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भारत-US इंटरिम ट्रेड डील: पियूष गोयल ने किसानों की सुरक्षा पर क्यों खींची लाल लकीर

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Piyush Goyal India US trade deal, no concessions Indian farmers
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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने भारत-अमेरिका इंटरिम ट्रेड डील पर साफ कहा – किसानों को नुकसान पहुँचाने वाली कोई छूट नहीं देंगे। अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात, डेयरी बाजार, MSP, टैरिफ कटौती, निर्यात बढ़ावा और किसान संगठनों की चिंताएँ। ट्रेड नेगोशिएशन्स का पूरा बैकग्राउंड और भारत की स्ट्रेटेजी। 

किसानों को नुकसान पहुँचाने वाली कोई छूट नहीं देंगे: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पियूष गोयल का सख्त ऐलान क्यों

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: पियूष गोयल का ऐलान – किसानों को नुकसान पहुँचाने वाली कोई छूट नहीं

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच चल रही इंटरिम ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुँचाने वाली कोई भी छूट या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बयान तब आया जब किसान संगठनों और विपक्ष ने चिंता जताई कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय बाजार बाढ़ आ जाएगा। गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को मजबूत रखने के वादे पर कायम है। ये ऐलान दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया और इससे किसान समुदाय में काफी राहत की बात हुई।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध: वर्तमान स्थिति और लक्ष्य

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह लगभग 130 अरब डॉलर के पार पहुँच चुका था। दोनों देशों ने 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है जहाँ भारतीय आईटी फार्मास्यूटिकल्स और ज्वेलरी जैसे उत्पादों का निर्यात होता है। वहीं अमेरिका से भारत पेट्रोलियम मशीनरी और कृषि उत्पाद आयात करता है। ट्रेड डेफिसिट भारत के पक्ष में है लेकिन कृषि क्षेत्र में संतुलन बनाना चुनौती है। इंटरिम ट्रेड डील इसी संतुलन को बेहतर बनाने का प्रयास है।

इंटरिम ट्रेड डील का मतलब: क्या–क्या शामिल है

इंटरिम ट्रेड डील का मतलब है एक छोटा लेकिन व्यावहारिक समझौता जो पूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पहले दोनों पक्षों को फायदा पहुँचाए। इसमें टैरिफ कटौती गुड्स एंड सर्विसेज पर सहमति और कुछ क्षेत्रों में बाजार एक्सेस बढ़ाना शामिल है। भारत अमेरिकी बाजार में टेक्सटाइल्स फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए कम टैरिफ चाहता है। अमेरिका कृषि उत्पादों डेयरी चीज और पोल्ट्री पर भारत के हाई टैरिफ कम करने की मांग कर रहा है। ये डील 2026 के मध्य तक पूरी हो सकती है। लेकिन कृषि संवेदनशील क्षेत्र है इसलिए भारत सावधानी बरत रहा।

किसानों की चिंताएँ: अमेरिकी आयात से बाजार बर्बाद होने का डर

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर डेयरी पोल्ट्री और गेहूं जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम हुए तो अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार भर देंगे। अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है जिससे उनके उत्पाद सस्ते रहते हैं। भारत में डेयरी पर 30 से 60 प्रतिशत तक टैरिफ है जो किसानों को बचाता है। विपक्ष ने कहा कि ये डील किसानों की कमर तोड़ देगी। पियूष गोयल ने इन चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार हर प्रस्ताव को किसानों के हित से तौल रही है।

पियूष गोयल का सख्त रुख़: किसानों के हित सर्वोपरि

गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया कि भारत-अमेरिका डील में किसानों को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डेयरी और कृषि बाजार को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा। एमएसपी सिस्टम को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस रहेगा। गोयल ने अमेरिका के साथ बातचीत में भारत की मजबूत नेगोशिएटिंग पोज़िशन का ज़िक्र किया। कहा कि हम निर्यात बढ़ाने पर ज़ोर देंगे लेकिन आयात से घरेलू उत्पादकों को खतरा नहीं। ये बयान किसान संगठनों को भरोसा दिलाने का प्रयास था।

डेयरी और कृषि क्षेत्र पर विशेष फोकस: क्यों संवेदनशील

भारतीय डेयरी बाजार दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी क्षेत्र है। अमूल जैसे ब्रांड लाखों किसानों का सहारा हैं। अमेरिकी चीज मिल्क पाउडर और बटर पर कम टैरिफ से ये बाजार प्रभावित हो सकता। पोल्ट्री में भी अमेरिका बड़ा उत्पादक है। सरकार ने कहा कि संवेदनशील उत्पादों पर कोई छूट नहीं। WTO नियमों का हवाला देकर सब्सिडी पर डिफेंड किया। किसान नेता राकेश टिकैत ने भी चिंता जताई लेकिन गोयल के बयान से कुछ शांति हुई।

निर्यात बढ़ावा: भारत को क्या फायदा

ट्रेड डील से भारत को अमेरिकी बाजार में एक्सेस बढ़ेगा। टेक्सटाइल्स मसाले फल-सब्जियाँ और फार्मा निर्यात बढ़ सकता। 500 अरब लक्ष्य से रोज़गार और विदेशी मुद्रा आएगी। गोयल ने कहा कि हमारी स्ट्रेटेजी निर्यात को बूस्ट करना है आयात कंट्रोल। PLI स्कीम्स से घरेलू उत्पादन मजबूत। ये बैलेंस किसानों और उद्योग दोनों के हित में।

विपक्ष की आलोचना: क्या सरकार किसानों को बेच रही

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में किसानों को दांव पर लगा रही। कहा कि USMCA जैसे समझौते से अमेरिकी कृषि भारत में घुस आएगी। गोयल ने पलटवार किया कि हमारी सरकार ने किसान कानूनों को हटाकर भरोसा जीता। MSP पर खरीद रिकॉर्ड बनाया। विपक्ष को तथ्यों पर बहस करने की सलाह दी।

आगे की राह: नेगोशिएशन्स कैसे चलेंगी

ट्रेड टॉक्स अगले राउंड में होंगी। भारत अमेरिकी टैरिफ कटौती मांगेगा लेकिन कृषि पर रेडलाइन खींचेगा। किसान संगठनों से परामर्श जारी। चुनावी साल होने से राजनीतिक दबाव भी। सफल डील से अर्थव्यवस्था को बूस्ट लेकिन किसान सुरक्षा प्राथमिकता।

5 FAQs

प्रश्न 1: पियुष गोयल ने भारत-US ट्रेड डील पर क्या कहा?
उत्तर: गोयल ने साफ कहा कि भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुँचाने वाली कोई भी छूट या समझौता नहीं होगा। डेयरी कृषि और एमएसपी को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा।

प्रश्न 2: किसानों को ट्रेड डील से क्या खतरा लग रहा?
उत्तर: अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते डेयरी पोल्ट्री और अनाज उत्पादों के आयात से भारतीय बाजार बर्बाद हो सकता। टैरिफ कम होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

प्रश्न 3: भारत-US व्यापार वर्तमान में कितना है?
उत्तर: FY 2024-25 में 130 अरब डॉलर से ज़्यादा। लक्ष्य 2030 तक 500 अरब डॉलर। भारत का एक्सपोर्ट स्ट्रॉन्ग।

प्रश्न 4: इंटरिम ट्रेड डील क्या है?
उत्तर: पूर्ण FTA से पहले छोटा व्यावहारिक समझौता। टैरिफ कटौती गुड्स सर्विसेज पर फोकस। 2026 तक पूरा हो सकता।

प्रश्न 5: विपक्ष ने क्या आरोप लगाया?
उत्तर: विपक्ष का कहना कि सरकार किसानों को अमेरिकी कंपनियों के हित में बेच रही। गोयल ने MSP खरीद के आंकड़े दिखाकर खारिज किया।

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