Sagar Yallamma Devi Mandir मेला शुरू: कुश्ती प्रतियोगिता, बिना बलि पूजा, भक्तों की भारी भीड़। कर्नाटक-महाराष्ट्र से श्रद्धालु, KKRTC स्पेशल बसें। सामूहिक भोज, बाजार, सुरक्षा – पूरी कवरेज!
Sagar Yallamma Devi Mandir मेला: परंपरा और प्रगति का अनोखा संगम
यादगीर जिले के शाहापुर तालुक के सागर गांव में मंगलवार से यल्लम्मा देवी मंदिर का वार्षिक मेला शुरू हो गया। कर्नाटक और महाराष्ट्र से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दो दिन का ये धार्मिक आयोजन स्थानीय परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। इस बार खास बात – पशु बलि पूरी तरह बंद, जिसे भक्तों ने सराहा। मेला बुधवार को संपन्न होगा।
यल्लम्मा देवी का धार्मिक महत्व
यल्लम्मा देवी को रेणुका माता के रूप में पूजा जाता। ये शक्ति पीठ जैसी मान्यता वाली देवी संतान, स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख की दात्री। सागर गांव का मंदिर क्षेत्रीय भक्तों का प्रमुख केंद्र। मकर संक्रांति-जयंती पर लाखों आते। इस मेले में पूजा-अर्चना से जीवन के संकट दूर माने जाते।
मुख्य आकर्षण: पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता
मेले का हाइलाइट – देशभर से पहलवान। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र के पहलवान भाग ले रहे। दंगल मैदान में भारी भीड़। ये कुश्ती परंपरा देवी के बल-वीर्य का प्रतीक। विजेताओं को पुरस्कार, सम्मान। स्थानीय युवा इसमें हिस्सा लेकर परंपरा को जीवित रखते।
बड़ी खबर: पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध
पहले बलि प्रमुख रिवाज था, लेकिन जिला प्रशासन के सख्त नियमों से पूरी तरह बंद। भक्त मल्लिकार्जुन बोले – ये सकारात्मक कदम। प्रगतिशील सोच से मेला आधुनिक हुआ। अब नारियल, फल, घर का भोजन ही चढ़ता। ये बदलाव अन्य मेलों के लिए मिसाल।
भक्त घर पर बनी खीर, लड्डू, रोटी-सब्जी चढ़ाते। विशेष पूजा के बाद प्रसाद वितरण। उसके बाद सामूहिक भोज – एकता का प्रतीक। महिलाएं साड़ी-चूड़ियां पहनकर आतीं। पुरुष धोती-कुर्ता। माहौल भक्ति और उल्लास से भरा।
व्यवस्थाएं: सुरक्षा से ट्रांसपोर्ट तक
जिला प्रशासन और गृह विभाग ने पुख्ता इंतजाम। भारी भीड़ के लिए पुलिस फोर्स तैनात। कानून-व्यवस्था मजबूत। KKRTC ने शाहापुर व आसपास से स्पेशल बसें चलाई। अधिकारी बोले – सुगम यात्रा सुनिश्चित। मेडिकल कैंप, पानी, शौचालय भी।
मेला स्थल पर अस्थायी दुकानें। चूड़ियां, मिठाइयां, गन्ने का रस, खिलौने। मीनमाने खेल, झूले। स्थानीय हस्तशिल्प, बिंदी-बिछिया। व्यापारियों को अच्छी बिक्री। बच्चे-बूढ़े सबका मनोरंजन।
मेले का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व टेबल
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सागर गांव, शाहापुर तालुक, यादगीर जिला, कर्नाटक |
| अवधि | 2 दिन (मंगल-बुधवार) |
| मुख्य आकर्षण | कुश्ती दंगल, विशेष पूजा, सामूहिक भोज |
| प्रतिभागी राज्य | कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश |
| नई पहल | पशु बलि पूर्ण प्रतिबंध |
| ट्रांसपोर्ट | KKRTC स्पेशल बसें |
| बाजार | चूड़ियां, मिठाई, गन्ने का रस, खेल |
यल्लम्मा देवी अन्य मंदिरों से तुलना
सौंदत्ती यल्लम्मा (बेलगाम) सबसे प्रसिद्ध – 1514 में बना। देवदासी प्रथा से जुड़ा। सागर वाला लोकल लेकिन उतना ही शक्तिशाली। दोनों में कुश्ती परंपरा समान।
स्थानीय बोले – मां की कृपा से संतान सुख। महिलाएं वैवाहिक जीवन सुधार के लिए। युवा कुश्ती से प्रेरणा लेते। बदलाव सराहनीय।
और भव्य आयोजन की तैयारी। पर्यटन को बढ़ावा। ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग संभव। प्रगतिशील रिवाज कायम।
भक्तों के लिए टिप्स
- सुबह जल्दी पहुंचें, पार्किंग पहले।
- पानी, छाता रखें।
- बच्चों का ध्यान।
- स्थानीय व्यंजन ट्राई करें।
परंपरा में प्रगति। भक्ति बिना हिंसा। एकता-उत्सव। यल्लम्मा मां सबके कल्याण की कामना!
5 FAQs
1. यल्लम्मा मेला कब होता है?
वार्षिक, मुख्यतः मकर-जयंती समय। 2 दिन।
2. कुश्ती क्यों आयोजित?
देवी के बल का प्रतीक, सांस्कृतिक परंपरा।
3. पशु बलि क्यों बंद?
प्रशासन के नियम, भक्त सहमत।
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