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“एक अरब भारतीयों के लिए अपना AI” — Sarvam AI ने दिल्ली AI समिट में पेश किए नए मॉडल

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Sarvam AI India model launch
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बेंगलुरु की Sarvam AI ने दिल्ली AI समिट में भारत के लिए कस्टम AI मॉडल लॉन्च किए—22 भारतीय भाषाएँ, वॉयस कमांड, Hinglish सपोर्ट और एजेंटिक AI। कंपनी का दावा है कि इंडियन स्क्रिप्ट OCR/डॉक्यूमेंट टास्क में उसका विज़न मॉडल 84%+ एक्युरेसी हासिल करता है और मॉडल देश के अंदर रन होकर सिक्योरिटी बढ़ाएंगे।

Sarvam AI का ‘India-First’ मॉडल लॉन्च: 22 भाषाएँ, वॉयस कमांड और Hinglish सपोर्ट—ChatGPT को देगी टक्कर?

Sarvam AI ने भारत के लिए ‘लोकल’ AI मॉडल लॉन्च किए: 22 भाषाएँ, वॉयस कमांड, Hinglish और एजेंटिक AI का दावा

भारत के AI स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ा दावा सामने आया है। बेंगलुरु स्थित Sarvam AI ने नई दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल AI समिट के दौरान दो AI मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनके बारे में कंपनी कहती है कि ये भारत के घरेलू बाजार के लिए ChatGPT और Claude जैसे ग्लोबल मॉडल्स की तुलना में ज्यादा “टेलर्ड” यानी भारतीय भाषाओं और संस्कृति के हिसाब से बने हैं। कंपनी का फोकस खास तौर पर उन यूज़र्स पर है जो अंग्रेज़ी में पढ़-लिख या टाइप नहीं कर पाते, लेकिन आवाज़ से (voice) और अपनी भाषा में टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं।

Sarvam के मुताबिक, उनके मॉडल वॉयस कमांड के जरिए इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं और 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। कंपनी इसे भारत जैसे 1.45 अरब आबादी वाले देश में एक बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बता रही है, जहां बहुत बड़ी संख्या में लोग अंग्रेज़ी में पढ़ना-लिखना या टाइप करना सहज नहीं मानते।

“एक अरब भारतीयों के लिए अपना AI” – लॉन्च इवेंट में क्या कहा गया?

Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार ने दिल्ली के इवेंट में कहा, “आज हम दिखाते हैं कि हम एक अरब भारतीयों के लिए अपना AI ला सकते हैं।” यह बयान सीधे-सीधे ‘India-first AI’ और ‘सोवरेन AI’ वाली सोच को आगे बढ़ाता है, जहां देश अपनी जरूरतों के हिसाब से खुद के मॉडल्स बनाकर बड़े पैमाने पर लागू करना चाहता है।

इसी इवेंट में Sarvam AIके दूसरे को-फाउंडर विवेक राघवन ने भी एक मजबूत लाइन कही—“AI में सबसे बड़े मॉडल बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण sovereignty (संप्रभुता) है।” उनका इशारा यह था कि सिर्फ मॉडल का साइज नहीं, बल्कि डेटा, नियंत्रण, सुरक्षा और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक फिट होना भी उतना ही जरूरी है।

Sarvam का ‘Agentic AI’ क्या है और क्यों चर्चा में है?

