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NASA Juno ने तोड़ा मिथक: बृहस्पति पहले सोचा था उससे 20 किमी बड़ा!

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NASA Juno
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NASA Juno मिशन ने साबित किया – बृहस्पति इक्वेटर पर 8 किमी छोटा, ध्रुवों पर 24 किमी चपटा। 50 साल पुरानी Voyager डेटा गलत। ग्रेविटी, वायुमंडल, कोर स्ट्रक्चर पर नया लाइट। Nature Astronomy स्टडी की पूरी डिटेल।

50 साल पुराना भ्रम टूटा: बृहस्पति छोटा और ज्यादा चपटा निकला – जूनो मिशन का खुलासा

दोस्तों, बचपन से पढ़ते आए हैं कि बृहस्पति सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा ग्रह है। लेकिन NASA के जूनो मिशन ने ये मिथक तोड़ दिया। 13 फ्लाईबाय्स के रेडियो ऑकल्टेशन डेटा से पता चला – बृहस्पति इक्वेटर पर 8 किलोमीटर (5 मील) छोटा और ध्रुवों पर 24 किलोमीटर (15 मील) ज्यादा चपटा है। 1970s के Voyager और Pioneer डेटा गलत था। ये छोटा सा बदलाव ग्रह के कोर, ग्रेविटी और वायुमंडल मॉडल्स बदल देगा। Nature Astronomy में पब्लिश स्टडी ने साइंटिस्ट्स को चौंका दिया।

इस आर्टिकल में पूरा अपडेट – पुरानी vs नई मेजरमेंट्स, जूनो कैसे मापा, साइंस इंप्लिकेशन्स, जूपिटर के रहस्य। Weizmann Institute और NASA के डेटा से फैक्ट्स। अगर स्पेस साइंस पसंद है, तो अंत तक पढ़ें। चलिए बृहस्पति के नए अवतार को समझते हैं।

पुरानी मेजरमेंट्स vs जूनो का नया डेटा: आंकड़ों की जंग

50 साल पहले Pioneer 10/11 और Voyager 1 ने मापा था:

  • इक्वेटर डायमीटर: 142,984 किमी
  • ध्रुवीय डायमीटर: 133,709 किमी

जूनो ने रिफाइन किया:

  • इक्वेटर: 142,976 किमी (8 किमी छोटा)
  • ध्रुव: 133,684 किमी (24 किमी छोटा)
  • फ्लैटनिंग: 7% (पहले से ज्यादा)

ये 1-बार प्रेशर लेवल पर। जूनो ने 26 प्रोफाइल्स दिए, पुराने सिर्फ 6। Dr. Eli Galanti (Weizmann): “रेडियो सिग्नल्स ने एटमॉस्फेरिक डेंसिटी मापी।”

पैरामीटरVoyager/Pioneerजूनो 2026अंतर
इक्वेटर डायमीटर142,984 km142,976 km-8 km 
ध्रुवीय डायमीटर133,709 km133,684 km-24 km
फ्लैटनिंग %~6.9%7%ज्यादा चपटा
मीन रेडियस69,911 km69,886 kmछोटा

जूनो मिशन: कैसे मापा बृहस्पति का साइज?

2016 में लॉन्च, 2021 में एक्सटेंड। पोलर ऑर्बिट से क्लोज फ्लाईबाय्स। रेडियो ऑकल्टेशन: अर्थ के पीछे जाकर सिग्नल भेजा। एटमॉस्फियर से गुजरते bend/slow हुए – टेम्परेचर, प्रेशर पता चला। 1-बार लेवल (जैसे अर्थ पर सी लेवल) पर शेप कैलकुलेट।

जोनल विंड्स का इफेक्ट ऐड किया। Jupiter 10 घंटे में घूमता – सेंट्रीफ्यूगल फोर्स से चपटा।

फ्लैटनिंग का मतलब: बृहस्पति क्यों चपटा?

फास्ट रोटेशन + फ्लुइड बॉडी। अर्थ सिर्फ 0.33% फ्लैट, जूपिटर 7%। न्यू डेटा से पता चला – ज्यादा मास इक्वेटर पर दबाव। ग्रेविटी फील्ड बेहतर समझ। NASA: “रेडियस ग्रह मॉडल्स का बेस है।”

आंतरिक स्ट्रक्चर पर असर: कोर और लेयर्स का नया चित्र

छोटा साइज = डेंसियर इंटीरियर। Galileo प्रोब डेटा (1995) से टेम्परेचर मैच। मेटल-रिच आउटर लेयर। डीप ग्रेविटी मेजरमेंट्स अब सही डेप्थ पर। जेनरेशन मॉडल्स रीवाइज।

जूपिटर के अन्य रहस्य जो जूनो खोल चुका

  • ग्रेट रेड स्पॉट: 300 साल पुराना, डीप रूट्स।
  • मैग्नेटिक फील्ड: असममित, स्ट्रॉन्गेस्ट सोलर सिस्टम।
  • मून Io, Europa: वॉल्केनोज, सब्सरफेस ओशन्स।
  • अमोनिया, वॉटर क्लाउड्स: हाई प्रेशर में।

सोलर सिस्टम इंप्लिकेशन्स: गैस जायंट्स पर नया लाइट

बृहस्पति रेफरेंस ग्रह। सैटर्न, यूरेनस मॉडल्स अपडेट। एक्सोप्लैनेट स्टडीज में हेल्प। फॉर्मेशन: कोर एक्सेस मॉडल वैलिडेट।

भारतीय कनेक्ट: ISRO और जूपिटर मिशन्स

ISRO का शुक्रयान-1 वीनस। भविष्य में जूपिटर मून मिशन पॉसिबल। JAXA के साथ कोलैब। IISc ग्रेविटी स्टडीज।

टेक्नोलॉजी का कमाल: रेडियो साइंस कैसे काम करता

सिग्नल फ्रिक्वेंसी चेंज से रिफ्रैक्शन। डोपलर शिफ्ट से स्पीड। GPS जैसा लेकिन स्पेस। जूनो का X-band ट्रांसमीटर।

फ्यूचर मिशन्स: जूपिटर एक्सप्लोरेशन जारी

Europa Clipper (2024 लॉन्च)। JUICE (ESA) 2031 अराइवल। जूनो 2021 एक्सटेंशन से 70+ ऑर्बिट्स।

5 FAQs

Q1: बृहस्पति कितना छोटा हुआ?
A: इक्वेटर 8 किमी, ध्रुव 24 किमी। कुल मामूली लेकिन सटीक।

Q2: जूनो ने कैसे मापा?
A: रेडियो ऑकल्टेशन – सिग्नल्स एटमॉस्फियर से गुजारे।

Q3: ग्रेविटी पर असर?
A: इंटीरियर मॉडल्स बेहतर, कोर स्ट्रक्चर क्लियर।

Q4: किताबें बदलेंगी?
A: हां, टेक्स्टबुक्स अपडेट।

Q5: अगला मिशन?
A: Europa Clipper, JUICE।

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