विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा – सीमा-पार आतंकवाद अस्वीकार्य है, जीरो टॉलरेंस आतंकवाद पर ‘अटल विश्व मानदंड’ बने। मिडिल ईस्ट संकट, गाजा, सूडान, यमन से भारत पर असर, आतंकवाद से लड़ाई, भारत की नीति, पाकिस्तान को संदेश और ग्लोबल कोऑपरेशन की पूरी व्याख्या।
मिडिल ईस्ट से भारत तक: जयशंकर ने क्यों ठोंका आतंकवाद पर ‘नो कम्प्रोमाइज़’ का ठोक?
जयशंकर का सख्त संदेश – आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस ‘अटल विश्व मानदंड’ बने!
आतंकवाद आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। चाहे वो सीमा पार से हमले हों या संगठित टेरर नेटवर्क्स, इसका असर हर देश पर पड़ता है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 31 जनवरी 2026 को एक कार्यक्रम में इसे लेकर साफ़ लफ्ज़ों में अपना स्टैंड रखा। उनका कहना था – “सीमा-पार आतंकवाद अस्वीकार्य है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस एक अटल, विश्वव्यापी मानदंड होना चाहिए।”
जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद का शिकार होने वाली समाजों को खुद का बचाव करने का हक़ है और वो इसे “निश्चित रूप से इस्तेमाल करेंगे।” ये बयान पाकिस्तान जैसे देशों को अप्रत्यक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए लगे, जहां से भारत कई बार आतंकी हमलों का शिकार होता रहा है।
मिडिल ईस्ट के बदलते हालात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने गाजा, सूडान, यमन, सीरिया, लीबिया जैसे संकटों का हवाला दिया। कहा कि ये बदलाव भारत जैसे निकटवर्ती देशों को भी प्रभावित करते हैं, खासकर अरब देशों के साथ हमारे रिश्तों को। आइए इस बयान के हर पहलू को विस्तार से समझें।
आतंकवाद पर जयशंकर का स्टैंड – क्यों इतना सख्त?
जयशंकर ने अपने भाषण में आतंकवाद को “हमारे दोनों क्षेत्रों की स्थिरता, शांति और समृद्धि के लिए साझा खतरा” बताया। “आतंकवाद हर रूप में खतरनाक है और इसके खिलाफ़ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मज़बूत करना ज़रूरी है।”
उनके मुख्य पॉइंट्स:
- सीमा-पार आतंकवाद का उल्लंघन: यह सिर्फ़ सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी के मूल नियमों का तोड़ना है। भारत के संदर्भ में ये बात पाकिस्तान–प्रायोजित आतंकवाद पर सीधा इशारा करती है, जैसे पुलवामा, उरी हमले।
- आत्मरक्षा का अधिकार: जयशंकर ने साफ कहा कि टारगेटेड सोसाइटियोज़ को डिफेंड करने का राइट है। भारत के सर्जिकल स्ट्राइक्स और बालाकोट एयर स्ट्राइक इसके उदाहरण हैं।
- ग्लोबल स्कोरेज के खिलाफ़ कोऑपरेशन: आतंकवाद सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए ज़ीरो टॉलरेंस को “uncompromising universal norm” बनाना चाहिए।
ये स्टैंड भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराता है – आतंकवाद के खिलाफ़ कोई समझौता नहीं।
मिडिल ईस्ट का संकट – भारत पर कैसे असर?
जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को अपने भाषण का केंद्र बनाया। कहा कि पिछले एक साल में रीजन का लैंडस्केप ड्रामेटिकली बदल गया है। कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं, जिनका असर भारत तक पहुँच रहा है।
मुख्य हाइलाइट्स:
- गाजा संकट: इज़राइल–हमास युद्ध ने पूरे रीजन को अस्थिर कर दिया। भारत ने हमेशा दो–राज्य समाधान का समर्थन किया, लेकिन ह्यूमैनिटेरियन क्राइसिस पर चिंता जताई।
- सूडान में गृहयुद्ध: लाखों लोग बेघर, रिफ्यूजी क्राइसिस। भारत ने वहाँ से अपने नागरिकों को निकाला।
- यमन, सीरिया, लीबिया: ये पुराने हॉटस्पॉट्स अब भी अस्थिर। हूती अटैक्स, ISIS रेज़र्जेंस।
भारत के लिए इम्प्लिकेशन्स:
- अरब देशों से रिश्ते: UAE, सऊदी, कतर जैसे देशों से एनर्जी, इन्वेस्टमेंट, ट्रेड के मज़बूत तार। मिडिल ईस्ट स्टेबल न हो तो भारत का इकोनॉमिक ग्रोथ प्रभावित।
- माइग्रेंट वर्कर्स: 90 लाख से ज़्यादा भारतीय गल्फ़ में काम करते हैं। संकटों से उनकी सेफ्टी चिंता।
- आतंकवाद का एक्सटेंशन: मिडिल ईस्ट के टेरर ग्रुप्स दक्षिण एशिया तक पहुँच सकते हैं।
जयशंकर ने कहा कि इन चैलेंजेस के बीच “हमारा साझा हित” स्थिरता, शांति और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
भारत की आतंकवाद नीति – इतिहास और वर्तमान
भारत आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार रहा है। 2008 मुंबई अटैक, 2019 पुलवामा से लेकर कश्मीर में रोज़ की घटनाएँ। जयशंकर का बयान इसी कंटिन्यूटी को दर्शाता है।
- मोदी सरकार की नीति: ज़ीरो टॉलरेंस, सर्जिकल स्ट्राइक्स, एयर स्ट्राइक्स। UN में मसूद अज़हर जैसे टेरर मास्टरमाइंड्स को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करवाया।
- ग्लोबल आउटरीच: क्वाड, G20 में आतंकवाद को सेंट्रल इश्यू बनाया। FATF के ज़रिए पाकिस्तान पर प्रेशर।
- 2026 कंटेक्स्ट: मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत न्यूट्रल लेकिन प्रैक्टिकल स्टैंड ले रहा – इज़राइल को सपोर्ट, लेकिन फिलिस्तीन के लिए ह्यूमैनिटेरियन एड।
पाकिस्तान को संदेश या ग्लोबल कॉल?
जयशंकर के “क्रॉस–बॉर्डर टेररिज़्म” वाले शब्द पाकिस्तान को सीधा निशाना लगते हैं। भारत ने हमेशा कहा है कि पाक राज्य–प्रायोजित टेरर का हब है। लेकिन बयान का दायरा बड़ा है – सभी देशों को जीरो टॉलरेंस अपनाना चाहिए।
ग्लोबल इम्पैक्ट:
- चीन को मैसेज: LAC पर टेंशन के बीच, टेरर प्रॉक्सी के रूप में यूज न हो।
- रूस–यूक्रेन: टेरर टैक्टिक्स के खिलाफ़ यूनिवर्सल स्टैंड।
- मिडिल ईस्ट: ISIS, अल–कायदा जैसे ग्रुप्स के खिलाफ़।
आतंकवाद से लड़ाई के लिए भारत के कदम
- डिप्लोमैटिक: UNSC में रिफॉर्म्स, NSG मेंबरशिप।
- मिलिट्री: आर्मी की स्ट्रेंथ, ड्रोन टेक।
- इंटेलिजेंस: RAW, IB का ग्लोबल नेटवर्क।
- इकोनॉमिक: पाक को आइसोलेट।
भविष्य में क्या?
जयशंकर का बयान भारत की फॉरेन पॉलिसी का आईना है – स्ट्रॉन्ग, प्रैक्टिकल, ग्लोबल। मिडिल ईस्ट स्टेबिलिटी के लिए भारत अरब देशों के साथ और करीब आएगा। आतंक पर जीरो टॉलरेंस अब सिर्फ़ भारत नहीं, दुनिया का मुद्दा बनेगा।
5 FAQs
प्रश्न 1: जयशंकर ने आतंकवाद पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद अस्वीकार्य है, जीरो टॉलरेंस एक अटल विश्व मानदंड बने। आतंक का शिकार समाज खुद का बचाव करेंगे।
प्रश्न 2: मिडिल ईस्ट का भारत से क्या लेना–देना?
उत्तर: गाजा, सूडान, यमन जैसे संकट भारत को प्रभावित करते हैं। अरब देशों से एनर्जी, ट्रेड, माइग्रेंट्स के रिश्ते। स्थिरता सबका हित।
प्रश्न 3: जयशंकर का बयान किसे निशाना बना रहा था?
उत्तर: अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान–प्रायोजित क्रॉस–बॉर्डर टेरर को। लेकिन ग्लोबल कॉल है सभी देशों के लिए।
प्रश्न 4: भारत आतंकवाद से कैसे लड़ रहा?
उत्तर: सर्जिकल स्ट्राइक्स, डिप्लोमेसी (UN, FATF), मिलिट्री मॉडर्नाइज़ेशन। जीरो टॉलरेंस नीति।
प्रश्न 5: आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस क्यों ज़रूरी?
उत्तर: ये शांति, स्थिरता, समृद्धि को खतरे में डालता है। ग्लोबल कोऑपरेशन से ही इसे रोका जा सकता है।
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