Sarvam AI का कहना है कि वह “agentic” AI मॉडल भी ऑफर करता है। आसान भाषा में, agentic AI ऐसे सिस्टम्स को कहा जाता है जो कई काम काफी हद तक खुद से (autonomously) कर सकें और हर कदम पर इंसान की मिनिमम दखल के साथ टास्क पूरा करें। Sarvam ने उदाहरण दिए कि ऐसे एजेंट्स coding या meeting planning जैसे काम कर सकते हैं और इससे एंटरप्राइज ऑटोमेशन को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में कंपनियां लागत घटाने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए ऑटोमेशन पर जोर देती हैं, ऐसे में agentic AI की चर्चा इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि यह सिर्फ “जवाब देने” वाली AI नहीं, बल्कि “काम करके दिखाने” वाली AI की तरफ कदम माना जाता है।

India-first क्यों? भाषाओं, Hinglish और डेटा की असली चुनौती

Sarvam AI अपनी सबसे बड़ी खासियत “India-first” अप्रोच बता रहा है। कंपनी के मुताबिक, उनके मॉडल्स को देश के अंदर से रन किया जा सकता है, जिससे सिक्योरिटी और डेटा कंट्रोल बेहतर होगा। यह बात खासकर बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और हेल्थ जैसे सेक्टर में मायने रखती है जहां डेटा संवेदनशील होता है।

Sarvam का दावा है कि उनके मॉडल्स को “trillions of Indian datasets” पर ट्रेन किया गया है, खासकर भारतीय भाषाओं के डेटा पर। कंपनी का कहना है कि इस वजह से मॉडल सिर्फ अलग-अलग भाषाओं में ही नहीं, बल्कि Hinglish जैसे मिक्स्ड-लैंग्वेज (हिंदी+अंग्रेज़ी बोलचाल) में भी बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं, जो असल जीवन में बहुत आम है।

OCR और डॉक्यूमेंट इंटेलिजेंस में 84%+ एक्युरेसी का दावा

Sarvam ने यह भी दावा किया कि उसके मॉडल्स ने कुछ बेंचमार्क टेस्ट्स में भारतीय लिपियों (Indian scripts) के लिए optical character recognition (OCR) और document intelligence जैसे टास्क में बेहतर एक्युरेसी दिखाई। कंपनी के मुताबिक Sarvam vision model ने document intelligence टास्क में 84% से ज्यादा एक्युरेसी हासिल की, और यह दावा किया गया कि यह कई “hundreds of times larger” ग्लोबल मॉडल्स से भी बेहतर है।

भारत में सरकारी फॉर्म, जमीन के कागज़, अदालत/नगरपालिका के दस्तावेज, स्कूल रिकॉर्ड—बहुत कुछ आज भी स्कैन, फोटो या प्रिंट में होता है। ऐसे में अगर इंडियन स्क्रिप्ट OCR सच में बेहतर होता है, तो डिजिटल इन्क्लूजन और गवर्नेंस में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं।

Sarvam बनाम ग्लोबल AI दिग्गज: मुकाबला कितना कठिन है?

Sarvam के सामने चुनौती भी बड़ी है, क्योंकि ग्लोबल AI कंपनियों के पास फंडिंग, कंप्यूट और इकोसिस्टम का स्केल बहुत ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक Sarvam ने 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा फंडिंग जुटाई है (Lightspeed Ventures और Khosla Ventures सहित) और इसका पिछला वैल्यूएशन लगभग 200 मिलियन डॉलर बताया गया। तुलना में OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों के वैल्यूएशन सैकड़ों अरब डॉलर के स्तर पर हैं, और Mistral AI जैसी कंपनियां भी अरबों डॉलर में वैल्यूएट बताई गई हैं।

यानी Sarvam के लिए “सिर्फ बेहतर AI” बनाना काफी नहीं होगा; उसे टिकाऊ बिजनेस मॉडल, एंटरप्राइज डील्स, सरकारी पार्टनरशिप और लगातार बेहतर होते मॉडल्स की जरूरत होगी।

