बीएमसी चुनाव हार के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा- शिवसेना यूबीटी सिर्फ पार्टी नहीं, विचार है। बीजेपी इसे खत्म नहीं कर सकती। बाल ठाकरे शताब्दी पर राज ठाकरे ने भी निशाना साधा। पूरी बातें।
BMC हार के बाद उद्धव का ऐलान: बीजेपी गलत सोच रही, ठाकरे नाम मिटेगा नहीं
शिवसेना यूबीटी सिर्फ पार्टी नहीं, विचार है- बीजेपी इसे खत्म नहीं कर सकती: उद्धव ठाकरे
मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव नतीजों से ठाकरे परिवार का लंबे समय का राज टूटा, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हार मानने से इनकार कर दिया। बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी समारोह में शुक्रवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ने कहा कि बीजेपी गलत सोच रही है अगर उसे लगता है कि शिवसेना यूबीटी को मिटा सकती है। ‘शिवसेना कोई पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है। ये मराठी मानुस का हक लड़ने के लिए बनी थी, सत्ता के लिए नहीं।’
बीएमसी चुनाव 15 जनवरी को हुए, जिसमें 227 सीटों पर भारी भिड़ंत हुई। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी 89 सीटें जीतकर। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें हासिल कीं। महायुति गठबंधन ने बहुमत पार किया। उद्धव की शिवसेना यूबीटी को 65 सीटें मिलीं, जबकि चचेरे भाई राज ठाकरे की एमएनएस ने 6। शिवसेना यूबीटी-एमएनएस गठजोड़ ने अच्छा लड़ा लेकिन शिंदे-बीजेपी को रोक न सका। देश की सबसे अमीर सभापति पर ठाकरों का 30 साल पुराना कब्जा खत्म।
उद्धव ने कहा, ‘बीजेपी को लगता है वो मुंबई को निगल लेगी। पहली बार सिविक पोल में पैसा खूब बरसा। लेकिन हमने दोहरी वोटर लिस्ट पकड़ ली, वरना नतीजे और अलग होते।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, ‘अभी से नई शुरुआत करनी है। शिवसेना सत्ता के लिए नहीं बनी, मराठी मानुस के हक के लिए।’ महाराष्ट्र में गैर-मराठी संस्कृति थोपने की साजिश का आरोप लगाया। स्कूलों में पहली से हिंदी अनिवार्य करने का फैसला (जो बाद में रद्द हुआ) इसका हिस्सा बताया। ‘जय महाराष्ट्र’ नारे पर खतरा बताया, इसे अभिवादन बनाने को कहा।
राज ठाकरे ने उद्धव से पहले बोलते हुए महाराष्ट्र राजनीति को ‘गुलामों का बाजार’ कहा। कल्याण डोंबिवली समेत सिविक चुनावों को ‘नीलामी’ करार दिया। बोले, ‘बालासाहेब को ये गंदा हाल न देखना पड़े, अच्छा है।’ राज ने कहा बाल ठाकरे ने साबित किया कि हिंदू राजनीतिक ताकत बन सकते हैं, बीजेपी को भी यकीन न था। दोनों भाइयों ने ठाकरे नाम मिटाने की कोशिशों पर निशाना साधा।
बीएमसी चुनाव का बैकग्राउंड। 1997 से शिवसेना का कंट्रोल। बाल ठाकरे की विरासत। 2022 में पार्टी स्प्लिट- उद्धव महा विकास अघाड़ी सरकार गिराई। शिंदे सीएम बने। 2024 विधानसभा में महायुति भारी जीती। बीएमसी पर अब मेयर की जंग। शिंदे मेयर चाहते, बीजेपी टाल रही। अटकलें कि उद्धव बाहर रहकर बीजेपी को सपोर्ट कर शिंदे को कमजोर करें। फ्लोर टेस्ट में अनुपस्थिति से बीजेपी को फायदा।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- उद्धव ने बीजेपी पर क्या आरोप लगाया?
शिवसेना को खत्म करने की सोच गलत। पैसा बरसाया लेकिन वफादारी नहीं खरीद सके। - बीएमसी चुनाव में कौन जीता?
बीजेपी 89, शिंदे सेना 29। महायुति बहुमत। यूबीटी 65 सीटें। - बाल ठाकरे शताब्दी में क्या हुआ?
उद्धव-राज ने संबोधित किया। विचारधारा पर जोर। राजनीति पर तंज। - शिवसेना यूबीटी क्या है?
2022 स्प्लिट के बाद उद्धव गुट। मराठी हित, हिंदुत्व। - मेयर पद पर क्या स्थिति?
शिंदे दावा। बीजेपी टालमटोल। उद्धव रणनीति बन सकती।
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