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Himanta की किताब में खुलेगा 2014 असम कांग्रेस का काला अध्याय?

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Himanta Says God Gave More Than Sonia Could
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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा सोनिया गांधी ने 2014 में CM शपथ की तारीख तय करने को कहा था जब 58 MLA समर्थक थे, लेकिन राहुल गांधी के USA से फोन ने सब बदल दिया।

क्या सोनिया ने हिमंत को असम CM बनाने को कहा था? राहुल के फोन ने क्यों सब बदल दिया

हिमंत का बड़ा दावा: सोनिया ने कहा तारीख तय करो, लेकिन राहुल ने बदल दिया खेल

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 फरवरी को गुवाहाटी में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में एक पुराना राज खोला। उन्होंने दावा किया कि 2014 में जब कांग्रेस के 58 विधायकों ने उनका समर्थन किया था, तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनसे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की तारीख तय करने को कहा था। सरमा ने कहा कि उन्होंने सोनिया को जवाब दिया था कि वे जून में कामाख्या मंदिर के अंबुबाची मेला के बाद शपथ लेंगे। लेकिन अमेरिका में मौजूद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को फोन कराये और हालात पूरी तरह बदल गए। सरमा ने सोनिया को अभी भी ‘मैडम’ कहा। यह खुलासा अब सियासत में हलचल मचा रहा है।

2011 चुनाव के बाद असम कांग्रेस में विद्रोह: हिमंत बनाम तरुण गोगोई

यह सब 2011 के असम विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ था, जब कांग्रेस ने 126 सीटों में से 78 जीती थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के नेतृत्व में सरकार बनी लेकिन जल्द ही पार्टी में असंतोष भड़क गया। हिमंत सरमा, जो हेल्थ, एजुकेशन और फाइनेंस मंत्री थे, ने गोगोई के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। 58 विधायकों ने सरमा को गोगोई की जगह CM बनाने की मांग की। सरमा ने चुनाव कैंपेन लीड किया था और पार्टी की जीत में बड़ा रोल निभाया था। लेकिन हाईकमान ने गोगोई को ही बचाया।

राहुल का फोन कॉल: विद्रोह टूटा, हिमंत को झटका

सरमा के मुताबिक सोनिया ने उनका साथ दिया था लेकिन राहुल गांधी ने USA से फोन कॉल्स कराये और पार्टी नेताओं को लाइन पर ला दिया। परिणामस्वरूप विद्रोह कमजोर पड़ गया और हिमंत CM नहीं बन सके। सरमा ने कहा कि तब उन्हें ठेस पहुंची थी लेकिन अब लगता है जो हुआ अच्छा ही हुआ। भगवान ने कांग्रेस में रहने से ज्यादा दिया। BJP CM बनकर उन्होंने असम और सनातन धर्म की सेवा की। कांग्रेस में यह संभव न होता। सरमा 2021 से असम के CM हैं।

कांग्रेस छोड़ BJP में शामिल: 2016 में पहली जीत का सूत्रधार

2014 के विद्रोह के बाद सरमा ने 2015 में कांग्रेस छोड़ दी और BJP में शामिल हो गए। 10 अन्य विधायकों ने भी उनका साथ दिया। BJP को तब नॉर्थईस्ट में कोई पकड़ नहीं थी। सरमा ने 2016 के असम चुनाव में BJP को पहली सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। वे NEDA (नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) के कन्वीनर बने। अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा में भी BJP की जीत में उनका हाथ रहा। 2021 में वे खुद CM बने। गोगोई ने तब कहा था ‘गुड रिडेंस’ लेकिन सरमा साबित हुए हीरा।

किताब में खुलेगा पूरा राज: हिमंत का इशारा

सरमा ने कहा कि अगर वे कभी किताब लिखेंगे तो इन घटनाओं का पूरा ब्योरा देंगे। उन्होंने कहा कांग्रेस में रहते कई व्यक्तिगत मुद्दे थे। असम आइडेंटिटी पर कांग्रेस का रुख पसंद न था। BJP में आकर उन्होंने असम हित में काम किया। अब वे सनातन धर्म सेवा पर फोकस करते हैं। यह दावा कांग्रेस को असहज कर सकता है। विपक्ष ने इसे पुरानी बात बताया। BJP कार्यकर्ता उत्साहित हैं।

2011 से 2021: हिमंत का राजनीतिक सफर कैसा रहा?

