ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत तेल और कोकिंग कोल सप्लाई विविध करने के लिए US पर नज़र रख रहा है। नई ट्रेड डील से टैरिफ 18% तक घटेंगे, एविएशन और IT सेक्टर को बड़ा फायदा दिखाया।
AI से IT सेक्टर खत्म होगा या उड़ेगा? गोयल ने ग्लोबल समिट में क्या संकेत दिए
भारत की नई ऊर्जा रणनीति: तेल और कोकिंग कोल के लिए US पर नज़र
मुंबई में आयोजित ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ संकेत दिए कि भारत अब अपनी ऊर्जा टोकरी में अमेरिका को अधिक वजन देना चाहता है। उन्होंने कहा कि अभी कच्चे तेल और कोकिंग कोल के लिए भारत 2–3 भौगोलिक क्षेत्रों पर ज्यादा निर्भर है, जिस कारण कीमतों में अचानक उछाल से बड़ी परेशानी होती है। गोयल के शब्दों में, “मैं कोकिंग कोल के लिए 2–3 जियोग्राफीज़ पर निर्भर हूँ, प्राइस पागलों की तरह ऊपर–नीचे होते हैं, मैं अमेरिका से हाई–क्वालिटी कोकिंग कोल लेना चाहूँगा।” इस बयान से साफ है कि भारत सिर्फ रूस या मध्यपूर्व पर नहीं टिकना चाहता, बल्कि US से भी दीर्घकालिक सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट और बेहतर कीमतों की तलाश में है।
US से सिर्फ़ तेल–कोयला नहीं, हाई–टेक सामान भी चाहिए
गोयल ने कहा कि अमेरिका केवल ऊर्जा सप्लायर नहीं, बल्कि तकनीक और पूँजी का बड़ा स्रोत भी हो सकता है। उन्होंने साफ कहा, “हमें GPUs चाहिए, हमें डेटा सेंटर्स के लिए इक्विपमेंट चाहिए और हाई–क्वालिटी क्वांटम कंप्यूटिंग की जरूरत है।” यानी भारत अगली पीढ़ी की डिजिटल इकोनॉमी के लिए हार्डवेयर और टेक्नोलॉजी में भी US के साथ गहरे रिश्ते बनाना चाहता है। डेटा सेंटर, AI, हाई–परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और 5G–6G जैसे क्षेत्रों में जो चिप्स और उपकरण जरूरी हैं, वे फिलहाल सीमित देशों के हाथ में हैं। नई ट्रेड डील के जरिए इन पर टैरिफ और नॉन–टैरिफ बाधाएँ घटाने की कोशिश होगी।
25% अतिरिक्त टैरिफ हट चुका, अब बेस ड्यूटी 18% पर आने की तैयारी
गोयल ने समिट में याद दिलाया कि अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ही भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स हटा दिया है। यह एक्स्ट्रा ड्यूटी रूस से भारत के तेल आयात पर असहमति के कारण लगाई गई थी, जो अब US द्वारा वापस ले ली गई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय सामान पर लगने वाली रेसिप्रोकल टैरिफ दर इस हफ्ते 18 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है, जो पहले 25 प्रतिशत थी। यह बदलाव प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील का हिस्सा है, जिस पर दोनों पक्षों की ओर से मार्च के आसपास हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। डील साइन होने के बाद आगे और रियायतें भी लागू होंगी।
एविएशन सेक्टर: अकेले US से 5 साल में 100 अरब डॉलर की डिमांड
समझौते में एविएशन को एक प्रमुख घटक के रूप में देखा जा रहा है। गोयल ने कहा कि भारत का हवाई यात्रा बाजार इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि “हम टॉप डॉलर दे रहे हैं और आधे एयरपोर्ट्स पर उड़ाने भरने के लिए पर्याप्त विमान ही नहीं हैं।” उन्होंने अनुमान लगाया कि सिर्फ़ एविएशन सेक्टर में ही अगले पाँच सालों में US से लगभग 100 अरब डॉलर की मांग पैदा होगी। इसका मतलब है कि बोइंग जैसे अमेरिकी एयरक्राफ्ट निर्माताओं के लिए भारत सबसे बड़ा ग्रोथ मार्केट बन सकता है, जबकि भारत को आधुनिक फ्लीट, बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
ट्रेड डील से कौन–कौन से भारतीय सेक्टर को फायदा?
