सुप्रीम कोर्ट ने CIC नियुक्तियों पर LoP राहुल गांधी के डिसेंट नोट सार्वजनिक करने से इनकार किया। केस वैकेंसी भरने तक सीमित, आंतरिक कारणों की जांच नहीं। केंद्र ने सभी पोस्ट भरने का दावा किया।
सरकार के उम्मीदवारों पर राहुल गांधी का ऐतराज़ – सुप्रीम कोर्ट ने खुलासा क्यों रोका?
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के डिसेंट नोट पर खुलासे से इनकार क्यों किया?
सुप्रीम कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 को एक सुनवाई में साफ कर दिया कि वो केंद्र सरकार को LoP राहुल गांधी के CIC नियुक्तियों पर असहमति नोट सार्वजनिक करने का आदेश नहीं देगा। CJI सूर्या कांत की बेंच ने कहा कि ये केस वैकेंसी भरने के लिए है, न कि सिलेक्शन कमिटी की आंतरिक बहस को ट्रायल की तरह जांचने के लिए। याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने दबाव बनाया कि लोग जानने के हकदार हैं कि LoP ने क्यों असहमति जताई। लेकिन कोर्ट ने फटकार लगाई कि हम यहाँ उम्मीदवारों की तुलना या वजहें नहीं देखेंगे। केंद्र ने बताया कि सभी CIC पोस्ट भर चुके हैं। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
राहुल गांधी का डिसेंट कब और क्यों दर्ज हुआ?
राहुल गांधी ने दिसंबर 2025 में PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह वाली कमिटी की मीटिंग में डिसेंट नोट सौंपा था। मीटिंग करीब डेढ़ घंटे चली और उन्होंने कुछ उम्मीदवारों पर ऐतराज़ जताया। सोर्स बताते हैं कि डिसेंट का आधार था उम्मीदवारों में SC/ST/OBC/माइनॉरिटी कम्युनिटीज़ का अभाव, सिर्फ 7% अप्लिकेंट्स इन कैटेगरी से थे। राहुल ने कहा कि ये RTI एक्ट को कमजोर करने जैसा है क्योंकि कुछ कैंडिडेट्स पहले ट्रांसपेरेंसी में फेल रहे। उन्होंने सिस्टमैटिक एक्सक्लूजन का पैटर्न बताया। PMO ने कुछ अपॉइंटमेंट्स पर सहमति दिखाई लेकिन डिसेंट नोट रख लिया।
CIC सिलेक्शन कमिटी कैसे काम करती है?
RTI एक्ट की धारा 12(3) के तहत CIC चीफ और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति PM हेडेड कमिटी करती है। इसमें LoP और PM द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। 2019 के सुप्रीम कोर्ट जजमेंट ने कहा था कि अपॉइंटमेंट्स टाइमली हों, वरना RTI बेअसर हो जाएगी। कमिटी को सर्च कमिटी और ऐड बनानी होती है, लेकिन प्रोसेस पर ट्रांसपेरेंसी की कमी रही। अब अप्लिकेंट्स की डिटेल्स पब्लिक डोमेन में डालने का दबाव है लेकिन मिनट्स या डिसेंट नोट प्राइवेट रहते हैं। कोर्ट ने 2019 में वेबसाइट पर ऐड, अप्लिकेंट्स, मिनट्स डालने को कहा था।
CIC में वैकेंसी क्यों बनी रहीं और क्या समस्या?
CIC का चीफ पोस्ट सितंबर 2025 से खाली था जब हीराला समरिया रिटायर हुईं। आठ IC पोस्ट भी लंबे समय से खाली थीं, कमीशन में सिर्फ दो ही बचे। इससे RTI अपील्स का बैकलॉग बढ़ गया। स्टेट्स में भी SIC वैकेंसी की समस्या। कोर्ट ने कहा कि अगर पेंडेंसी ज्यादा है तो कमिश्नर्स की सैंक्शन स्ट्रेंथ बढ़ाओ। केंद्र ने दावा किया सभी पोस्ट भर दिए लेकिन भूषण ने कहा क्वालिफिकेशन पब्लिक नहीं। कोर्ट ने दो महीने बाद सुनवाई तय की। स्टेट्स को अपॉइंटमेंट्स जल्दी करने को कहा।
प्रशांत भूषण की याचिका का दायरा क्या था?
