सुप्रीम कोर्ट ने 12 ‘प्रसिद्ध नागरिकों’ की PIL पर नाराज़गी जताई, जो हेट स्पीच के नाम पर केवल BJP शासित राज्यों के CMs को टारगेट कर रही थी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिका बैलेंस्ड और निष्पक्ष हो, गाइडलाइंस सभी पार्टियों पर लागू हों।
हेट स्पीच PIL पर CJI सूर्यकांत का सवाल: “क्यों केवल BJP लीडर्स का नाम, बैलेंस्ड याचिका दाखिल करो”
सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच PIL को ‘टारगेटेड’ बताया: “सभी पार्टियों पर लागू हों गाइडलाइंस”
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 12 “प्रसिद्ध नागरिकों” की PIL पर तल्ख टिप्पणी की, जो हेट स्पीच के नाम पर केवल BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और कुछ अधिकारियों को निशाना बना रही थी।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस BV नागरत्ना और जस्टिस जोयमलया बाघची की बेंच ने कहा कि मुद्दा महत्वपूर्ण है, लेकिन याचिका निष्पक्ष और तटस्थ होनी चाहिए।
बेंच ने नोट किया कि याचिका कुछ लीडर्स को छोड़कर केवल चुनिंदा लोगों पर फोकस कर रही है, जो गलत इम्प्रेशन पैदा करता है।
PIL का विवाद: केवल BJP लीडर्स पर निशाना?
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि देश का माहौल “टॉक्सिक” हो गया है और संवैधानिक पदाधिकारियों व नौकरशाहों को कॉन्स्टिट्यूशनल मोरालिटी का पालन करने के गाइडलाइंस चाहिए।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि केवल सुप्रीम कोर्ट ही समाधान दे सकता है। लेकिन बेंच ने सवाल किया कि याचिका में BJP लीडर्स का नाम है, लेकिन अन्य पार्टियों के हेट स्पीच करने वालों का क्यों नहीं?
CJI ने कहा, “याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रही है। याचिकाकर्ता ऐसा इम्प्रेशन न बनने दें।”
“सभी पक्षों में बोलने पर संयम ज़रूरी”: SC का संदेश
बेंच ने ज़ोर दिया कि अंतिम गाइडलाइंस सभी राजनीतिक पार्टियों और पदों पर समान रूप से लागू हों।
CJI सूर्यकांत ने कहा, “सभी राजनीतिक पदाधिकारियों को कॉन्स्टिट्यूशनल मोरालिटी का ध्यान रखना चाहिए।”
जस्टिस नागरत्ना ने फ्री स्पीच पर चिंता जताई और कहा कि कोर्ट निर्देश दे सकता है, लेकिन राजनीतिक पार्टियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बड़ी ज़िम्मेदारी है।
“याचिका अस्पष्ट, पॉपुलिस्ट एक्सरसाइज न बने”: जस्टिस बाघची
जस्टिस बाघची ने PIL को “वैग्यू” करार दिया और चेताया कि कॉन्स्टिट्यूशनल लिटिगेशन “पॉपुलिस्ट एक्सरसाइज” न बन जाए।
सिब्बल ने नाम हटाने की पेशकश की, तो बेंच ने सुधार के बाद सुनवाई का आदेश दिया। दो हफ्ते का समय दिया गया।
PIL की मुख्य मांगें
– संवैधानिक पदाधिकारियों की पब्लिक स्पीच को कॉन्स्टिट्यूशनल मोरालिटी के अधीन घोषित करें।
– व्यापक गाइडलाइंस बनाएं, जो बिना पूर्व सेंसरशिप के फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन न करें।
| पक्ष | मुख्य टिप्पणी |
|---|---|
| याचिकाकर्ता | माहौल टॉक्सिक, SC ही समाधान। |
| CJI सूर्यकांत | सभी पक्षों में संयम, निष्पक्ष याचिका। |
| जस्टिस नागरत्ना | फ्री स्पीच चिंता, पार्टियों की ज़िम्मेदारी। |
| जस्टिस बाघची | याचिका वैग्यू, पॉपुलिस्ट न बने। |
5 FAQs
- सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि PIL BJP CMs को टारगेट कर रही है, याचिका बैलेंस्ड और निष्पक्ष बनाएं। - PIL किस मुद्दे पर थी?
हेट स्पीच पर गाइडलाइंस, संवैधानिक पदाधिकारियों को कॉन्स्टिट्यूशनल मोरालिटी का पालन करने के निर्देश। - बेंच कौन थी?
CJI सूर्यकांत, जस्टिस BV नागरत्ना, जस्टिस जोयमलया बाघची। - याचिकाकर्ता कौन थे?
12 “प्रसिद्ध नागरिक”, वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें दीं। - आगे क्या होगा?
सुधार के बाद सुनवाई, दो हफ्ते का समय।
Leave a comment