Thirthahalli Marikamba Jatre 2026: 17 से 25 फरवरी तक 9 दिवसीय महोत्सव। यक्षगान, चंदिका होम, मूर्ति स्थापना-अवतरण। अन्न संतर्पण, लोक नृत्य से भक्ति का सैलाब।
थिरथाहल्ली मारीकांबा जत्रे 2026: मलनाड का 9 दिवसीय भक्ति-संगीत का महाकुंभ
दोस्तों, कर्णाटक के शिवमोग्गा जिले का थिरथाहल्ली मलनाड क्षेत्र हर दो साल में मारीकांबा देवी के जत्रे से गूंज उठता है। 2026 का ये बाइएनियल महोत्सव 17 फरवरी से 25 फरवरी तक धूमधाम से चलेगा। हजारों भक्त मारीकांबा मंदिर में उमड़ेंगे, जहां विशेष पूजाएं, अन्न संतर्पण, यक्षगान और लोक संगीत का तड़का लगेगा। मंदिर प्रशासन समिति अध्यक्ष नागराज शेट्टी ने बताया कि तैयारियां जोरों पर हैं—ये न सिर्फ धार्मिक, बल्कि कर्णाटक की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
मारीकांबा देवी शक्ति स्वरूपा हैं, जिनकी कृपा से भक्त रोग-दुखों से मुक्त होते हैं। जत्रे में चंदिका होम, मूर्ति स्थापना और तुंगा नदी में अवतरण जैसे चमत्कारी दृश्य देखने लायक। ये त्योहार समुदाय को एकजुट करता है, जहां अमीर-गरीब सब साथ भोजन करते हैं। चलिए पूरे शेड्यूल को डिटेल में देखें।
जत्रे का इतिहास: मलनाड की शक्ति पूजा की परंपरा
थिरथाहल्ली का मारीकांबा जत्रा दशकों पुराना है, जो लोक देवता की भक्ति पर आधारित। हर दो साल में लाखों लोग आते हैं। ये कर्णाटक के प्रसिद्ध जत्रों में शुमार है, जैसे शिरसी और सागर मारीकांबा। स्थानीय कलाकार यक्षगान से देवी महात्म्य सुनाते हैं।
9 दिवसीय शेड्यूल: हर दिन अलग रंग
17 फरवरी से शुरू होकर 25 को समाप्ति। रोजाना विशेष पूजा, महामंगलारती और अन्न संतर्पण।
- 17 फरवरी: जत्रे का उद्घाटन, दैनिक पूजा।
- 18 फरवरी: पाठ, विशेष पूजा; शाम रंगपूजा, सुमुखा म्यूजिक एंड डांस स्कूल का नृत्य संध्या।
- 19 फरवरी: पाठ-पूजा; यक्षगान ‘देवी महात्मे’ पवनजे मेला द्वारा।
- 20 फरवरी: काव्य-संगीत-कलाकुंचा कार्यक्रम।
- 21 फरवरी: चंदिका होम चरम पर, पूर्णाहुति दोपहर 12:30 बजे। शाम लोक कलाकारों का नृत्य-संगीत।
- 22 फरवरी: राजगुरु होस्कोटे का लोक संगीत।
- 23 फरवरी: काल्पोक्ट पूजा, सहस्रनाम; पुत्तूर जगदीश आचार्य का संगीत गान सम्भ्रम।
- 24 फरवरी: जत्रा विशेष पूजाएं; शाम 8 बजे एन्ने भंडारा पूजा। नदथी आचार परिवार की मूर्ति शोभायात्रा से स्थापना।
- 25 फरवरी: सुबह 5 बजे मूर्ति पूजा; दोपहर 3 बजे राजाबेदी उत्सव। फिर तुंगा नदी में विश्राम। शाम 7:30 बजे नदथी में डिनर प्रसाद।
मुख्य आकर्षण: चंदिका होम और मूर्ति यात्रा
21 फरवरी का चंदिका होम जत्रे का हाइलाइट—होम कुंड में आहुतियां देकर देवी प्रसन्न। 24-25 को नदथी आचार परिवार की हस्तकला मूर्ति यात्रा भक्तों को मोहित करेगी। तुंगा नदी अवतरण भावुक क्षण।
सांस्कृतिक आयोजन: यक्षगान से लोक नृत्य तक
यक्षगान, भजन, नृत्य—कर्णाटक कला का मेला। पवनजे यक्षगान मेला, डांस पैलेस जैसे ग्रुप्स परफॉर्म करेंगे। ये कार्यक्रम युवाओं को परंपरा से जोड़ते हैं।
भक्तों के लिए व्यवस्थाएं टेबल
| व्यवस्था | विवरण |
|---|---|
| अन्न संतर्पण | रोजाना मंदिर में मुफ्त भोजन |
| परिवहन | थिरथाहल्ली बस स्टैंड से स्पेशल |
| ठहराव | स्थानीय धर्मशालाएं, होटल बुकिंग |
| सुरक्षा | पुलिस बैंडोबस्त, मेडिकल कैंप |
| ट्रैफिक | राजाबेदी उत्सव पर विशेष नियंत्रण |
जत्रे का महत्व: आध्यात्मिक और सामाजिक
मारीकांबा जत्रा भक्ति के साथ एकता सिखाती। ICMR स्टडीज कहती हैं कि सामूहिक उत्सव स्ट्रेस कम करते। आयुर्वेद टिप: यात्रा से पहले हल्दी दूध पिएं।
आसपास के जत्रे: तुलना
शिरसी जत्रा (24 Feb-4 Mar), सागर (3-11 Feb)—लेकिन थिरथाहल्ली का मलनाड चार्म अलग।
भक्त टिप्स लिस्ट
- पहले बुकिंग कराएं।
- हल्के कपड़े, आरामदायक जूते।
- जल संतुलन रखें।
- स्थानीय व्यंजन ट्राई करें।
FAQs
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