कपिल सिब्बल ने रुपए के 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर PM मोदी पर हमला बोला – “UPA को कोसते थे, अब चुप क्यों?” बजट से पहले गरीबों का दर्द, सरप्लस की कमी, पेर कैपिटा इनकम, इंपोर्ट महंगे, इकोनॉमी ग्रोथ का सच। पूरी स्टोरी डेटा संग।
रुपया 92 पर क्यों लुढ़का? कपिल सिब्बल का PM मोदी पर तीखा तंज – “अब चुप क्यों हैं?”
रुपया 92 पर लुढ़का, कपिल सिब्बल का पीएम मोदी पर तीखा हमला – “अब चुप क्यों हैं?”
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमज़ोर पड़ रहा है। 30 जनवरी 2026 को यह 92.02 तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसके बाद थोड़ा ऊपर आया और 91.93 पर बंद हुआ। ऐसे में यूनियन बजट से ठीक एक दिन पहले राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला। उन्होंने पूछा – पीएम नरेंद्र मोदी अब चुप क्यों हैं? UPA सरकार के समय रुपया 63 पर था, जब गिरा तो उन्होंने खूब कोसा। अब 92 पर ख़ामोशी क्यों?
सिब्बल का यह बयान बजट के ठीक पहले आया, जब इकोनॉमी सर्वे ने FY27 के लिए 6.8-7.2% ग्रोथ का अनुमान लगाया है। वे कहते हैं – भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती इकोनॉमी है, लेकिन असली टेस्ट तो जनता के दर्द को कम करने का है। पेर कैपिटा इनकम $2800 के आसपास है, जो ब्राज़ील, चीन, साउथ अफ्रीका से कम।
सिब्बल ने इंटरव्यू में कहा कि बजट का मतलब है संसाधनों का बँटवारा – गरीबों को सुख बढ़ाना, दर्द कम करना। लेकिन पिछले 11 सालों के बजट में ऐसा कुछ दिखा नहीं। सरप्लस बनाने की बजाय अमीरों को फायदा पहुँचा रही सरकार। आइए उनके तर्कों को स्टेप बाय स्टेप देखें।
कपिल सिब्बल के हमले के मुख्य पॉइंट्स: रुपए की गिरावट का असर
सिब्बल ने रुपए की गिरावट को आम आदमी के दर्द से जोड़ा। 2014 में मोदी सरकार आने पर 1 डॉलर = 63 रुपये था। अब 92 पर। यानी 46% की कमी।
इसका क्या मतलब?
- भारत 84% कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। रुपया कमज़ोर होने से पेट्रोल–डीज़ल महँगा।
- मेडिकल इक्विपमेंट, टेलीकॉम हार्डवेयर, उर्वरक सब महँगे।
- हम एक्सपोर्ट–ओरिएंटेड नहीं, इंपोर्ट–डिपेंडेंट इकोनॉमी हैं। सब कुछ महँगा, बोझ आम आदमी पर।
जनवरी 2026 में FII ने 36,000 करोड़ रुपये बेचे। जनवरी में रुपया 1.97% कमज़ोर। पिछले 12 महीनों में 5.70%। RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशन्स में 2 लाख करोड़ इंजेक्ट किए।
सिब्बल बोले – गरीबों को नौकरियाँ चाहिए, लेकिन मार्केट में कमी। 80% लोग 5-10 हज़ार में जीते हैं। ये शर्म की बात है।
पीएम मोदी के पुराने बयानों का ज़िक्र
सिब्बल ने पुराना रिकॉर्ड खंगाला। 2013 में UPA के समय रुपया 58-69 के बीच गिरा था। मोदी ने कहा था – “रुपया वेंटिलेटर पर है।” भाषणों में UPA को कोसा।
अब 92 पर चुप्पी। सिब्बल का तर्क – क्योंकि अब वो जानते हैं कि ये पॉलिटिकल गेम था।
बजट पर सिब्बल का तर्क: यूटिलिटेरियन कॉन्सेप्ट
बजट संसाधनों का बँटवारा है। कमाई के हिसाब से प्लानिंग। गरीबों को सुख, दर्द कम। लेकिन पिछले 11 सालों में सरप्लस नहीं बने।
वे कहते हैं – अमीरों को सुख (लैंबोर्गिनी पर कम टैरिफ), गरीबों का दर्द नहीं कम। इंपोर्ट महँगा होने से सब प्रभावित।
इकोनॉमी सर्वे 2026: तेज़ ग्रोथ लेकिन सवाल
सर्वे कहता है – FY26 रियल GDP ग्रोथ 7.4%, FY27 6.8-7.2%। पोटेंशियल 7%। लेकिन सिब्बल का सवाल – अगर कल 1000 कमाए, आज 2000 तो 100% ग्रोथ। लो बेस पर तेज़ लगती है।
पेर कैपिटा $2800। जापान $33,955। मेडिकल, एजुकेशन, उर्वरक महँगे। गरीबों की क्षमता कम।
रुपए गिरावट के कारण: डेटा और एक्सपर्ट व्यू
जनवरी 2026 में रुपया 92.29 तक गिरा। मुख्य वजहें:
- FII आउटफ्लो: जनवरी में $3 बिलियन निकासी। 2025 में $18 बिलियन।
- जियोपॉलिटिकल टेंशन, US टैरिफ्स।
- ट्रेड डेफिसिट बढ़ा, लेकिन कैपिटल आउटफ्लो मुख्य।
- RBI रेट कट्स से रुपया सप्लाई बढ़ी।
इंपोर्ट बिल: 84% क्रूड ऑयल, फर्टिलाइज़र, मेडिकल। रुपया 46% गिरा तो लागत ज़्यादा।
5 FAQs
प्रश्न 1: रुपया डॉलर के मुकाबले कितना गिर गया जनवरी 2026 में?
उत्तर: 30 जनवरी को 92.02 का रिकॉर्ड निचला स्तर। पिछले महीने 1.97% कमज़ोर, 12 महीने में 5.70%।
प्रश्न 2: कपिल सिब्बल ने रुपए गिरावट पर PM मोदी को क्या कहा?
उत्तर: UPA के समय रुपया गिरने पर मोदी ने कोसा था। अब 92 पर चुप क्यों? ये पॉलिटिकल गेम था।
प्रश्न 3: रुपए गिरने से क्या महँगा हुआ?
उत्तर: 84% क्रूड ऑयल इंपोर्ट, फर्टिलाइज़र, मेडिकल इक्विपमेंट, टेलीकॉम हार्डवेयर। सब महँगे।
प्रश्न 4: भारत की पेर कैपिटा इनकम क्या है 2026 में?
उत्तर: लगभग $2800 (₹2.5 लाख)। जापान $33,955 से कम।
प्रश्न 5: इकोनॉमी सर्वे ने FY27 की ग्रोथ क्या बताई?
उत्तर: 6.8-7.2% रियल GDP ग्रोथ। FY26 7.4%। लेकिन सिब्बल कहते हैं – लो बेस पर तेज़ लगती है।
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