तेलंगाना के सांगारेड्डी जिले के वेंकटपुरम प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील के सम्बर राइस खाने से 22 बच्चे बीमार, अस्पताल पहुंचे। बासी खाना दोबारा गर्म किया था। पूरी घटना, कारण, PM पोषण योजना के नियम और सुरक्षा टिप्स जानें।
तेलंगाना मिड-डे मील हादसा: सम्बर राइस ने 22 बच्चों को अस्पताल पहुंचा दिया
तेलंगाना के सांगारेड्डी जिले के नारायणखेड मंडल में वेंकटपुरम गांव के प्राइमरी स्कूल में गुरुवार दोपहर का वो मिड-डे मील किसी भयानक सपने जैसा साबित हुआ। करीब 42 बच्चों को परोसे गए सम्बर राइस खाने के थोड़ी देर बाद ही 22 मासूम बच्चे पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी से तड़पने लगे। उन्हें फौरन नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया। अच्छी बात ये कि सभी बच्चे अब स्थिर हैं और शाम तक ही छुट्टी मिल गई। लेकिन ये घटना पूरे देश में मिड-डे मील स्कीम पर सवाल खड़े कर रही है।
स्कूल स्टाफ ने तुरंत एक्शन लिया, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि आख़िर खाने में ऐसा क्या था जो इतने बच्चों को बीमार कर गया? जांच में पता चला कि कुक ने पिछले दिन का बासी खाना दोबारा गर्म करके परोस दिया था। माता-पिता अस्पताल के बाहर गुस्से में थे, सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अब कुक नागामणी को बर्खास्त कर दिया गया है और नया कुक नियुक्त होगा।
क्या हुआ था उस दिन स्कूल में? पूरी घटना क्रम से
गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे स्कूल में मिड-डे मील सर्व किया गया। मेन्यू था – चावल और सम्बर। ये खाना स्कूल किचन शेड अधूरा होने के कारण पिछले एक साल से सप्लायर के घर से आ रहा था। 42 बच्चों ने खाना खाया। कुछ ही मिनटों में 22 बच्चों को पेट में तेज़ दर्द, उल्टी शुरू हो गई। टीचर्स ने तुरंत उन्हें अस्पताल भेजा। डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग का शक जताया।
सुल्तानपेट बीडीओ ने जांच की। एमएलए ने सख्त निर्देश दिए कि अब खाना सिर्फ स्कूल प्रेमिसेज में ही बनेगा, हेडमास्टर की निगरानी में। डीईओ ने इन-चार्ज हेडमास्टर को शो-कॉज नोटिस जारी किया। तेलंगाना ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी सुो मोटो नोटिस ले लिया और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर से 24 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी।
अस्पताल में क्या इलाज हुआ? बच्चों की हालत
नारायणखेड के सरकारी अस्पताल में बच्चों को तुरंत भर्ती किया गया। सुपरिंटेंडेंट डॉ. रमेश ने बताया कि लक्षण फूड पॉइजनिंग के थे – पेट दर्द, उल्टी, डिहाइड्रेशन। IV फ्लूइड्स, एंटी-इमेटिक दवाएं और एंटीबायोटिक्स दिए गए। सभी बच्चे रिस्पॉन्स कर रहे थे। शाम तक डिस्चार्ज हो गए। माता-पिता ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण और खतरे बच्चों में
फूड पॉइजनिंग तब होती है जब खाने में बैक्टीरिया जैसे स्टैफिलोकोकस, सैलमोनेला या ई कोलाई घुस जाते हैं। गर्म मौसम में बासी खाना तेज़ी से खराब होता है। बच्चे छोटे होते हैं, उनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर – इसलिए खतरा ज़्यादा। लक्षण:
- पेट दर्द (1-2 घंटे में शुरू)
- उल्टी, दस्त
- बुखार, सिरदर्द
- गंभीर केस में डिहाइड्रेशन, किडनी फेलियर
भारत में हर साल हज़ारों बच्चे ऐसे हादसों का शिकार होते हैं। तेलंगाना में 2009-2022 तक 1,092 केस रिपोर्ट हुए।
मिड-डे मील स्कीम क्या है? PM पोषण अब
ये योजना 1995 में शुरू हुई, अब PM पोषण (PM POSHAN) कहलाती है। क्लास 1-8 के सरकारी स्कूल बच्चों को मुफ्त पौष्टिक भोजन – न्यूनतम 450 कैलोरी, 12 ग्राम प्रोटीन। तेलंगाना में लाखों बच्चों को कवर करती है। उद्देश्य: भूख मिटाना, स्कूल आने को प्रोत्साहन, कुपोषण कम करना। बजट हज़ारों करोड़ का। लेकिन फूड सेफ्टी पर सवाल बने रहते हैं।
तेलंगाना में मिड-डे मील की सुरक्षा गाइडलाइंस
PM POSHAN के नियम सख्त हैं लेकिन पालन कमज़ोर:
- खाना बनाने से 4 घंटे के अंदर सर्व हो
- सर्विंग टेम्परेचर 65°C से ऊपर
- टीचर टेस्टिंग अनिवार्य
- कुक-हेल्पर हेल्थ चेकअप, पर्सनल हाइजीन
- वॉटर टेस्टिंग, पेस्ट कंट्रोल
- किचन क्लीन, फायर सेफ्टी
तेलंगाना में सेंट्रलाइज़्ड किचन भी हैं लेकिन गांवों में लोकल कुक पर निर्भर। इस केस में शेड अधूरा होने से घर से खाना आया।
भारत में मिड-डे मील फूड पॉइजनिंग के आंकड़े
IDSP डेटा से:
- 2022 में 979 बच्चे बीमार (6 साल का पीक)
- 2009-2022: कर्नाटक 1524, ओडिशा 1327, तेलंगाना 1092, बिहार 950 केस
- 12% केस में छिपे जीव जैसे चूहे, छिपकली मिले
तेलंगाना में ये अकेला नहीं – पहले भी कई हादसे। CAG रिपोर्ट्स में इंफ्रास्ट्रक्चर कमज़ोर, इंस्पेक्शन कम, लाइसेंसिंग ढीली बताई गई।
इस हादसे के बाद क्या कार्रवाई हुई?
