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वंदे मातरम के पूरे 6 छंद क्यों गाने अनिवार्य? मुस्लिम बोर्ड ने क्यों कहा असंवैधानिक?

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Vande Mataram six stanzas, AIMPLB objection
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वंदे मातरम के सभी 6 छंदों को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने के होम मिनिस्ट्री के आदेश को असंवैधानिक बताया। धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन, तुरंत वापस लें वरना कोर्ट जाएंगे।

क्या वंदे मातरम में दुर्गा पूजा है? AIMPLB ने मांगा आदेश वापस, कोर्ट जाएंगे?

मुस्लिम लॉ बोर्ड का केंद्र पर हमला: वंदे मातरम आदेश असंवैधानिक क्यों?

11 फरवरी 2026 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने केंद्र सरकार के एक आदेश पर तीखा विरोध जताया। बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फ़ज़लुर रहमान मुजद्दीदी ने प्रेस स्टेटमेंट जारी कर कहा कि होम मिनिस्ट्री का 28 जनवरी का नोटिफिकेशन पूरी तरह असंवैधानिक है। इसमें वंदे मातरम के सभी 6 छंदों को सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों में गाना अनिवार्य किया गया है।

बोर्ड का कहना है कि ये धार्मिक स्वतंत्रता, सेकुलरिज़्म और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। अगर सरकार ने तुरंत वापस नहीं लिया तो कोर्ट में चुनौती देंगे। विवाद इसलिए भड़का क्योंकि आदेश कहता है कि राष्ट्रगान जन गण मन से पहले वंदे मातरम के पूरे 6 छंद (3 मिनट 10 सेकंड) गाए जाएंगे।

होम मिनिस्ट्री का आदेश क्या कहता है बिल्कुल?

होम मिनिस्ट्री ने 28 जनवरी (कुछ रिपोर्ट्स में 6 फरवरी) को पहली बार राष्ट्रगीत के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किए। इसमें साफ कहा गया कि राष्ट्रपति के आगमन, तिरंगा फहराने, गवर्नर के भाषण जैसे मौकों पर वंदे मातरम के सभी 6 छंद पहले गाए जाएंगे। अगर राष्ट्रगान के साथ हो तो वंदे मातरम पहले।

सरकार का तर्क ये है कि बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का मूल गीत 6 छंदों का ही है और नेहरू सरकार ने सेकुलर अपील के नाम पर आखिरी 4 छंद हटा दिए थे। अब इसे पूरा करने का समय आ गया, ताकि राष्ट्रगीत का “ऑफिशियल वर्ज़न” हो। स्कूलों और सभी सरकारी इवेंट्स पर लागू होगा।

AIMPLB की मुख्य आपत्ति: धार्मिक विश्वास पर हमला

मुजद्दीदी ने कहा कि वंदे मातरम बंगाल के संदर्भ में लिखा गया, जिसमें दुर्गा, कमला (लक्ष्मी), वाणी (सरस्वती) जैसे देवताओं की पूजा का ज़िक्र है। मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करता है, शिर्क (साझीदार ठहराना) हराम है। इसलिए मुसलमान ये गीत नहीं गा सकते।

बोर्ड ने याद दिलाया कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा में फैसला हुआ था कि सिर्फ़ पहले 2 छंद ही इस्तेमाल होंगे। कोर्ट ने भी बाद के छंदों को सेकुलर वैल्यूज़ के खिलाफ माना है। एक सेकुलर सरकार किसी धर्म के विश्वास दूसरे पर थोप नहीं सकती।

वंदे मातरम का इतिहास: विवाद क्यों हमेशा रहा?

वंदे मातरम 1882 में बैंकिम चंद्र ने आनंदमठ उपन्यास में लिखा। स्वतंत्रता संग्राम में नारा बना, लेकिन मुसलमानों को आपत्ति रही क्योंकि बाद के छंद मातृभूमि को देवी मानते हैं – “तुम दुर्गा हो, हाथों में तलवार, कमला सिंहासन पर विराजमान”।

1937 में कांग्रेस ने साफ किया कि सिर्फ़ पहले 2 छंद राष्ट्रिय गीत होंगे, क्योंकि वो देश की सुंदरता का वर्णन करते हैं बिना धार्मिक रेफरेंस के। गांधीजी ने भी कहा कि मुसलमानों को जबरदस्ती नहीं गवाना। संविधान सभा ने भी यही फैसला लिया।

पिछले साल 2025 में 150वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने कहा कि 1937 में छंद काटना देश के विभाजन का बीज था। अब केंद्र ने इसे पूरा करने का फैसला लिया।

अन्य मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया क्या?

