जापान ने दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट काशीवाजाकी-कारीवा का रीस्टार्ट कुछ घंटों बाद सस्पेंड कर दिया। कंट्रोल रॉड में खराबी से रिएक्टर 6 बंद। फुकुशिमा की यादें ताजा, बिजली संकट गहराया। पूरी डिटेल।
जापान का बड़ा झटका: दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्लांट चालू होते ही बंद, फुकुशिमा का खौफ फिर लौटा?
जापान न्यूक्लियर संकट: दुनिया का सबसे बड़ा प्लांट चालू होते ही बंद, कंट्रोल रॉड फेल से हड़कंप
जापान से एक ऐसी खबर आई है जो पूरी दुनिया के न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स को सोचने पर मजबूर कर रही है। दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट काशीवाजाकी-कारीवा बुधवार को फिर चालू हुआ था। 2011 के फुकुशिमा आपदा के बाद पहली बार ऐसा हुआ। लेकिन गुरुवार को कुछ ही घंटों बाद इसे रोक दिया गया। वजह- कंट्रोल रॉड में खराबी। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO) ने कहा रिएक्टर स्थिर है, बाहर कोई रेडिएशन लीक नहीं। फिर भी प्लांट सस्पेंड। ये खबर जापान की बिजली व्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
काशीवाजाकी-कारीवा प्लांट नीगाता प्रांत में है, टोक्यो से 300 किमी उत्तर-पश्चिम। इसमें 7 रिएक्टर हैं, कुल कैपेसिटी 8,212 मेगावाट- दुनिया में सबसे ज्यादा। नंबर 6 रिएक्टर को रीस्टार्ट करने की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। मंगलवार को प्लान था लेकिन अलार्म फेलियर से एक दिन की देरी। जापान न्यूक्लियर रेगुलेटरी अथॉरिटी ने हरी झंडी दी। वर्कर्स ने कंट्रोल रॉड्स हटाने शुरू किए- न्यूक्लियर फिशन चालू करने के लिए। लेकिन प्रोसेस के दौरान अलर्ट बजा। TEPCO ने तुरंत सब रोक दिया। स्पोक्सपर्सन ताकाशी कोबायाशी ने कहा, ‘इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स चेक कर रहे। रिएक्टर शटडाउन स्टेट में है।’
कंट्रोल रॉड्स क्या हैं? न्यूक्लियर रिएक्टर का दिल। ये न्यूक्लियर चेन रिएक्शन को कंट्रोल करते हैं। बोरॉन से बने ये रॉड्स कोर में डाले जाते हैं तो रिएक्शन रुकता है। हटाते हैं तो चेन रिएक्शन तेज होता है, बिजली बनती है। फुकुशिमा जैसी आपदा में कूलिंग फेल होने से रॉड्स मेल्ट हो गए थे। यहां खराबी इलेक्ट्रिकल लग रही। TEPCO ने कहा कोई सेफ्टी इश्यू नहीं, लेकिन पूरी जांच के बाद ही आगे बढ़ेंगे। रीस्टार्ट कब- अनिश्चित।
फुकुशिमा की यादें अभी ताजा हैं। 2011 में 9.0 तीव्रता का भूकंप, सुनामी। TEPCO के फुकुशिमा दाइची प्लांट में 3 रिएक्टर मेल्टडाउन। 1,60,000 लोग बेघर। अब तक 7 लाख टन रेडिएटेड वॉटर समंदर में डाला गया। जापान ने सभी 54 न्यूक्लियर रिएक्टर बंद कर दिए। 2015 से धीरे-धीरे कुछ रीस्टार्ट हो रहे। लेकिन काशीवाजाकी-कारीवा 14 साल बंद था। लोकल लोग डरते हैं- प्लांट एक्टिव सीस्मिक फॉल्ट पर है। 2007 में 6.6 का भूकंप आया था। 40,000 सिग्नेचर वाली पेटीशन TEPCO को दी गई। सर्वे में 60% लोकल विरोधी।
जापान को न्यूक्लियर क्यों जरूरी? संसाधन-कम देश। 2011 से पहले न्यूक्लियर से 30% बिजली। कोयला, गैस इंपोर्ट पर निर्भर। 2022 में एनर्जी क्राइसिस- यूक्रेन वॉर से। सरकार का प्लान- 2030 तक 20-22% न्यूक्लियर। नंबर 6 रिएक्टर से 1.35 मिलियन घरों को बिजली मिलती। सर्दियों में डिमांड हाई। सस्पेंशन से blackout का खतरा। TEPCO पर प्रेशर। बाकी 5 रिएक्टर 2030 तक बंद हो सकते। सिर्फ 2 चलेंगे तो कैपेसिटी आधी।
TEPCO का इतिहास विवादास्पद। फुकुशिमा में सेफ्टी लापरवाही। अब काशीवाजाकी पर भरोसा कम। गवर्नर हिदेयो हनाजुमी ने पिछले साल अप्रूवल दिया। लेकिन असेंबली में डिबेट। प्रोटेस्ट हुए। एक 73 साल की महिला बोलीं, ‘टोक्यो का प्लांट नीगाता में क्यों? हम खतरे में क्यों?’ सरकार कहती है सेफ्टी स्टैंडर्ड्स IAEA से सख्त। लेकिन लोग मानते नहीं।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- काशीवाजाकी-कारीवा प्लांट क्यों बंद हुआ?
कंट्रोल रॉड हटाते समय इलेक्ट्रिकल खराबी। कुछ घंटों बाद सस्पेंड। रेडिएशन लीक नहीं। - फुकुशिमा से क्या कनेक्शन?
TEPCO दोनों चलाता। 2011 के बाद पहला बड़ा रीस्टार्ट अटेम्प्ट। सेफ्टी फीयर्स। - जापान को न्यूक्लियर क्यों चाहिए?
बिजली का 30% सोर्स था। अब 8%। 2030 तक 20% टारगेट। इंपोर्ट बचत। - लोकल लोग क्यों विरोध कर रहे?
सीस्मिक फॉल्ट पर प्लांट। 2007 क्वेक। TEPCO पर भरोसा नहीं। 60% खिलाफ। - आगे क्या होगा?
जांच पूरी होने पर रीस्टार्ट। डिले हो सकता। बिजली क्राइसिस रिस्क।
Leave a comment