पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने इलेक्शन अमेंडमेंट बिल 2026 पास किया। अब सांसद सुरक्षा का हवाला देकर अपनी और परिवार की संपत्ति की डिटेल गुप्त रख सकेंगे। PTI ने विरोध किया। पूरी डिटेल
पाकिस्तान में पारदर्शिता पर ब्रेक: सांसदों की प्रॉपर्टी अब सीक्रेट, खतरे का बहाना?
पाकिस्तान नेशनल असेंबली का नया कानून: सांसद अब संपत्ति की डिटेल छिपा सकेंगे, सुरक्षा का बहाना
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने बुधवार को एक ऐसा बिल पास कर दिया जिसने पूरे देश में सनसनी मचा दी। इलेक्शन अमेंडमेंट बिल 2026 के नाम से मशहूर ये कानून सांसदों को अपनी और परिवार की संपत्ति की पूरी डिटेल जनता से छिपाने की छूट देता है। बस इतना करना होगा कि स्पीकर या सीनेट चेयरमैन को लिखित आवेदन दें और कहें कि खुलासा करने से जान का खतरा है। एक साल तक ये छूट मिल सकती है, बशर्ते इलेक्शन कमीशन को गोपनीय रूप से सही डिटेल दें। जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पीटीआई अकेले विरोध में उतरी।
पुराने कानून में क्या था? इलेक्शन एक्ट 2017 की धारा 138 के तहत नेशनल असेंबली, सीनेट और प्रांतीय असेंबली के सभी सदस्य हर साल 31 दिसंबर तक अपनी, पत्नी और आश्रित बच्चों की संपत्ति-देनदारी की डिटेल ईसीपी को देते हैं। ईसीपी इसे ऑफिशियल गजट में प्रकाशित करता है। जनता देख सकती है। लेकिन अब ये बिल धारा 138 में बदलाव लाता है। सांसद लिखित रिक्वेस्ट दें तो स्पीकर या चेयरमैन रोक सकते हैं। बिल का उद्देश्य बताता है- पारदर्शिता अच्छी है लेकिन अति खुलासा सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। संतुलन जरूरी।
बिल को पीपीपी के शाजिया मर्री और सैयद नवेद कमर ने पिछले साल पेश किया था। तब पीएमएल-एन और पीटीआई दोनों विरोध में थे। इस बार सिर्फ पीटीआई खड़ी रही। लॉ मिनिस्टर आजम नजीर तरार ने बचाव किया। कहा- ईसीपी के कई मामले पहले से एफसीसी के पास जाते हैं। पार्टी बैन या फ्लोर क्रॉसिंग जैसे मुद्दे संवैधानिक। पीटीआई चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान भड़के। बोले- 20 पोलिंग स्टेशन पर री-पोल का फैसला अब कांस्टीट्यूशनल कोर्ट में? ये संवैधानिक व्याख्या की जरूरत नहीं। सुप्रीम कोर्ट से शिफ्ट कर रहे।
बिल में और बदलाव भी हैं। इलेक्शन एक्ट की धारा 155, 202, 212, 232 में ‘सुप्रीम कोर्ट’ की जगह ‘फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट’ (एफसीसी) डाल दिया। 27वीं कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट के बाद ये जरूरी था। अपील, कानूनी व्याख्या, चुनाव विवाद अब एफसीसी संभालेगा। नवेद कमर ने बहस में गुल प्लाजा फायर का जिक्र किया। कहा- 18वीं अमेंडमेंट को बदलने का बहाना न बनाएं। पाकिस्तान फेडरल देश है, पावर सेंटरलाइज न करें। अली मुहम्मद खान ने इमरान पर हमला बोला- 75 साल के बुजुर्ग को अदियाला जेल में परिवार-वकील से मिलने नहीं दे रहे। राजनीतिक नेता बात करें, इमरान को रिहा करें।
ये बिल अभी कानून नहीं बना। सीनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति चाहिए। पास होने के बाद क्या असर? पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के आरोप आम हैं। सांसदों की संपत्ति जनता के सामने आती तो सवाल उठते। अब छूट मिलेगी तो ट्रांसपेरेंसी कम। पीटीआई का आरोप- सत्ताधारी अपनी कमाई छिपा रहे। शेहबाज शरीफ सरकार पर दबाव। इमरान समर्थक सड़कों पर। लेकिन सरकार सुरक्षा का तर्क दे रही। गुल प्लाजा फायर जैसी घटनाओं का हवाला।
पाकिस्तान की राजनीति का बैकग्राउंड समझें। इमरान खान 2022 से जेल में। पीटीआई दबाव में। शेहबाज सरकार पीपीपी-पीएमएल-एन गठबंधन। 27वीं अमेंडमेंट ने एफसीसी बनाया। चुनाव सुधार चल रहे। संपत्ति खुलासा 2017 से सख्त था। नोमिनेशन पेपर में डिटेल भरनी पड़ती। जनता चेक करती। अब ये ढील। क्या ये भ्रष्टाचार बढ़ाएगा? विशेषज्ञों का मानना- पारदर्शिता लोकतंत्र की रीढ़। छूट दुरुपयोग हो सकती।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- नया बिल क्या permite करता है?
सांसद सुरक्षा खतरे का हवाला देकर 1 साल तक संपत्ति डिटेल गजट में न छपने दें। ईसीपी को गोपनीय दें। - कौन विरोध कर रहा?
सिर्फ पीटीआई। इमरान खान की पार्टी। पहले पीएमएल-एन भी थी। - एफसीसी का क्या रोल?
सुप्रीम कोर्ट की जगह अपील, विवाद सुलझाएगा। 27वीं अमेंडमेंट से। - बिल कब कानून बनेगा?
सीनेट मंजूरी और राष्ट्रपति हां के बाद। - उद्देश्य क्या बताया?
ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा का बैलेंस। अति खुलासा खतरा।
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