AIMPLB के अलावा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने इसे “सेक्टेरियन एजेंडा” कहा। दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल ने कहा कि मुसलमान वंदे मातरम सुनने को तैयार, लेकिन गाना नहीं क्योंकि शिर्क है। कई संगठनों ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ये राजनीतिक स्टंट है।

सरकार की सफाई: ये जबरदस्ती नहीं, सम्मान है

केंद्र ने अभी AIMPLB पर सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन आदेश में साफ है कि ये राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है। पहले सिर्फ़ 2 छंद गाए जाते थे, अब पूरा गीत राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कहा था कि वंदे मातरम गाना वैकल्पिक है, लेकिन पूरे गीत पर रोक नहीं।

कोर्ट ने स्कूलों में अनिवार्य करने पर रोक लगाई थी, लेकिन ये नया आदेश सरकारी इवेंट्स पर फोकस्ड लगता है। फिर भी बोर्ड को लगता है कि ये अल्पसंख्यकों के अधिकार दबाता है।

राजनीतिक एंगल: बंगाल चुनाव से कनेक्शन?

कुछ लोग कह रहे हैं कि ये पश्चिम बंगाल चुनाव (2026) से पहले BJP का हिंदुत्व कार्ड है। TMC और कांग्रेस ने भी विरोध जताया। वंदे मातरम हमेशा BJP-RSS का मुद्दा रहा। विपक्ष कहता है कि सेकुलरिज़्म खतरे में है।

लेकिन सरकार कहती है कि राष्ट्रगान-गीत का सम्मान सभी को करना चाहिए, ये देशभक्ति है न कि धर्म। विवाद बढ़ेगा तो कोर्ट फैसला लेगा।

वंदे मातरम के छंद: विवादास्पद हिस्से कौन से?

पहले 2 छंद: “वंदे मातरम, सुजलां सुफलां…” – देश को माँ कहकर प्रशंसा। सभी स्वीकार्य।
बाद के: पांचवां छंद – “तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि…” दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती का ज़िक्र। मुसलमानों को लगता है ये पूजा का आह्वान।
छठा: ब्रिटिश के खिलाफ विद्रोह।

टैगोर ने ही पहले 2 छंद अलग किए थे।

क्या होगा आगे? कोर्ट की भूमिका

AIMPLB ने चेतावनी दी है कि नोटिफिकेशन वापस न लिया गया तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। पहले केसेज में कोर्ट ने कहा – गाना वैकल्पिक, जबरदस्ती नहीं। ये केस मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 25 – धार्मिक स्वतंत्रता) पर लड़ेगा।

सरकार डिफेंड करेगी कि राष्ट्रगान का सम्मान संवैधानिक कर्तव्य है (अनुच्छेद 51A)। फैसला आने में समय लगेगा।

आम नागरिक क्या सोचे?

ये विवाद दिखाता है कि राष्ट्रवाद और धर्म के बीच बैलेंस कितना नाजुक है। हिंदू इसे मातृभूमि पूजा मानते हैं, मुसलमान धार्मिक टकराव। देशभक्ति सभी की, लेकिन जबरदस्ती नहीं। संविधान सभा का फैसला ही सबसे सही था शायद।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: होम मिनिस्ट्री का वंदे मातरम आदेश क्या कहता है?
    उत्तर: सभी 6 छंद सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले अनिवार्य, राष्ट्रपति आगमन, फ्लैग होइस्टिंग आदि पर 3:10 मिनट का पूरा गीत।
  2. प्रश्न: AIMPLB ने क्यों विरोध किया?
    उत्तर: बाद के छंदों में दुर्गा-लक्ष्मी पूजा का ज़िक्र, मुस्लिम विश्वास के खिलाफ; संविधान सभा ने सिर्फ 2 छंद मंजूर किए थे।
  3. प्रश्न: वंदे मातरम का विवाद कब से चल रहा?
    उत्तर: 1937 से, जब कांग्रेस-संविधान सभा ने 2 छंद ही राष्ट्रिय गीत बनाए; बाद के धार्मिक इमेजरी की वजह से।
  4. प्रश्न: सरकार का तर्क क्या है?
    उत्तर: बैंकिम का मूल गीत पूरा है, नेहरू ने सेकुलर नाम पर काटा; अब स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल सभी छंदों का।
  5. प्रश्न: आगे क्या होगा AIMPLB का प्लान?
    उत्तर: आदेश वापसी की मांग, न माने तो कोर्ट में चुनौती देंगे; धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देंगे।
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