- कुक नागामणी बर्खास्त
- नया कुक तुरंत नियुक्त
- स्कूल शेड पूरा करने का आदेश
- खाना अब सिर्फ स्कूल में बनेगा, हेडमास्टर सुपरविजन में
- डीईओ ने हेडमास्टर को नोटिस
- HR कमीशन ने जांच शुरू
- पुलिस जांच जारी, सैंपल टेस्ट
एमएलए ने कहा – अब कोई ढिलाई नहीं बर्दाश्त।
माता-पिता और सोसाइटी का गुस्सा जायज़ क्यों?
मां-बाप बच्चों को स्कूल भेजते हैं पढ़ाई के लिए, न कि अस्पताल ले जाने के लिए। ये गरीब परिवारों के बच्चे हैं, जो मिड-डे मील पर निर्भर। एक हादसा उनका भरोसा तोड़ देता है। वायरल वीडियो में माता-पिता रोते दिखे। सवाल उठे – मॉनिटरिंग कहाँ है? क्वालिटी चेक कौन करता?
अन्य राज्यों से तुलना
महाराष्ट्र, कर्नाटक में भी ऐसे केस। लेकिन कुछ राज्य बेहतर: तमिलनाडु में सेंट्रल किचन, GPS ट्रैकिंग। केरल में लोकल कमिटी सुपरविजन। तेलंगाना को भी स्ट्रॉन्गर सिस्टम चाहिए।
कैसे रोका जाए ऐसे हादसे? प्रैक्टिकल टिप्स
- स्कूल लेवल: टीचर रोज़ टेस्टिंग, हॉट सर्विंग
- कुक ट्रेनिंग: हाइजीन, फ्रेश इंग्रीडिएंट्स
- इंफ्रास्ट्रक्चर: हर स्कूल में पूरा किचन
- मॉनिटरिंग: ऐप बेस्ड रिपोर्टिंग, रैंडम चेक
- पेरेंट इन्वॉल्वमेंट: PTA मीटिंग्स में फीडबैक
सरकार को PM POSHAN में और बजट लगाना चाहिए सेफ्टी पर।
ये सांगारेड्डी हादसा याद दिलाता है कि मिड-डे मील अच्छी स्कीम है लेकिन इंप्लीमेंटेशन कमज़ोर। 22 बच्चे बच गए, लेकिन अगली बार? तेलंगाना सरकार को फास्ट ट्रैक रिफॉर्म्स करने होंगे। माता-पिता सतर्क रहें, लोकल स्कूल से बात करें। बच्चों का भविष्य दांव पर है।
5 FAQs
- तेलंगाना सांगारेड्डी मिड-डे मील हादसे में कितने बच्चे बीमार हुए?
22 बच्चे प्राइमरी स्कूल के, सम्बर राइस खाने के बाद। सभी अब ठीक हैं, शाम तक डिस्चार्ज हो गए। - हादसे की मुख्य वजह क्या बताई गई?
बासी खाना (पिछले दिन का) दोबारा गर्म करके परोसा गया। कुक ने सप्लायर घर से भेजा था क्योंकि स्कूल किचन अधूरा। - इस घटना पर क्या कार्रवाई हुई?
कुक बर्खास्त, हेडमास्टर को नोटिस, शेड पूरा करने आदेश। HR कमीशन ने जांच शुरू की। - PM पोषण योजना में फूड सेफ्टी के मुख्य नियम क्या?
टीचर टेस्टिंग, 65°C गर्म सर्विंग, 4 घंटे में खाना खत्म, कुक हेल्थ चेक, क्लीन किचन। - भारत में मिड-डे मील पॉइजनिंग के कितने केस?
2009-2022 में हज़ारों, तेलंगाना में 1092। 2022 पीक – 979 बच्चे बीमार।
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