बिहार MP पप्पू यादव को 1995 के पतरघाट लैंड डिस्प्यूट केस में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने गिरफ्तारी के बाद दावा किया कि उनकी हत्या का प्लॉट रचा जा रहा है। केस की पूरी डिटेल्स, पप्पू का सफर, राजनीतिक बैकग्राउंड, गिरफ्तारी का तरीका और बिहार पॉलिटिक्स पर असर।
पप्पू यादव पर 30 साल बाद केस दर्ज, गिरफ्तार: पतरघाट केस का पूरा ड्रामा क्या था
पप्पू यादव की गिरफ्तारी: 30 साल पुराने लैंड केस में जेल, हत्या का प्लॉट दावा
बिहार की राजनीति में विवादास्पद चेहरे राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को 1995 के एक लैंड डिस्प्यूट केस में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुरनिया के पतरघाट इलाके में हुई इस घटना को लेकर अब तक कई चक्र चल चुके थे लेकिन 30 साल बाद पुलिस ने अचानक कार्रवाई की। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पप्पू ने दावा किया कि उनकी जान को खतरा है और हत्या का प्लॉट रचा जा रहा है। वे खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। पप्पू यादव बिहार के पतरघाट से सांसद रह चुके हैं और उनकी जन अधिकार पार्टी लोकसभा में स्वतंत्र सांसद के रूप में सक्रिय रही है। इस गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है क्योंकि पप्पू का प्रभाव अभी भी कई इलाकों में बरकरार है।
पतरघाट लैंड डिस्प्यूट केस का पूरा बैकग्राउंड
यह मामला 1995 का है जब पतरघाट गाँव में ज़मीन हड़पने का आरोप लगा। पीड़ित पक्ष ने दावा किया कि पप्पू यादव और उनके समर्थकों ने उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया और विरोध करने पर धमकी दी। FIR दर्ज हुई लेकिन सालों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पप्पू ने हमेशा इसे झूठा और राजनीतिक प्रेरित बताया। कोर्ट में केस चला लेकिन गवाहों के बयान बदलते रहे और मामला लटका रहा। 2026 में अचानक पुलिस ने नोटिस जारी किया और पप्पू को समर्पण करने को कहा। उन्होंने कोर्ट में पेश होकर ज़मानत की मांग की लेकिन कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि लंबे समय बाद न्याय मिला जबकि पप्पू इसे बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।
पप्पू यादव का दावा: हत्या का प्लॉट और राजनीतिक साजिश
गिरफ्तारी के तुरंत बाद पप्पू यादव ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी जान को खतरा है और कुछ ताकतवर लोग उनकी हत्या का प्लॉट रच रहे हैं। पप्पू ने दावा किया कि यह गिरफ्तारी उनके बिहार में सक्रियता और कुछ बड़े नेताओं के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की सज़ा है। उन्होंने नीतीश कुमार सरकार और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर निशाना साधा। पप्पू का कहना है कि 30 साल पुराना केस अचानक क्यों जागा जब वे संसद में सक्रिय हैं। उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए और गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा का भरोसा दिया लेकिन पप्पू ज़मानत के लिए ऊपरी अदालत जाने की बात कर रहे हैं।
पप्पू यादव का राजनीतिक सफर: विवादों से भरा
पप्पू यादव बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। वे समाजवादी पार्टी, आरजेडी और फिर अपनी जन अधिकार पार्टी से चुनाव लड़ते रहे। पतरघाट, सुपौल, मधेपुरा और पुनpunia जैसे इलाकों से कई बार जीते। 2024 लोकसभा में पुनpunia से इंडिपेंडेंट सांसद बने। उनके खिलाफ़ कई आपराधिक केस रहे लेकिन ज़्यादातर में वे बरी हो गए या केस लटके रहे। पप्पू को गैंगस्टर इमेज दी जाती रही लेकिन वे खुद को जननेता बताते हैं। बिहार में जातिगत समीकरणों के बीच उनका प्रभाव यशवंत सिंह जैसे कुख्यात अपराधियों से जुड़ाव के बावजूद बरकरार रहा। इस गिरफ्तारी ने उनके समर्थकों में गुस्सा भरा है।
गिरफ्तारी का तरीका और पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने पप्पू को कोर्ट में पेश होने के बाद गिरफ्तार किया। समर्थक कोर्ट के बाहर जमा हो गए थे लेकिन सुरक्षा बलों ने नियंत्रण किया। पप्पू ने कोर्ट में ज़मानत की मांग की लेकिन निचली अदालत ने खारिज कर दी। अब वे पटना हाई कोर्ट जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि यह रूटीन कार्रवाई है और कोई राजनीतिक दबाव नहीं। पीड़ित पक्ष खुश है कि न्याय मिला। पप्पू के वकील इसे देरी से न्याय का उल्टा मामला बता रहे हैं।
बिहार पॉलिटिक्स पर असर: साजिश या न्याय?
यह गिरफ्तारी बिहार की राजनीति को हिला सकती है। पप्पू का प्रभाव पुनpunia और सीमांचल में है। नीतीश सरकार पर साजिश का आरोप लग रहा। विपक्ष इसे हथकंडा बता रहा। पप्पू के समर्थक रैलियाँ कर रहे। अगर ज़मानत मिली तो उनका कद बढ़ेगा वरना कमज़ोर होंगे। बिहार में अपराध और राजनीति का पुराना रिश्ता फिर चर्चा में।
5 FAQs
प्रश्न 1: पप्पू यादव को किस केस में गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: पप्पू यादव को 1995 के पतरघाट लैंड डिस्प्यूट केस में गिरफ्तार किया गया। पुरनिया के इस गाँव में ज़मीन हड़पने का आरोप था। 30 साल बाद कोर्ट ने ज़मानत खारिज कर जेल भेजा।
प्रश्न 2: पप्पू यादव ने गिरफ्तारी पर क्या दावा किया?
उत्तर: पप्पू ने कहा उनकी हत्या का प्लॉट रचा जा रहा। इसे राजनीतिक साजिश बताया। नीतीश सरकार और स्थानीय ताकतवरों पर निशाना साधा।
प्रश्न 3: पतरघाट केस क्या था?
उत्तर: 1995 में पतरघाट में पीड़ितों ने पप्पू पर ज़मीन कब्ज़ा और धमकी का आरोप लगाया। FIR हुई लेकिन केस लटका रहा। अब कार्रवाई हुई।
प्रश्न 4: पप्पू यादव का राजनीतिक बैकग्राउंड क्या?
उत्तर: पप्पू ने RJD, SP से चुनाव लड़े। जन अधिकार पार्टी बनाई। पुनpunia MP हैं। कई आपराधिक केस रहे लेकिन प्रभाव बरकरार।
प्रश्न 5: गिरफ्तारी का बिहार पॉलिटिक्स पर असर?
उत्तर: समर्थक विरोध में। विपक्ष साजिश बता रहा। पप्पू का सीमांचल प्रभाव। ज़मानत पर निर्भर करेगा भविष्य।
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