Home देश क्या निर्मला सीतारामन का 9वां बजट महिलाओं के लिए मिसाल बनेगा?
देश

क्या निर्मला सीतारामन का 9वां बजट महिलाओं के लिए मिसाल बनेगा?

Share
Nirmala Sitharaman nine budgets
Share

PM मोदी ने दिए इंटरव्यू में कहा कि FM निर्मला सीतारामन के लगातार नौ बजट पेश करना राष्ट्रीय गौरव है, कई महिलाएं इससे प्रेरित हो रही। मोरारजी देसाई का 10 बजट रिकॉर्ड अब भी बरकरार।

लगातार 9 बजट पेश करने वाली पहली FM: सीतारामन की उपलब्धि पर PM का तारीफी बयान

PM मोदी का तारीफ भरा बयान: सीतारामन के 9 बजट राष्ट्रीय गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी को दिए विशेष इंटरव्यू में वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि निर्मला जी के लगातार नौ बजट पेश करना राष्ट्रीय गौरव का विषय है। यह उपलब्धि अपने आप में रिकॉर्ड है। पूरे देश की कई महिलाएं इससे प्रेरित हो रही हैं। मोदी ने इसे संसदीय इतिहास में गर्व का क्षण बताया। 1 फरवरी 2026 को पेश हुए बजट से सीतारामन ने यह मील का पत्थर हासिल किया।

9 लगातार बजट: मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड से एक कदम दूर

सीतारामन ने 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026-27 पेश कर लगातार नौ बजट का रिकॉर्ड बना लिया। वे भारत की पहली वित्त मंत्री हैं जिन्होंने एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में इतने लगातार बजट पेश किए। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने कुल 10 बजट पेश किए थे – 1959 से 1964 तक 6 और 1967-69 में 4। लेकिन देसाई का रिकॉर्ड अलग-अलग कार्यकालों में था। पी चिदंबरम ने भी 9 बजट पेश किए लेकिन लगातार नहीं। प्रणब मुखर्जी के नाम 8 बजट हैं।

सीतारामन का सफर: इंटरिम से लेकर 2026 तक

सीतारामन का पहला बजट फरवरी 2019 का इंटरिम था। फिर जुलाई 2019 से पूर्ण बजट शुरू हुए। 2020 से 2026 तक हर साल पेश किया। कोविड महामारी के दौर में भी उन्होंने बजट समय पर दिए। हर बजट में इंफ्रा, हेल्थ, एग्री, एमएसएमई पर फोकस रहा। मोदी सरकार के 15वें बजट में उन्होंने फिस्कल डिसिप्लिन बनाए रखा। महिलाओं, किसानों, युवाओं के लिए स्कीम्स बढ़ाईं। यह उपलब्धि उन्हें इतिहास में अमर कर देगी।

महिलाओं के लिए प्रेरणा: मोदी का खास संदेश

मोदी ने जोर देकर कहा कि सीतारामन का यह रिकॉर्ड भारत भर की महिलाओं को प्रेरित कर रहा। कई लड़कियां अब सोच रही हैं कि वे भी ऊंचे पद संभाल सकती हैं। मोदी सरकार ने हमेशा महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। लाखपति दीदी, बेटी बचाओ जैसे कदम इसी दिशा में। सीतारामन पहली पूर्णकालिक महिला FM हैं। उनका कार्यकाल आर्थिक चुनौतियों से भरा रहा। फिर भी उन्होंने स्थिरता दी।​

मोरारजी देसाई का रिकॉर्ड: तुलना कैसे करें?

मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बजट पेश किए। नेहरू सरकार में 1959-64 तक 6 लगातार। फिर 1967-69 में 4। चिदंबरम के 9 बजट अलग-अलग पीएम के कार्यकाल में। मुखर्जी के 8। सीतारामन के 9 लगातार मोदी के नेतृत्व में हैं। अगला बजट 2027 में 10वां होगा। तब वे देसाई के रिकॉर्ड से बराबरी कर लेंगी। लेकिन लगातारता का रिकॉर्ड उनका अनोखा रहेगा।

सीतारामन के बजटों ने क्या बदला: मुख्य थीम्स

सीतारामन के बजटों ने भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर मजबूत किया। 2019 में कॉर्पोरेट टैक्स कट। 2020-21 में कोविड राहत के लिए 2 लाख करोड़। इंफ्रा पर कैपेक्स बढ़ाया – 2026 बजट में 11 लाख करोड़। आत्मनिर्भर भारत, Gati Shakti, PLI स्कीम्स शुरू। फिस्कल डेफिसिट घटाया। डिजिटल पेमेंट, ग्रीन एनर्जी पर फोकस। महिलाओं के लिए स्टैंडिंग कमिटी ऑफ इंपैनलमेंट।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस ने इसे प्रचार बताया। कहा बजटों में वादे पूरे नहीं हुए। लेकिन BJP ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि कहा। मोदी ने संसद में भी सराहना की। सोशल मीडिया पर #SitharamanRecord ट्रेंडिंग रहा। महिलाओं ने तारीफ की। सीतारामन ने कहा सेवा का मौका मिला।

महिलाओं का प्रतिनिधित्व: FM के बाद क्या?

सीतारामन के बाद इरावती करजगीकर पहली महिला RBI गवर्नर रहीं। स्मृति ईरानी, निर्मला महंता जैसे कई महिला मंत्री। लेकिन FM जैसा टॉप पोस्ट दुर्लभ। मोदी का बयान लड़कियों को प्रोत्साहित करेगा। शिक्षा, स्किलिंग पर जोर।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: सीतारामन ने कितने लगातार बजट पेश किए?
    उत्तर: 1 फरवरी 2026 को नौवां लगातार बजट पेश कर रिकॉर्ड बनाया।
  2. प्रश्न: मोरारजी देसाई का रिकॉर्ड क्या था?
    उत्तर: कुल 10 बजट – 1959-64 में 6 लगातार, 1967-69 में 4।
  3. प्रश्न: PM मोदी ने क्या कहा?
    उत्तर: राष्ट्रीय गौरव का विषय, महिलाओं को प्रेरित कर रही।
  4. प्रश्न: चिदंबरम और मुखर्जी के कितने बजट?
    उत्तर: चिदंबरम 9 (लगातार नहीं), मुखर्जी 8।
  5. प्रश्न: अगला बजट कब?
    उत्तर: 2027 में 10वां बजट, देसाई के रिकॉर्ड से बराबरी।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

“जॉब छोड़कर गुजारा भत्ता से बचना” अब आम चाल? दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त संदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कई पढ़े-लिखे पति स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेकर...