलाइट इमेज से 200 से ज्यादा जगहें पकड़ी गईं। हरियाणा में महेंद्रगढ़, दिल्ली में आउटर इलाके। कोर्ट ने FSI रिपोर्ट 2010 को आधार बनाया- कोई नया लीज नहीं। लेकिन पुराने रिन्यूअल पर सवाल। किसानों ने कहा- लीज देकर बर्बादी हो रही। कोर्ट ने सुनवाई में दर्ज किया।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख आदेशों की समयरेखा
- मई 2024: खनन पर रोक, एकसमान मानदंड।
- नवंबर 2025: नई परिभाषा (100 मीटर हिल, 500 मीटर रेंज) स्वीकार।
- दिसंबर 2025: आदेश स्थगित, अस्पष्टताएं दूर करने को कहा।
- जनवरी 2026: विशेषज्ञ समिति गठन, राजस्थान का भरोसा दर्ज।
अरावली खनन के नुकसान: आंकड़ों में
| प्रभाव | विवरण | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| भूजल ह्रास | 20-30 मीटर गिरावट | राजस्थान 60% |
| वन कवर कम | 1980-2020 में 25% कमी | 6921 वर्ग किमी |
| जैव विविधता | 50+ प्रजातियां खतरे में | हरियाणा-राजस्थान |
| मिट्टी कटाव | 10 लाख टन सालाना | दिल्ली-NCR |
पर्यावरणविद क्या कहते? वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अनूप प्रकाश ने कहा- अरावली के बिना NCR रेगिस्तान बनेगा। अरावली ग्रीन वॉल है। WHO की रिपोर्ट में खनन से धूल से फेफड़े खराब। ICMR स्टडीज में किडनी स्टोन बढ़े। आयुर्वेद में अरावली जड़ी-बूटियां- हरड़, बहेड़ा। खनन ने नष्ट कर दिया। पारंपरिक ज्ञान कहता- प्रकृति से छेड़ो मत।
राजस्थान सरकार का रुख। ASG के.एम. नटराज ने कहा- अवैध खनन रोका जाएगा। लेकिन किसान बोले- लीज जारी। कोर्ट ने चेताया- कोई गतिविधि नहीं। अंतरिम आदेश जारी। गुजरात-हरियाणा-Delhi ने समर्थन दिया। केंद्र ने मैनेजमेंट प्लान बनाने को कहा। लेकिन विशेषज्ञ रिपोर्ट का इंतजार।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर क्या आदेश दिया?
विशेषज्ञ समिति गठित की। अवैध खनन पर रोक। नई परिभाषा स्थगित। चार हफ्ते में नाम सुझाने को कहा। - अरावली की नई परिभाषा क्या थी?
100 मीटर ऊंची चोटी- हिल, 500 मीटर दूरी पर रेंज। लेकिन विरोध के बाद स्थगित। - अवैध खनन से क्या नुकसान?
भूजल सूखना, जंगल नाश, बाढ़, प्रदूषण। हमेशा के लिए क्षति। - राजस्थान ने क्या भरोसा दिया?
कोई अवैध खनन नहीं होगा। कोर्ट ने दर्ज किया। - समिति क्या करेगी?
खनन जोखिम जांच, परिभाषा साफ, पर्यावरण प्रभाव अध्ययन। कोर्ट सुपरविजन में।
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