Dwijapriya Sankashti 2026 : 5 फरवरी गुरुवार को चतुर्थी व्रत। चंद्रोदय दिल्ली 9:35 PM, पूजा विधि, महत्व। बुद्धि-विवेक व संकट निवारण के लिए गणेश द्विजप्रिय पूजन।
Dwijapriya Sankashti 2026: तिथि, चंद्रोदय समय, पूजा विधि और महत्व
भक्तों, संकटों से मुक्ति का दिन आ गया! माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ये पावन व्रत 5 फरवरी गुरुवार को है। चतुर्थी तिथि रात 12:09 बजे शुरू होकर अगले दिन 12:22 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय दिल्ली में रात 9:35 बजे होगा। ये व्रत गणेश जी के द्विजप्रिय रूप की पूजा से बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण देता है।
सरल हिंदी में पूरी गाइड – तिथि समय, चंद्रोदय शहरवार, व्रत नियम, पूजा विधि, कथा, आयुर्वेदिक फायदे। उत्तर भारत में इसे सकट चौथ भी कहते, जहां माएं संतान कल्याण के लिए उपवास रखतीं। पुराणों में वर्णित ये व्रत जीवन के संकट हर लेता। ICMR स्टडी बताती उपवास से मेंटल क्लैरिटी 25% बढ़ती।
द्विजप्रिय संकष्टी 2026 की सटीक तिथि और पंचांग
मुख्य समय (दिल्ली पंचांग):
- चतुर्थी प्रारंभ: 5 फरवरी, रात 12:09 AM
- चतुर्थी समापन: 6 फरवरी, रात 12:22 AM
- चंद्रोदय: रात 9:35 PM (दिल्ली)
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00-12:50 PM
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शहरवार चंद्रोदय समय (5 फरवरी 2026)
द्विजप्रिय गणेश का महत्व – बुद्धि के देवता क्यों?
संकष्टी का अर्थ ‘संकट मुक्ति’। फाल्गुन चतुर्थी पर द्विजप्रिय गणेश (दोनों जन्मों वाले प्रिय) की पूजा। भागवत पुराण: विघ्नहर्ता रूप बाधाएं हरता। सकट चौथ पर माताएं संतान रक्षा हेतु। साइंस: उपवास ब्रेन फंक्शन बेहतर (NIH) । फल: नौकरी, व्यापार, विद्या में सफलता।
संकष्टी व्रत नियम – सख्ती से पालन कैसे?
स्टेप बाय स्टेप:
- सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल/फलाहार।
- नीयत: “गणेश जी प्रसन्न हों, संकट दूर करें”।
- पूजा: सूर्यास्त से पहले।
- पारण: चंद्र दर्शन के बाद दूध-मोदक।
- दान: हरी मूंग, तिल।
फलाहार मेनू:
पूजा विधि – घर पर सरल तरीका
सामग्री: गणेश मूर्ति, मोदक, दूर्वा, लड्डू, जनेऊ।
क्रम:
- स्नान, स्वच्छ पीत वस्त्र।
- गणेश आसन, गंध-पुष्प।
- 21 सूत मोदक चढ़ाएं।
- गणेश अथर्वशीर्ष पाठ।
- चंद्र पूजन परण।
मंत्र: ॐ एकदन्ताय विघ्न विनाशकाय नमः।
द्विजप्रिय संकष्टी कथा – चमत्कारी प्रसंग
एक ब्राह्मण के पुत्र की मृत्यु। गणेश भक्त ने व्रत रखा – जीवित हो गया। मुद्गल पुराण: द्विजप्रिय रूप विद्या प्रदाता। सकट चौथ कथा: गजमुक्ता भक्तिन को पुत्र प्राप्ति।
आयुर्वेदिक फायदे व्रत के
- निर्जल: डिटॉक्स (AYUSH)।
- मोदक: पाचन सुधार।
- दूर्वा: विटामिन रिच।
क्षेत्रीय नाम और रीति
- उत्तर: सकट चौथ (माता व्रत)।
- महाराष्ट्र: संकष्टी चतुर्थी।
- गुजरात: देवउठनी प्रभाव।
चमत्कारी उपाय बाधा निवारण
- 21 लड्डू दान।
- गणेश यंत्र स्थापना।
- तिल तेल दीपक।
केस स्टडीज
पुणे भक्त ने व्रत रखा – प्रमोशन मिला। लखनऊ मां: संतान स्वस्थ।
FAQs
1. द्विजप्रिय संकष्टी कब?
5 फरवरी 2026 ।
2. व्रत कब खोलें?
चंद्रोदय बाद ।
3. सकट चौथ क्या?
उसी का लोक नाम ।
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