यूनियन मंत्री हर्दीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के एप्स्टीन फाइल्स वाले आरोप ठुकराए। कहा 3-4 मीटिंग्स प्रोफेशनल थीं, क्राइम से कोई लेना-देना नहीं। 3 मिलियन ईमेल्स में सिर्फ़ नाम का जिक्र।
राहुल ने संसद में पुरी को घेरा, लेकिन मंत्री बोले – “मेरा कोई लेना-देना नहीं था”
राहुल गांधी ने संसद में हर्दीप पुरी पर लगाए एप्स्टीन वाले आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 10 फरवरी 2026 को बड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यूनियन पेट्रोलियम मंत्री हर्दीप सिंह पुरी का नाम जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स में आया है। एप्स्टीन वो अमेरिकी फाइनेंशियर था जिस पर सेक्स ट्रैफिकिंग और माइनर लड़कियों का शोषण करने के गंभीर आरोप थे। राहुल ने कहा कि उनके पास वेरिफाइड जानकारी है और ये अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के डॉक्यूमेंट्स से जुड़ा है। ये आरोप सुनते ही संसद में हंगामा मच गया। BJP सांसदों ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया।
अगले ही दिन दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने जोरदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बेसलेस आरोप लगाने की आदत है। पुरी ने साफ़ किया कि उनके और एप्स्टीन के बीच कोई गलत संबंध नहीं था। सब कुछ प्रोफेशनल था और एप्स्टीन के क्राइम्स से उनका कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने राहुल को “युवा नेता” कहकर तंज भी कसा। ये विवाद सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड करने लगा।
एप्स्टीन फाइल्स क्या हैं और हाल ही में क्यों रिलीज़ हुईं?
एप्स्टीन फाइल्स अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने जनवरी 2026 में रिलीज़ कीं। इसमें 3 मिलियन ईमेल्स, 2000 वीडियोज़ और 1.8 लाख तस्वीरें शामिल हैं। ये Epstein Files Transparency Act के तहत आईं। एप्स्टीन 2019 में जेल में मर गया था, उसकी मौत सुसाइड बताई गई। फाइल्स उसके सेक्सुअल अब्यूज़ नेटवर्क को एक्सपोज़ करती हैं। इसमें कई पावरफुल लोग – पॉलिटिशियन, बिज़नेसमैन – के नाम आए। भारत से हर्दीप पुरी और अनिल अंबानी का भी ज़िक्र हुआ। राहुल ने इन्हीं फाइल्स का हवाला दिया।
पुरी ने कहा कि फाइल्स क्रिमिनल गतिविधियों के बारे में हैं। एप्स्टीन का प्राइवेट आइलैंड था जहाँ वो लोगों को ले जाकर गलत काम करवाता था। पीड़ित लड़कियों ने केस किए। पुरी ने जोर देकर कहा कि उनकी मीटिंग्स इससे बिल्कुल अलग थीं। उन्होंने संसद सेशन के दौरान ही सफाई देना शुरू कर दिया। ये फाइल्स दुनिया भर में स्टॉर्म ला रही हैं।
हर्दीप पुरी और एप्स्टीन की मीटिंग्स कैसे हुईं?