भूषण की PIL CIC और SIC वैकेंसी भरने पर फोकस्ड थी। उन्होंने अप्लाई करने वालों, शॉर्टलिस्टेड, अपॉइंटीज़ की डिटेल्स मांगी। केंद्र के ASG KM नटराज ने कहा नाम पब्लिक हैं लेकिन मिनट्स नहीं देंगे। कोर्ट ने सहमति जताई कि केस वैकेंसी तक सीमित रहे। अगर कोई अपॉइंटमेंट RTI एक्ट के खिलाफ तो अलग चैलेंज करो। CJI ने कहा हम ये मान नहीं सकते कि गवर्नमेंट क्वालिफाइड नहीं लोग चुनेगी। ये फैसला कमिटी की प्राइवेसी बचाता है।
राहुल गांधी ने संसद में क्या कहा था?
लोकसभा में राहुल ने कहा कि कमिटी में PM मोदी, अमित शाह एक तरफ, LoP दूसरी तरफ – असली डेमोक्रेटिक डिसीजन नहीं होता। उन्होंने कहा मेरी आवाज दब जाती है। ये बयान दिसंबर 2025 के बाद आया जब अपॉइंटमेंट्स हुए। विपक्ष का आरोप है कि RTI को कमजोर किया जा रहा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला विपक्ष के दावे को कमजोर करता दिखता है। लेकिन वैकेंसी भरने पर प्रेशर बना रहेगा।
RTI एक्ट को मजबूत करने के लिए क्या सुधार चाहिए?
RTI एक्ट 2005 का मकसद ट्रांसपेरेंसी है लेकिन CIC/SIC वैकेंसी से अपील्स लटकती रहीं। एक्ट में सिलेक्शन क्राइटेरिया पब्लिक हो, डाइवर्स बैकग्राउंड से लोग चुने जाएं। रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स पर निर्भरता कम हो। प्रत्येक IC साल में 6000+ अपील्स डिस्पोज करे। अपॉइंटमेंट प्रोसेस में पब्लिक एक्सपोज़र हो। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में ये गाइडलाइंस दीं लेकिन अमल धीमा। अब डिजिटल ट्रैकिंग से बैकलॉग कम हो सकता है।
राज्यों में SIC वैकेंसी की स्थिति कैसी?
कई स्टेट्स में SIC कमिश्नर्स की कमी से हजारों अपील्स पेंडिंग। कोर्ट ने दो महीने का समय दिया। कुछ स्टेट्स ने प्रोसेस शुरू किया। भारी पेंडेंसी वाले स्टेट्स को स्ट्रेंथ बढ़ाने को कहा। केंद्र ने स्टेट्स को निर्देश दिए। अगर CIC मजबूत न हुआ तो RTI का पूरा सिस्टम कमजोर पड़ जाएगा। ये सुनवाई RTI के भविष्य पर असर डालेगी।
कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का स्टैंड क्या रहा?
कोर्ट ने बैलेंस रखा – वैकेंसी भरने पर फोकस रखा लेकिन कमिटी डिस्कशन प्राइवेट रखे। ये फैसला गवर्नेंस में ट्रांसपेरेंसी vs प्राइवेसी का बैलेंस दिखाता है। अगर अपॉइंटमेंट्स क्वालिफाइड हैं तो अलग चैलेंज। दो महीने बाद स्टेटस रिपोर्ट पर अगली सुनवाई। RTI एक्टिविस्ट्स निराश हैं लेकिन वैकेंसी भरना पॉजिटिव। राजनीतिक बहस जारी रहेगी।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के डिसेंट नोट पर क्या फैसला दिया?
उत्तर: कोर्ट ने केंद्र को नोट सार्वजनिक करने का आदेश देने से इनकार कर दिया, कहा केस वैकेंसी भरने तक सीमित, आंतरिक वजहें जांचने का दायरा नहीं। - प्रश्न: राहुल गांधी ने CIC मीटिंग में डिसेंट क्यों दिया?
उत्तर: उम्मीदवारों में SC/ST/OBC/माइनॉरिटी कम थे (सिर्फ 7%), कुछ कैंडिडेट्स ट्रांसपेरेंसी में फेल रहे, सिस्टमैटिक एक्सक्लूजन का आरोप। - प्रश्न: CIC सिलेक्शन कमिटी में कौन होते हैं?
उत्तर: PM चेयरपर्सन, LoP और PM नामित कैबिनेट मंत्री; RTI एक्ट धारा 12(3) के तहत अपॉइंटमेंट्स। - प्रश्न: CIC पोस्ट कब से खाली थीं?
उत्तर: CIC चीफ सितंबर 2025 से, आठ IC पोस्ट लंबे समय से; अब केंद्र का दावा सभी भरे। - प्रश्न: स्टेट्स को कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
उत्तर: दो महीने में वैकेंसी भरें, पेंडेंसी ज्यादा तो कमिश्नर्स स्ट्रेंथ बढ़ाएं; अगली सुनवाई दो महीने बाद।
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