भरतपुर के पीपला गांव के अग्निवीर पुष्पेंद्र सिंह सियाचिन ड्यूटी से छुट्टी पर लौट रहे थे। घर से 3 किमी दूर झाड़ियों में खून से लथपथ शव मिला। हिट एंड रन का शक, पुलिस जांच में। पूरा मामला।
सियाचिन के जांबाज अग्निवीर पुष्पेंद्र की दर्दनाक मौत: घर से 3 किमी दूर झाड़ियों में शव मिला!
भरतपुर में अग्निवीर पुष्पेंद्र सिंह की दुखद मौत: सियाचिन से घर लौटते वक्त हादसा, गांववालों का रो-रोकर बुरा हाल
राजस्थान के भरतपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है जो हर किसी का दिल दहला देगी। सियाचिन ग्लेशियर में तैनात 22 साल का अग्निवीर पुष्पेंद्र सिंह छुट्टी लेकर घर लौट रहा था। गुरुवार शाम को उसने पिता को फोन किया कि वह मथुरा पहुंच गया है और डेढ़ घंटे में घर होगा। लेकिन रात 10 बजे तक नहीं पहुंचा तो परिजन चिंतित हो गए। आधी रात को गांववालों ने खोजा तो पीपला गांव से महज 3 किमी दूर सड़क किनारे झाड़ियों में उसका खून से लथपथ शव पड़ा मिला। पुलिस को शक है कि किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी।
पीपला गांव चिकसाना थाना क्षेत्र में आता है। पुष्पेंद्र तीन साल पहले अग्निवीर योजना से सेना में भर्ती हुआ था। सियाचिन जैसी दुनिया की सबसे ठंडी और खतरनाक जगह पर ड्यूटी कर रहा था। तीन महीने बाद छुट्टी मिली तो खुशी से घर आ रहा था। पिता विजय सिंह किसान हैं। बड़ा भाई रूपेंद्र गांव के बस स्टैंड पर किराने की दुकान चलाता है। 18 साल की छोटी बहन की शादी अभी बाकी। पुष्पेंद्र अविवाहित था। शाम 7 बजे आखिरी कॉल की, फिर फोन स्विच ऑफ। भाई रूपेंद्र और पिता ग्रामीणों संग रातभर ढूंढते रहे। आखिरकार ओल के पास झाड़ी में शव दिखा। खून की होली उड़ी हुई थी।
पुलिस की कहानी। चिकसाना थाने के पीपला आउटपोस्ट इंचार्ज एएसआई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि घटना यूपी के फराह थाना क्षेत्र की सीमा में हुई। शुक्रवार सुबह भरतपुर पुलिस पहुंची तो पुष्पेंद्र की मौत हो चुकी थी। शव आरबीएम अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में सड़क हादसा लगता है। हिट एंड रन का एंगल। अज्ञात वाहन की तलाश। यूपी पुलिस भी जुटी। गांव में शोक की लहर। ताऊ शेर सिंह ने बताया भतीजा बहादुर था, सियाचिन की ठंड झेली लेकिन घर आते ही… रोते हुए बोले, परिवार टूट गया।
अग्निवीर योजना क्या है? 2022 में शुरू हुई। 17.5 साल की उम्र से 4 साल की सेवा। भर्ती 10वीं-12वीं पास। ट्रेनिंग बाद फील्ड पोस्टिंग। सियाचिन जैसी दुर्गम जगह। 25% को परमानेंट। बाकी सिविलियन जॉब या खुद का रास्ता। पुष्पेंद्र जैसा युवा देश सेवा में लगा। लेकिन सड़क हादसे सैनिकों का दुश्मन। हर साल दर्जनों जवान छुट्टी पर जाते वक्त दुर्घटना में मरते। राजस्थान-यूपी बॉर्डर पर ट्रैफिक हादसे आम। डार्क रोड, तेज रफ्तार, नो हेलमेट।
सियाचिन की कठिनाइयां। दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र। -50 डिग्री ठंड। हाइ एल्टीट्यूड सिकनेस। हादसों से ज्यादा बीमारी। पुष्पेंद्र ने वहां जंग लड़ी। अवाजाही ऑपरेशन। फिर छुट्टी। घर आते वक्त जिंदगी खत्म। परिवार का कहना, गाड़ी से उतरने के बाद पैदल चला होगा। कोई वाहन टक्कर मार भागा। सीसीटीवी चेक, वाहन ट्रेसिंग चल रही। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ होगा।
परिवार का दर्द। विजय सिंह खेतों में मेहनत। बेटे की मौत खबर लगी तो रो पड़े। रूपेंद्र दुकान बंद। बहन बिलख रही। गांव शोक सभा। अग्निवीर शहीद घोषित? हादसे में नहीं लेकिन सम्मान मिलेगा। सेना मदद करेगी। लेकिन मां-बाप का सहारा चला गया। गांव के युवा बोले, सड़कें सुधारो, लाइट लगाओ, स्पीड ब्रेकर डालो। बॉर्डर एरिया में रोड सेफ्टी जरूरी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- अग्निवीर पुष्पेंद्र की मौत कैसे हुई?
सियाचिन से छुट्टी पर लौटते वक्त हिट एंड रन। घर से 3 किमी दूर झाड़ी में शव। - पुष्पेंद्र कहां पोस्टेड था?
सियाचिन ग्लेशियर। तीन साल अग्निवीर सेवा। अविवाहित। - पुलिस क्या कर रही?
हिट एंड रन जांच। पोस्टमॉर्टम। यूपी-राजस्थान पुलिस तालमेल। वाहन तलाश। - अग्निवीर योजना क्या?
4 साल सेवा। 25% स्थायी। युवा जवान। 2022 शुरू। - परिवार को क्या मदद?
सेना सम्मान। सरकार मुआवजा। गांव शोक। जांच तेज।
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