तमिलनाडु के तेनकासी के पास तिरुमलापुरम खुदाई में मिला भारत का सबसे लंबा आयरन एज भाला (8 फुट), सोने के आभूषणों के साथ। 3345 BCE की डेटिंग से भारत की मेटल टेक दुनिया से पहले।
भारत का सबसे पुराना लोहे का युग: तेनकासी के पास मिले भाले से खुलेंगे नए राज!
भारत का सबसे लंबा आयरन एज भाला: तेनकासी के पास मिली 8 फुट की पुरानी धरोहर
तमिलनाडु के तेनकासी जिले के पास तिरुमलापुरम में पुरातत्वविदों को एक ऐसी खोज मिली है जो इतिहास के पन्नों को नया मोड़ देगी। यहाँ खुदाई में भारत का सबसे लंबा आयरन एज स्पीयर (भाला) मिला, जो करीब 8 फुट (लगभग 2.4 मीटर) लंबा है। यह भाला लोहे का बना है और आयरन एज (लौह युग) का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा। साथ ही एक 6.5 फुट का दूसरा भाला भी मिला। दोनों ‘X’ आकार में दफनाए गए थे, जो किसी उच्च वर्ग के व्यक्ति के कब्र के साथ थे।
खुदाई का नेतृत्व कर रहे के वासंतकुमार ने बताया कि लंबे भाले का एक सिरा हल्का गोल है, जो इसे पकड़ने में आसान बनाता था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह योद्धाओं का हथियार था – गायों और धन की रक्षा के लिए – या फिर किसी एलीट व्यक्ति का राजकीय प्रतीक। सोने के आभूषणों वाले दफन से साफ है कि मृतक का सामाजिक दर्जा ऊँचा था।
खोज का स्थान और महत्व
तिरुमलापुरम तेनकासी से करीब 80 किमी दूर, तूथुकुदी जिले के सिवागलाई के पास है। सिवागलाई में ही तमिलनाडु को सबसे पुराना आयरन एज डेट (3345 BCE) मिला था। इस नई खोज से तमिलनाडु आयरन एज का हॉटस्पॉट बन गया। खुदाई में लोहे के औजार, मिट्टी के बर्तन, दफन कलश भी मिले।
तमिलनाडु आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के जॉइंट डायरेक्टर आर सिवानंदम ने कहा कि IIT गांधीनगर के मेटलर्जी डिपार्टमेंट के साथ अगले दो साल में पूरे राज्य के आयरन एज साइट्स का अध्ययन होगा। इससे लोहे की स्मेल्टिंग टेक्नोलॉजी का विकास ट्रेस होगा।
भारत में आयरन एज: दुनिया से पहले?
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के 6 साइट्स पर लोहे के ऑब्जेक्ट्स मिले, डेटेड 2953 BCE से 3345 BCE। के राजन (तमिलनाडु आर्कियोलॉजी रिसर्च एडवाइजर) कहते हैं, “क्षेत्र में 3000 BCE से 2500 BCE तक आयरन टेक थी।” यह तुर्की (अनाटोलिया) के 1300 BCE से बहुत पहले। भारत में स्वतंत्र रूप से आयरन डेवलपमेंट का प्रमाण।
आयरन एज साइट्स की तालिका (तमिलनाडु)
| साइट | अनुमानित डेट | मुख्य खोज |
|---|---|---|
| सिवागलाई | 3345 BCE | सबसे पुराना आयरन |
| तिरुमलापुरम | ~3000 BCE | 8 फुट स्पीयर, गोल्ड |
| आदिचनल्लूर | 2500 BCE | आयरन टूल्स |
| अन्य 3 साइट्स | 2953–3000 BCE | मेटल ऑब्जेक्ट्स |
वैश्विक तुलना: आयरन यूज की शुरुआत
| क्षेत्र | पहला आयरन यूज | भारत से तुलना |
|---|---|---|
| भारत (तमिलनाडु) | 3345 BCE | सबसे पुराना |
| अनाटोलिया (तुर्की) | 1300 BCE | 2000 साल बाद |
| यूरोप | 800 BCE | 2500 साल बाद |
| चीन | 600 BCE | 2700 साल बाद |
स्रोत: BBC, तमिलनाडु आर्कियोलॉजी।
भाले का डिजाइन और इस्तेमाल
8 फुट भाला असामान्य लंबाई का। सामान्य स्पीयर 4–6 फुट। गोल हैंडल से योद्धा आसानी से चला सकता। X फॉर्मेशन रिचुअल इंडिकेटर। सोने के साथ दफन से राजा/योद्धा स्टेटस।
आयरन स्मेल्टिंग टेक
भारत में आयरन एक्सट्रैक्शन लोकल था। पुराने फर्नेस के अवशेष मिले। IIT स्टडी से मेटल एनालिसिस होगा – कार्बन कंटेंट, स्ट्रेंथ।
ऐतिहासिक महत्व
यह खोज सिवागलाई की तरह प्रूव करती है कि दक्षिण भारत आयरन क्रैडल था। इंडस वैली के बाद तमिल संस्कृति में मेटल टेक एडवांस। वैदिक ग्रंथों में लोहे का जिक्र (श्याम अयस) इससे मैच।
आगे की खुदाई
तमिलनाडु डिपार्टमेंट IIT के साथ 2 साल स्टडी। ज्यादा साइट्स एक्सप्लोर।
टिप्स: पुरातत्व में रुचि
- लोकल म्यूजियम विजिट करें।
- आर्कियोलॉजी न्यूज फॉलो।
- स्टूडेंट्स: ASI एग्जाम दें।
5 FAQs
- प्रश्न: भाला कहाँ मिला?
उत्तर: तेनकासी के पास तिरुमलापुरम, तूथुकुदी के सिवागलाई से 80 किमी दूर। - प्रश्न: लंबाई कितनी?
उत्तर: 8 फुट मुख्य, 6.5 फुट दूसरा। X शेप में दफन। - प्रश्न: डेटिंग?
उत्तर: ~3345 BCE, सिवागलाई जैसी। - प्रश्न: आगे क्या?
उत्तर: IIT गांधीनगर के साथ राज्यव्यापी आयरन स्टडी। - प्रश्न: महत्व?
उत्तर: भारत आयरन टेक में दुनिया से आगे, स्वतंत्र डेवलपमेंट।
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