हिमंत सरमा का सफर स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरू हुआ। हितेश्वर साकिया और तरुण गोगोई उनके मेंटॉर रहे। 2001 में पहली बार विधायक बने। गोगोई कैबिनेट में मंत्री रहे। 2011 में पार्टी को बड़ी जीत दिलाई। लेकिन CM पद की महत्वाकांक्षा पूरी न हुई। BJP जॉइन करने के बाद नॉर्थईस्ट में BJP का विस्तार किया। अब असम के सबसे ताकतवर नेता। 2026 चुनाव में भी अहम भूमिका।

असम कांग्रेस का तत्कालीन हालात: गोगोई का वर्चस्व

2011 चुनाव के बाद कांग्रेस में गोगोई का बेटा गौरव को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई। सरमा को हाईकमान में जगह न मिली। चिट फंड स्कैम में CBI पूछताछ भी हुई। पार्टी में असम आइडेंटिटी vs बंगाली वोट बैंक पर विवाद। विद्रोह 2012 से शुरू। मल्लिकार्जुन खड़गे ऑब्जर्वर बने। राहुल ने गोगोई को बचाया। सरमा ने इस्तीफा दिया। BJP ने तुरंत स्वागत किया।

BJP की नॉर्थईस्ट स्ट्रेटेजी में हिमंत की भूमिका

BJP को 2016 से नॉर्थईस्ट में हिमंत सरमा की वजह से मजबूती मिली। वे NEDA कन्वीनर बने। अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा में सरकारें बनीं। असम में 2016 और 2021 में BJP की जीत का श्रेय। अब वे सनातन धर्म और असम हित पर फोकस। यह दावा उनकी लोकप्रियता बढ़ाएगा। कांग्रेस असम में कमजोर।

कांग्रेस का जवाब: पुरानी बात, अब BJP प्रॉपगैंडा?

कांग्रेस नेताओं ने सरमा के दावे को पुराना बताया। कहा 2011 के बाद विद्रोह सरमा ने ही भड़काया। गोगोई ने विकास किया। सरमा का BJP जाना पार्टी के लिए अच्छा था। अब वे पुरानी बातें गढ़ रहे। BJP ने इसे कांग्रेस का काला इतिहास बताया। असम में सियासत गरमाई। किताब का इंतजार।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: हिमंत सरमा ने सोनिया गांधी के बारे में क्या दावा किया?
    उत्तर: 2014 में जब 58 MLA समर्थक थे, सोनिया ने उनसे CM शपथ की तारीख तय करने को कहा, सरमा ने जून अंबुबाची मेला बाद बताया।
  2. प्रश्न: हालात क्यों बदले?
    उत्तर: राहुल गांधी ने USA से फोन कॉल्स कराये, पार्टी नेताओं को लाइन पर ला दिया, विद्रोह टूट गया।
  3. प्रश्न: हिमंत ने कांग्रेस छोड़ा कब?
    उत्तर: 2015 में BJP जॉइन किया, 10 MLA साथ गए; 2016 में BJP को असम में पहली सरकार दिलाई।
  4. प्रश्न: अब हिमंत क्या कहते हैं?
    उत्तर: ठेस लगी थी लेकिन अच्छा ही हुआ, BJP CM बनकर असम और सनातन धर्म सेवा की।
  5. प्रश्न: किताब में क्या आएगा?
    उत्तर: अगर लिखेंगे तो इन घटनाओं का पूरा ब्योरा देंगे।

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