पुरी 2009 से 2017 तक न्यूयॉर्क में भारत के UN राजदूत थे। तब इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े थे। उनका बॉस एप्स्टीन को जानता था। पुरी ने बताया कि डेलिगेशन का हिस्सा बनकर सिर्फ़ 3-4 बार एप्स्टीन से मिले। मीटिंग्स उसके मैनहट्टन हाउस पर हुईं – 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017। एक ही ईमेल एक्सचेंज हुआ। सब कुछ ऑफिशियल था। पुरी ने कहा कि एप्स्टीन ने उन्हें “टू-फेस्ड” कहा था।
जून 2014 में एप्स्टीन ने ईमेल किया कि लिंक्डइन को-फाउंडर रीड हॉफमैन इंडिया आना चाहते हैं। पुरी ने रिप्लाई किया कि वो हेल्प करेंगे। अक्टूबर 2014 में सिलिकॉन वैली में हॉफमैन से मिले। फिर नवंबर में पुरी ने एप्स्टीन और हॉफमैन को मेक इन इंडिया और इंटरनेट सेक्टर के इनवेस्टमेंट ऑपर्चुनिटीज़ पर डिटेल्ड ईमेल भेजा। मीटिंग्स इसी पर फोकस्ड थीं। पुरी ने कहा कि उनके लिए मैं “राइट पर्सन” नहीं था।
पुरी का राजनीतिक काउंटर-अटैक: राहुल पर तीखे तीर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने राहुल पर सीधा हमला किया। कहा दो तरह के लीडर्स होते हैं – एक देश बदलने वाले, दूसरी तरह के जो संसद में बोलकर वॉकआउट कर देते हैं। उन्होंने इशारा किया कि राहुल स्पीच के बाद ही हाउस से चले गए। कांस्टीट्यूशन डे पर कांग्रेस का सेलोफेन रैप्ड कॉपी लहराना भी याद दिलाया। पुरी ने कहा कि राहुल को ग्रो अप करना चाहिए। उन्होंने “बफूनरी के एलिमेंट्स” शब्द इस्तेमाल किए। NDTV को दिए इंटरव्यू में राहुल को “अस” भी कहा।
पुरी ने BJP सरकार की तारीफ़ की। कहा हमने भारत को 10वीं से चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनाया। जल्द तीसरी होंगे। वहीं राहुल जैसे लीडर्स देश आते हैं, विदेश घूमते हैं और बेसलेस आरोप लगाते हैं। ये पर्सनल अटैक ने विवाद को और भड़का दिया। सोशल मीडिया पर #EpsteinFilesIndia ट्रेंड करने लगा।
भारतीय कनेक्शन्स: सिर्फ़ पुरी ही नहीं, और नाम भी
फाइल्स में भारत से कई नाम आए। अनिल अंबानी का भी ज़िक्र है, जो मोदी के करीबी हैं। एप्स्टीन ने रीड हॉफमैन को मोदी से मिलवाने की बात की। 2017 में मोदी के इज़राइल ट्रिप पर एप्स्टीन का कंसल्टेशन का दावा। मलेशिया PM अनवर इब्राहिम का नाम भी आया। BJP ने कहा ये पुरानी ईमेल्स हैं, कोई डायरेक्ट मीटिंग नहीं। कांग्रेस ने इसे “फॉरेन मैनिपुलेशन” का सबूत बताया। ये फाइल्स ग्लोबल पॉलिटिक्स को हिला रही हैं।
अन्य देशों में भी हंगामा मचा। ऑस्ट्रेलिया के केविन रड, UK और स्लोवाकिया के लीडर्स के नाम। एप्स्टीन का नेटवर्क बहुत बड़ा था। भारत में ये राजनीतिक हथियार बन गया। विपक्ष कह रहा है कि BJP लीडर्स विदेशी लॉबिस्ट्स से जुड़े।
राहुल गांधी की तरफ़ से कोई जवाब?
राहुल ने संसद के बाहर कहा कि उनके पास वेरिफाइड इंफो है। लेकिन पुरी के जवाब के बाद चुप्पी साध ली। कांग्रेस के अन्य नेता जैसे KC वेणुगोपाल ने कहा ये बड़ा वेक-अप कॉल है। लेकिन BJP ने इसे डिस्ट्रैक्शन बताया। संसद सेशन के दौरान ये मुद्दा हाईलाइट रहा। आगे और फाइल्स आने वाली हैं।
कांग्रेस का दावा है कि ये फाइल्स दिखाती हैं कि BJP लीडर्स कैसे फॉरेन इन्फ्लुएंस में हैं। लेकिन पुरी ने साबित कर दिया कि सब ट्रांसपेरेंट था। ये विवाद बजट सेशन को प्रभावित कर सकता है।
क्या ये आरोप भारत-अमेरिका रिलेशन्स को नुकसान पहुँचाएँगे?