तालिका: Sarvam AI मॉडल्स – लेख में बताए गए मुख्य पॉइंट्स

पहलूSarvam का दावा/फोकसभारत में उपयोगिता
Language support22 भारतीय भाषाएँलोकल भाषा में सेवाएँ, डिजिटल इन्क्लूजन 
Voice-firstवॉयस कमांड से इस्तेमालकम-टाइपिंग यूज़र्स, सर्विस डिलीवरी 
Mixed languageHinglish सपोर्टरोज़मर्रा की बोलचाल के मुताबिक AI 
Agentic AIcoding, meeting planning जैसे कामएंटरप्राइज ऑटोमेशन 
In-country runningभारत के अंदर मॉडल रनडेटा सिक्योरिटी/कंप्लायंस 
Vision/OCRdocument intelligence में 84%+ accuracyसरकारी/बिजनेस डॉक्यूमेंट डिजिटाइजेशन 

भारत का ‘Sovereign AI’ नैरेटिव और Global South की रणनीति

Sarvam जैसे स्टार्टअप्स का उभरना ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-चीन के बीच AI रेस तेज है। लेख में कहा गया है कि मोदी सरकार AI accelerators को फंड कर रही है और मॉडल मेकर्स को सेवाएँ लॉन्च करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि भारत पीछे न रह जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, Sarvam और BharatGen जैसे भारतीय AI स्टार्टअप्स सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के उन विकासशील देशों (Global South) के लिए भी अपने AI सिस्टम्स एक्सपोर्ट करने की सोच रहे हैं जहां अमेरिकी या चीनी मॉडल्स को लेकर राजनीतिक/भरोसे की बाधाएँ हो सकती हैं।

आम यूज़र और बिजनेस के लिए इसका मतलब क्या है?

इस लॉन्च का सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में भारत में AI “सिर्फ अंग्रेज़ी चैट” तक सीमित नहीं रहेगा। वॉयस, लोकल भाषा, डॉक्यूमेंट पढ़ने/समझने और सरकारी सेवाओं में मदद जैसी चीजें AI का सबसे बड़ा यूज़-केस बन सकती हैं।

अगर Sarvam जैसे मॉडल्स वास्तव में स्केल पर अच्छा परफॉर्म करते हैं, तो भारत में कस्टमर सपोर्ट, बैंकिंग, बीमा, हेल्थकेयर, शिक्षा, और सरकारी हेल्पलाइन जैसे क्षेत्रों में तेज बदलाव हो सकता है। साथ ही, डेटा भारत में ही रखने का विकल्प कई संस्थानों को AI अपनाने में भरोसा दे सकता है।

5 FAQs

  1. Sarvam AI ने क्या लॉन्च किया है?
    Sarvam AI ने दिल्ली के AI समिट में दो AI मॉडल लॉन्च किए हैं, जिन्हें कंपनी भारत के घरेलू बाजार के लिए भाषाओं और संस्कृति के हिसाब से ज्यादा टेलर्ड बताती है।
  2. ये मॉडल किन भाषाओं में काम करते हैं?
    कंपनी के अनुसार, ये मॉडल 22 भारतीय भाषाओं में एक्सेस किए जा सकते हैं और वॉयस कमांड के जरिए उपयोग के लिए बनाए गए हैं।
  3. “Agentic AI” का मतलब क्या है?
    Sarvam के अनुसार, agentic AI ऐसे मॉडल/एजेंट्स हैं जो coding या meeting planning जैसे काम काफी हद तक खुद से कर सकते हैं और कम मानवीय हस्तक्षेप में टास्क पूरा कर सकते हैं।
  4. Sarvam ने OCR/डॉक्यूमेंट टास्क में क्या दावा किया?
    कंपनी ने कहा कि उसके vision model ने document intelligence टास्क में 84% से ज्यादा एक्युरेसी हासिल की और भारतीय लिपियों के OCR जैसे कामों में बेहतर प्रदर्शन किया।
  5. Sarvam “Sovereign AI” पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
    कंपनी का कहना है कि AI में sovereignty महत्वपूर्ण है—मॉडल को देश के अंदर रन करना, स्थानीय डेटा पर ट्रेनिंग और सिक्योरिटी/कंप्लायंस भारत जैसे बाजार में बड़ी जरूरतें हैं।

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