सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की अवैध हिरासत याचिका खारिज कर दी, कहा हाईकोर्ट में लंबित मामले को वहां जल्द सुनवाई कराएं। जस्टिस ने कहा ‘सोसायटी के लिए अच्छा न करने पर 25 साल की सजा’।
25 साल की सजा पूरी, फिर भी जेल में अबू सलेम? SC ने क्या कहा ‘सोसायटी के लिए अच्छा न करने पर’
अबू सलेम की रिहाई याचिका SC ने खारिज की: हाईकोर्ट जाएं, जल्द सुनवाई कराएं
16 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई बम ब्लास्ट के कुख्यात दोषी अबू सलेम की याचिका को खारिज कर दिया। सलेम ने दावा किया था कि वह पोर्चुगल से प्रत्यर्पण शर्त के तहत निर्धारित 25 साल की सजा पूरी कर चुका है और उसके बाद 10 महीने से ज्यादा अवैध हिरासत में है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दी लेकिन साफ कहा कि बम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले को वहां ही जल्द सुनवाई के लिए पेश करें। बेंच ने कहा कि हम हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले को चैलेंज नहीं देखेंगे। वकील ऋषि मल्होत्रा ने तर्क दिए लेकिन कोर्ट ने साफ मना कर दिया।
25 साल की सजा: प्रत्यर्पण वादे और रेमिशन का विवाद
अबू सलेम को पोर्चुगल से नवंबर 2005 में प्रत्यर्पित किया गया था। भारत ने पोर्चुगल को वादा किया था कि उसे मौत की सजा नहीं होगी और कैद 25 साल से ज्यादा नहीं होगी। 2017 में TADA कोर्ट ने लाइफ इम्प्रिजनमेंट दिया, लेकिन 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे 25 साल की सजा में कम कर दिया। सलेम का दावा है कि अंडरट्रायल पीरियड, पोर्चुगल डिटेंशन और गुड कंडक्ट रेमिशन जोड़कर वह मार्च 2025 में ही 25 साल पूरा कर चुका। महाराष्ट्र जेल नियम 1962 के तहत उसे 3 साल 16 दिन रेमिशन मिलना चाहिए। लेकिन राज्य का कहना है कि अभी 19 साल 5 महीने ही हुए हैं।
बम्बे हाईकोर्ट का अंतरिम फैसला: 25 साल अभी बाकी
जुलाई 2025 में बम्बे हाईकोर्ट ने प्राइमा फेसी कहा कि 25 साल का पीरियड अभी पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2005 को डिटेंशन की शुरुआत माना और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सलेम ने हेबियास कॉर्पस याचिका दायर की थी। IG प्रिजन्स के हलफनामे में गणना में अंकगणितीय त्रुटि का आरोप लगाया। लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की पर अंतिम सुनवाई बाकी। SC ने कहा अंतरिम ऑर्डर को चैलेंज न करें।
SC बेंच की फटकार: ‘सोसायटी के लिए अच्छा न करने पर 25 साल’
सुनवाई में जस्टिस नाथ ने सख्त लहजे में कहा कि तुम्हें TADA के तहत दोषी ठहराया गया क्योंकि सोसायटी के लिए अच्छा न किया। 25 साल की सजा इसी के लिए है। जब वकील ने 10 महीने अवैध हिरासत का दावा किया तो बेंच ने कहा यह हेबियास कॉर्पस नहीं बल्कि अपील है। जस्टिस मेहता ने कहा हाईकोर्ट के फैक्ट्स को चैलेंज करने का तरीका अपनाएं। बेंच ने कहा गणना हाईकोर्ट देखेगी। याचिका वापस ली गई पर लिबर्टी दी गई।
1993 ब्लास्ट केस: अबू सलेम का रोल क्या था?
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट्स में 257 लोगों की मौत हुई। अबू सलेम ने हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति की साजिश में हिस्सा लिया। उसे लिस्बन से 2002 में गिरफ्तार किया गया। प्रत्यर्पण के बाद ट्रायल चला। TADA कोर्ट ने दोषी ठहराया। सलेम ने कई अपीलें कीं। नासिक सेंट्रल प्रिजन में कैद है। राज्य का कहना है रेमिशन गणना में अंडरट्रायल पीरियड अलग।
पोर्चुगल प्रत्यर्पण वादा: क्या भारत ने तोड़ा?
भारत ने पोर्चुगल को वादा किया था – नो डेथ पेनल्टी, मैक्सिमम 25 साल जेल। 2022 में SC ने कहा केंद्र बाध्य है। लेकिन पोर्चुगल डिटेंशन को काउंट न करने का फैसला। सलेम का दावा 23 साल 7 महीने हो चुके। राज्य कहता है 19 साल ही। हाईकोर्ट अंतिम फैसला लेगा। अगर रिहा तो 2030 तक न रहेगा।
अब आगे क्या: हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने दी लेकिन हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई की छूट दी। हाईकोर्ट अंतिम फैसला लेगा। राज्य का हलफनामा चेक होगा। रेमिशन नियमों पर बहस होगी। सलेम की वकील फरहाना शाह ने कहा गणना में त्रुटि। अगर हाईकोर्ट मानता है तो रिलीज डेट तय होगी। SC ने तर्क दिया कि TADA दोषी को आसानी से रिहा न करें।
समाज की प्रतिक्रिया: रिहाई पर सवाल
समाज में अबू सलेम जैसे दोषी की रिहाई पर बहस छिड़ी। कुछ कहते हैं कानून सबके लिए बराबर। लेकिन ब्लास्ट पीड़ित परिवार नाराज। BJP ने कहा न्याय प्रक्रिया चले। कांग्रेस ने कहा कानूनी फैसला हो। सलेम ने कई केस लड़ रखे। नासिक जेल में सिक्योरिटी टाइट।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की याचिका पर क्या फैसला दिया?
उत्तर: याचिका खारिज कर दी, कहा बम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले को वहां जल्द सुनवाई कराएं, हम अंतरिम फैसले नहीं देखेंगे। - प्रश्न: सलेम का दावा क्या था?
उत्तर: 25 साल की सजा पूरी, रेमिशन जोड़कर 10 महीने अवैध हिरासत, हेबियास कॉर्पस याचिका। - प्रश्न: पोर्चुगल प्रत्यर्पण वादा क्या था?
उत्तर: नो डेथ पेनल्टी, मैक्सिमम 25 साल जेल; SC ने 2022 में कहा केंद्र बाध्य। - प्रश्न: हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
उत्तर: जुलाई 2025 में प्राइमा फेसी 25 साल बाकी, अंतरिम राहत इनकार लेकिन याचिका स्वीकार। - प्रश्न: जस्टिस ने क्या फटकार लगाई?
उत्तर: ‘सोसायटी के लिए अच्छा न करने पर TADA में 25 साल की सजा, यह हेबियास कॉर्पस नहीं अपील है।’
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