पाकिस्तान PM शहबाज़ शरीफ ने कर्ज़ा संकट पर शर्मिंदगी जताई- “मुनिर के साथ भीख मांगने जाते हैं, सिर झुक जाता है।” 71% डेट-टू-जीडीपी, बेरोज़गारी 7.1%, IMF का $7bn लोन, चीन-सऊदी मदद, सुधारों की ज़रूरत। पूरी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण, आंकड़े और भविष्य।
मुनिर-शरीफ की जोड़ी विदेशों में लोन मांगती क्यों? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का काला सच
पाकिस्तान का कर्ज़ा संकट: शहबाज़ शरीफ का शर्मिंदगी भरा इकरार – “मुनिर के साथ भीख मांगने जाते हैं”
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल इन दिनों वैसा ही है जैसे किसी परिवार का, जो हर महीने कर्ज़े लेकर गुज़ारा कर रहा हो। बाहर से चमक दिखती है, अंदर से टूट चुका हो। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने खुद इस संकट को बयान में बयाँ कर दिया। इस्लामाबाद में एक्सपोर्टर्स और बिजनेस लीडर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा – “फील्ड मार्शल आसिम मुनिर के साथ जब हम दुनिया भर में पैसे मांगने जाते हैं, तो शर्मिंदगी महसूस होती है। कर्ज़ा लेना हमारे आत्मसम्मान पर बोझ है। सिर झुक जाता है। हम उनकी कई शर्तों पर ना नहीं कह पाते।”
यह बयान 30-31 जनवरी 2026 का है। शरीफ ने खुलासा किया कि उन्होंने और आर्मी चीफ मुनिर ने सऊदी, UAE, कतर, चीन जैसे दोस्त देशों से अरबों डॉलर के लोन मांगे। लेकिन यह पहली बार नहीं जब उन्होंने ऐसा कहा। 2023 में भी उन्होंने लोन मांगने को शर्मनाक बताया था।
क्यों आया यह बयान? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट है। डेट-टू-जीडीपी रेशियो 71.3% से ऊपर, बेरोज़गारी 7.1% (21 साल का हाई), निवेश 50 साल का सबसे कम 13.1% जीडीपी का। आइए इसकी पूरी तस्वीर देखें – आंकड़े, कारण, दोस्तों की मदद, सुधारों की ज़रूरत और भविष्य क्या।
शहबाज़ शरीफ का बयान: पूरा संदर्भ और मतलब
इस्लामाबाद में एक्सपोर्टर्स को सम्मानित करने के कार्यक्रम में शरीफ ने भावुक होकर कहा कि विदेशी लोन पर निर्भरता राष्ट्रीय शर्मिंदगी का सबब बन गई है। उन्होंने कहा – “दोस्त देशों ने निराश नहीं किया, लेकिन जो लोन मांगने जाता है, उसका सिर झुक जाता है। हम कई चीज़ें मानने को तैयार हो जाते हैं।”
मुनिर का नाम लेना खास था। पाकिस्तान में आर्मी चीफ का रोल हमेशा बड़ा रहा है। शरीफ ने स्वीकार किया कि दोनों ने मिलकर विदेश दौरों पर लोन रोलओवर और नई मदद मांगी।
यह बयान इसलिए भी अहम क्योंकि पाकिस्तान ने हाल में IMF से $7 बिलियन का नया लोन लिया। शरीफ ने सुधारों पर ज़ोर दिया – एक्सपोर्ट बढ़ाओ, टैक्स कलेक्शन बेहतर करो, IMF पर निर्भरता कम करो।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था: आंकड़ों का काला चित्र
2026 में पाकिस्तान की GDP करीब $350 बिलियन अनुमानित है। लेकिन डेट $130 बिलियन से ऊपर। अगले 3 सालों में $90 बिलियन चुकाना है।
5 FAQs
प्रश्न 1: शहबाज़ शरीफ ने कर्ज़ा संकट पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ आसिम मुनिर के साथ विदेश जाकर लोन मांगना शर्मिंदगी भरा है। “सिर झुक जाता है, हम उनकी शर्तें मान लेते हैं।”
प्रश्न 2: पाकिस्तान का डेट-टू-जीडीपी रेशियो कितना है?
उत्तर: 71.3% से ऊपर। कानूनी लिमिट 60%। बजट का 50-60% डेट सर्विसिंग पर।
प्रश्न 3: पाकिस्तान को कौन मदद कर रहा है?
उत्तर: चीन, सऊदी अरब, UAE, कतर। IMF से $7 बिलियन लोन। रिज़र्व्स दोगुने लेकिन लोन पर निर्भर।
प्रश्न 4: पाकिस्तान में बेरोज़गारी और गरीबी का हाल क्या?
उत्तर: बेरोज़गारी 7.1% (80 लाख+), गरीबी 45%। फूड इन्फ्लेशन हाई।
प्रश्न 5: पाकिस्तान के सुधार क्या हैं?
उत्तर: एक्सपोर्ट बढ़ाना, टैक्स रिफॉर्म, प्राइवेटाइज़ेशन। लेकिन निवेश कम, सुधार धीमे।
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