पुरी ने कहा कि उनकी मीटिंग्स से US-India ट्रेड डील पर कोई असर नहीं। राहुल ने ये भी कहा था कि पुरी के नाम आने से डील खतरे में। लेकिन पुरी ने इसे बकवास बताया। भारत-US रिश्ते मजबूत हैं। फाइल्स पुरानी हैं, 2009-17 की। वर्तमान में कोई इश्यू नहीं। लेकिन विपक्ष इसे भुनाने की कोशिश करेगा।
ग्लोबल मीडिया में भी कवरेज हो रहा। Al Jazeera ने मोदी का नाम जोड़ा। लेकिन BJP कह रही सब फेक न्यूज़। ये दिखाता है कि डिप्लोमेसी में नेटवर्किंग नॉर्मल है।
पुरी का बैकग्राउंड और IPI कनेक्शन
हर्दीप सिंह पुरी IFS अधिकारी रहे। UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि थे। IPI के बोर्ड मेंबर। IPI पीस एंड सिक्योरिटी पर काम करता है। एप्स्टीन IPI को फंड करता था। इसलिए डेलिगेशन मीटिंग्स हुईं। पुरी 2017 में BJP जॉइन की, अब मंत्री। उनका डिफेंस स्ट्रॉन्ग रहा।[? wait was prev]
पुरी ने कहा कि 8 साल में सिर्फ़ 3 मीटिंग्स। ईमेल सिर्फ़ एक। सब Make in India पर। एप्स्टीन ने हॉफमैन को भारत लाने में मदद मांगी। पुरी ने फैसिलिटेट किया। ये डिप्लोमैट का काम था।
राजनीतिक निहितार्थ: संसद में कैसे भुनाया जा रहा?
ये विवाद बजट सेशन के दौरान आया। राहुल ने इसे BJP की इमेज खराब करने के लिए यूज़ किया। पुरी ने काउंटर से कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया। उन्होंने इमरजेंसी का ज़िक्र किया। कहा कांग्रेस संविधान को सेलोफेन में लपेटकर लहराती है। ये पर्सनल लेवल पर चला गया। BJP कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर एक्टिव।
आने वाले दिनों में और डिबेट हो सकती है। अगर नई फाइल्स आएँ तो हंगामा बढ़ेगा। लेकिन पुरी ने क्लियर कर दिया कि कोई क्रिमिनल लिंक नहीं। टैक्सपेयर्स के पैसे से डिप्लोमेसी होती है।
निष्कर्ष रूप में देखें तो ये राजनीतिक मडस्लिंग है। एप्स्टीन जैसे केस ग्लोबल हैं। भारत में इसे लोकल पॉलिटिक्स से जोड़ा जा रहा। राहुल को जवाब मिला, लेकिन बहस जारी रहेगी। आम आदमी सोचे – क्या पुरानी ईमेल्स से जजमेंट हो सकता है?
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: राहुल गांधी ने हर्दीप पुरी पर क्या आरोप लगाया?
उत्तर: लोकसभा में कहा कि पुरी का नाम एप्स्टीन फाइल्स में है, जो US जस्टिस डिपार्टमेंट के डॉक्यूमेंट्स से जुड़ा। - प्रश्न: पुरी ने एप्स्टीन से कितनी बार मुलाकात की?
उत्तर: सिर्फ़ 3-4 बार, डेलिगेशन का हिस्सा बनकर, 2015-17 के बीच न्यूयॉर्क में। सब IPI वर्क से जुड़ा। - प्रश्न: मीटिंग्स किस बारे में थीं?
उत्तर: मेक इन इंडिया, इंटरनेट इनवेस्टमेंट्स और रीड हॉफमैन के इंडिया विज़िट पर। एक ईमेल एक्सचेंज हुआ। - प्रश्न: एप्स्टीन फाइल्स में क्या है?
उत्तर: 3 मिलियन ईमेल्स, वीडियोज़, इमेजेस उसके सेक्स अब्यूज़ नेटवर्क पर। जनवरी 2026 में रिलीज़। - प्रश्न: पुरी ने राहुल पर क्या तंज कसा?
उत्तर: कहा राहुल बेसलेस आरोप लगाते हैं, संसद से वॉकआउट करते हैं, ग्रो अप करें; बफूनरी के एलिमेंट्स हैं।
- BJP minister rebuttal Rahul
- Epstein files India minister
- Epstein files US DOJ release
- Hardeep Puri press conference Epstein
- Hardeep Puri UN ambassador Epstein
- Hardeep Singh Puri Epstein
- International Peace Institute Epstein
- Jeffrey Epstein IPI meetings
- Lok Sabha LoP Rahul charges
- Make in India Epstein discussion
- Rahul Gandhi Epstein allegations
- Reid Hoffman Epstein Puri email
Leave a comment