भोपाल की चिनार ड्रीम सिटी सोसाइटी में 77 साल के पृतम गिरि 7 जनवरी को गायब हो गए। 10 दिन बाद लिफ्ट शाफ्ट में सड़ी लाश मिली। परिवार ने बिल्डर-मैनेजमेंट पर लापरवाही का आरोप लगाया। सुरक्षा की पोल खुली।
भोपाल सोसाइटी में लिफ्ट का काल: 1500 रुपए मेंटेनेंस लेते थे, बुजर्ग की मौत पर खुली पोल
भोपाल लिफ्ट हादसा: 77 साल के बुजुर्ग 10 दिन तक लिफ्ट शाफ्ट में कुचले पड़े रहे, सोसाइटी की लापरवाही ने लिया जान
भोपाल के मिसरोड़ इलाके में चिनार ड्रीम सिटी नाम की पॉश सोसाइटी में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को सन्न कर दिया। 77 साल के बुजुर्ग पृतम गिरि गोस्वामी 7 जनवरी को दोपहर में घर से निकले। सर्दी के मौसम में बाहर धूप में बैठने गए थे। उसके बाद लौटे ही नहीं। बेटा धर्मेंद्र ने तुरंत मिसरोड़ थाने में मिसिंग रिपोर्ट लिखाई। पुलिस और परिवार ने पूरे शहर में तलाशी ली, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं कि वो अपनी ही सोसाइटी के लिफ्ट शाफ्ट में फंसे थे। 16 जनवरी की रात को बदबू फैलने पर लिफ्ट खोली तो सड़ी-गली लाश मिली।
पुलिस ने बताया कि पृतम जी तीसरी मंजिल पर फ्लैट D-304 में बेटे धर्मेंद्र के साथ रहते थे। लिफ्ट का दरवाजा खुला था, लेकिन केबिन नीचे खराब खड़ा था। बुजुर्ग अंदर घुस गए और 30-40 फुट नीचे शाफ्ट में गिर पड़े। उसके बाद 10 दिनों तक लिफ्ट ऊपर-नीचे चलती रही, जिससे शरीर बुरी तरह कुचल गया। डी-2 जोन के एडीसीपी गौतम सोलंकी ने कहा, ‘दरवाजा खुला देख अंदर चले गए, केबिन न होने का पता न चला।’
परिवार और सोसाइटी के लोग सदमे में हैं। बेटे धर्मेंद्र गोस्वामी ने रोते हुए कहा, ‘ये हादसा नहीं, खुली लापरवाही है। लिफ्ट महीनों से खराब चल रही थी। 6 जनवरी को ही ब्रेकडाउन हुआ था। हमने मैनेजमेंट को बताया, पुलिस को भी। किसी ने लिफ्ट चेक नहीं की। अगर उसी दिन देख लेते तो पिताजी बच जाते।’ वो हर सोसाइटी वाले लिफ्ट का सेफ्टी ऑडिट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई चाहते हैं। हर फ्लैट से 1500 रुपए मेंटेनेंस लिया जाता है, फिर भी बेसिक सेफ्टी जीरो।
सोसाइटी वासियों ने भी गुस्सा निकाला। एक रेजिडेंट बोले, ‘लिफ्ट का दरवाजा बिना केबिन के खुल जाता था। कई बार शिकायत की, लेकिन बिल्डर और मैनेजमेंट ने अनसुना किया। बदबू आने पर टेक्नीशियन बुलाया, तभी शाफ्ट खुला। अगर पहले चेक होता तो इतना बुरा हाल न होता।’ मिसरोड़ थाने के इंचार्ज रतन सिंह परिहार ने कहा, पंचनामा भर लिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर आगे एक्शन। मेंटेनेंस टीम से पूछताछ चल रही।
ये पहला केस नहीं। भारत में लिफ्ट हादसे बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक 2024 में 164 लिफ्ट से जुड़े हादसे हुए, जिनमें 89 मौतें। भोपाल में ही पिछले 5 सालों में 12 ऐसे मामले। ज्यादातर कारण- खराब मेंटेनेंस, सेफ्टी सेंसर फेल, दरवाजे लॉक न होना। लिफ्ट एंड एस्केलेटर एक्ट 1991 कहता है हर 6 महीने ऑडिट जरूरी, लेकिन लागू नहीं होता। प्रीमियम सोसाइटियों में भी लापरवाही।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- पृतम गिरि की मौत कैसे हुई?
लिफ्ट का दरवाजा खुला था, केबिन नीचे। तीसरी मंजिल से शाफ्ट में गिरे। 10 दिन लिफ्ट चलने से कुचल गए। - सोसाइटी की लापरवाही क्या थी?
लिफ्ट महीनों खराब, शिकायतें अनसुनी। मेंटेनेंस 1500 लेते, चेक न किया। - पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पंचनामा, पोस्टमॉर्टम। मेंटेनेंस टीम से पूछताछ। 304A IPC में केस। - लिफ्ट सेफ्टी के नियम क्या?
6 मंथली इंस्पेक्शन, सेंसर, AMC। RERA बिल्डर जिम्मेदार। - परिवार को क्या मांग?
दोषियों पर FIR, सभी लिफ्ट ऑडिट, मुआवजा।
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