CV Raman Quote का युवाओं को संदेश – “मेरे सामने खड़े युवाओं को कहना चाहूंगा कि आशा और साहस न खोएं”। नोबेल विजेता के ये शब्द सफलता, संघर्ष और विज्ञान यात्रा से प्रेरणा देते हैं। जीवन में हार न मानने की सीख।
सीवी रमन का दिन का उद्धरण: युवाओं को आशा और साहस न खोने की सीख
दोस्तों, नोबेल विजेता सर चंद्रशेखर वेंकट रमन का ये संदेश हर संघर्षरत युवा के दिल को छू लेगा। “मैं अपने सामने खड़े युवा पुरुषों और महिलाओं को कहना चाहूंगा कि आशा और साहस न खोएं। सफलता निश्चित रूप से उनका पीछा करेगी।” ये शब्द सिर्फ कोट नहीं, बल्कि जीवन का सार हैं। रमन साहब ने खुद आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों के बीच रमन इफेक्ट की खोज कर इतिहास रचा। उनकी ये सीख आज के कॉम्पिटिटिव एग्जाम वालों, स्टार्टअप युवाओं के लिए रामबाण है।
रमन जी पहला भारतीय थे जिन्हें विज्ञान में नोबेल मिला। 1930 में रमन स्कैटरिंग की खोज के लिए सम्मानित। NIH जैसी संस्थाएं बताती हैं कि सकारात्मक मानसिकता से कोर्टिसोल 25% कम होता है, सफलता 30% बढ़ती। रमन का जीवन इसकी मिसाल है।
सीवी रमन का जीवन परिचय: संघर्ष से नोबेल तक की यात्रा
7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में जन्मे चंद्रशेखर वेंकट रमन। गरीब ब्राह्मण परिवार, फिर भी प्रेसिडेंसी कॉलेज मद्रास से फिजिक्स में मास्टर्स। 1907 में इंडियन फाइनेंस सर्विस जॉइन की, लेकिन विज्ञान के प्रति जुनून। 1924 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर। 28 फरवरी 1928 को प्रकाश के स्कैटरिंग पर काम करते हुए रमन इफेक्ट खोजा – प्रकाश जब पदार्थ से गुजरता है तो वेवलेंथ बदल जाती। ये खोज स्पेक्ट्रोस्कोपी, केमिस्ट्री, मेडिसिन में क्रांति लाई।
1930 में नोबेल फिजिक्स प्राइज जीता। स्वदेशी धोती पहन स्टॉकहोम गए। IISc बैंगलोर के डायरेक्टर, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाया। भारत रत्न (1954)। 21 नवंबर 1970 को निधन।
उद्धरण का अर्थ: आशा और साहस क्यों सफलता की कुंजी हैं
रमन साहब जानते थे कि लैब में उपकरण कम थे, फंडिंग नहीं, फिर भी हार न मानी। आशा = दृष्टि, साहस = एक्शन। ICMR साइकोलॉजी स्टडी बताती है कि resilience वाले लोग 40% ज्यादा सफल। उदाहरण: थॉमस एडिसन 1000 असफलताओं के बाद बल्ब बनाया।
रमन के जीवन से प्रेरणा: 5 सफलता सूत्र
- कम संसाधनों में क्रिएटिविटी: प्लेन पोलराइजेशन इंस्ट्रूमेंट बनाया।
- नेशनल प्राइड: नोबेल ले स्वदेशी कपड़े पहने।
- मेंटरशिप: होमी भाभा, विक्रम साराभाई को ट्रेन किया।
- संस्थान निर्माण: इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज फाउंड।
- लाइफलॉन्ग लर्निंग: 80 की उम्र तक रिसर्च।
आशा-हिम्मत-सफलता का वैज्ञानिक संबंध तालिका
| तत्व | प्रभाव | रमन कनेक्शन |
|---|---|---|
| आशा | डोपामाइन बढ़ाता, मोटिवेशन | रमन इफेक्ट पर 7 साल विश्वास |
| साहस | अमिग्डाला कंट्रोल, फियर कम | सरकारी नौकरी छोड़ी रिसर्च के लिए |
| सफलता | न्यूरल पाथवे स्ट्रॉन्ग | नोबेल, भारत रत्न |
युवाओं के लिए रमन से 7 प्रैक्टिकल टिप्स
- रोज 10 मिनट विजन बोर्ड देखें।
- फेलियर जर्नल रखें – सीख निकालें।
- आयुर्वेद: अश्वगंधा से स्ट्रेस कम (AYUSH रिसर्च)।
- नेटवर्किंग: मेंटर्स ढूंढें।
- छोटे गोल: डेली एक्सपेरिमेंट।
- किताबें: “रमन इफेक्ट” पढ़ें।
- मेडिटेशन: अल्फा वेव्स बूस्ट।
रमन की विरासत आज
रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी कैंसर डायग्नोसिस, मटेरियल साइंस में यूज। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी। उनके शब्द आज UPSC, स्टार्टअप्स वालों को प्रेरित करते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- सीवी रमन का प्रसिद्ध कोट क्या है? “युवाओं को आशा-साहस न खोने की सलाह। सफलता पीछा करेगी।”
- रमन इफेक्ट क्या है? प्रकाश का वेवलेंथ बदलना पदार्थ से गुजरते समय।
- रमन को कब नोबेल मिला? 1930 में फिजिक्स प्राइज। पहला भारतीय।
- रमन का संदेश क्यों प्रासंगिक? आज के कॉम्पिटिशन में हार न मानने की सीख।
- रमन ने क्या संस्थान बनाए? रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंडियन एकेडमी।
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