गोयल ने संकेत दिया कि यह डील केवल ऊर्जा व एविएशन तक सीमित नहीं रहेगी। अंतरिम समझौता भारत के श्रम–प्रधान निर्यात क्षेत्रों के लिए भी अमेरिकी बाज़ार को और अधिक खोल सकता है। टेक्सटाइल, फुटवियर, लेदर, हैंडीक्राफ्ट, जेम्स–ज्वेलरी और कुछ फूड प्रोसेसिंग आइटम्स पर टैरिफ कटौती से अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कॉम्पिटिटिव स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी ट्रेड समझौते में दी गई रियायत, संबंधित मंत्रालयों और प्राइवेट सेक्टर हितधारकों की मंजूरी के बिना नहीं दी जाती। उनके अनुसार अब तक EU तक के 8 एग्रीमेंट पब्लिक डोमेन में हैं और किसी स्टेकहोल्डर ने शिकायत नहीं की।
EU और US डील के बाद ‘capital की बाढ़’ की उम्मीद
गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ समझौते के बाद और अब US डील के फाइनल होने पर उन्हें भारत में निवेश की ‘flood of capital’ दिखाई देती है। उनका दावा है कि भारत जैसे रिटर्न कहीं और नहीं मिल रहे हैं, इसलिए ग्लोबल निवेशक यहां तेजी से आएंगे। बेहतर मार्केट एक्सेस, स्थिर पॉलिसी और डेमोग्राफिक एडवांटेज मिलकर भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकते हैं। यह बयान उस व्यापक रणनीति से जुड़ा है जिसके तहत भारत खुद को ‘trusted manufacturing and services partner’ के रूप में पेश कर रहा है।
AI से IT सेक्टर पर संकट की बात ‘बेतुकी’: गोयल
हाल के दिनों में भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में गिरावट और AI के कारण भविष्य की नौकरियों पर उठ रहे सवालों पर भी गोयल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि IT स्टॉक्स पर जो ‘panic’ देखा जा रहा है, वह “काफी बेतुका” है। उनकी दलील है कि AI को स्केल करने और इंप्लीमेंट करने के लिए वही भारतीय टेक कंपनियाँ ज़रूरी होंगी जो आज दुनिया भर में सॉफ्टवेयर और सर्विसेज दे रही हैं। यह बात IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के हालिया बयान से मेल खाती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय IT फर्म्स AI चैलेंज लेने के लिए अच्छी तरह तैयार हैं।
इंटरिम डील कब तक और आगे का रोडमैप क्या?
गोयल ने संकेत दिया कि इंटरिम ट्रेड डील पर मार्च के आसपास साइन होने की उम्मीद है, जिसके बाद दूसरी–तीसरी स्टेज की रियायतों पर बातचीत आगे बढ़ेगी। शुरुआती चरण में टैरिफ कटौती, एविएशन, ऊर्जा, टेक हार्डवेयर और लेबर–इंटेंसिव उत्पादों को प्राथमिकता मिल सकती है। बाद के चरणों में डिजिटल ट्रेड, IP, डेटा फ्लो और रेग्युलेटरी कोऑपरेशन जैसे कठिन मुद्दे उठाए जा सकते हैं। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी घरेलू इंडस्ट्री और रोजगार हितों को सुरक्षित रखते हुए मार्केट एक्सेस का अधिकतम फायदा उठा सके।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: पीयूष गोयल ने US से क्या–क्या लेने की बात कही?
उत्तर: उन्होंने कहा कि भारत को US से कच्चा तेल, हाई–क्वालिटी कोकिंग कोल, GPUs, डेटा सेंटर इक्विपमेंट और क्वांटम कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी जैसी चीज़ों की जरूरत है, ताकि सप्लाई और टेक दोनों विविध हों। - प्रश्न: US ने 25% अतिरिक्त टैरिफ क्यों हटाया?
उत्तर: यह अतिरिक्त ड्यूटी रूस से भारत के तेल आयात को लेकर असहमति के कारण लगाई गई थी, जिसे अब US ने हटाते हुए भारत की ओर से रूसी तेल पर निर्भरता घटाकर US से खरीद बढ़ाने के इरादे को नोट किया है। - प्रश्न: अब भारत पर लगने वाला बेस टैरिफ कितना रहेगा?
उत्तर: रेसिप्रोकल टैरिफ रेट इस हफ्ते 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जबकि 25 प्रतिशत की अतिरिक्त पेनल ड्यूटी पहले ही हट चुकी है। - प्रश्न: एविएशन सेक्टर में भारत की US से कितनी मांग अनुमानित है?
उत्तर: गोयल के अनुसार अगले पाँच साल में सिर्फ एविएशन सेक्टर में ही भारत की US से लगभग 100 अरब डॉलर की मांग हो सकती है, जिसमें नए विमान और संबंधित सेवाएँ शामिल हैं। - प्रश्न: AI से जुड़े डर पर गोयल ने क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने IT स्टॉक्स में गिरावट और AI से नौकरियाँ खत्म होने की आशंकाओं को “काफी बेतुका” बताया और कहा कि भारतीय टेक कंपनियाँ ही वो इकाइयाँ हैं जो AI के विस्तार के लिए सबसे ज़्यादा जरूरी होंगी।
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