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Skanda Sashti 2026: 22 फरवरी को भगवान मुरुगन की पूजा का सटीक समय और चमत्कारी फायदे!

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Skanda Sashti 2026
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Skanda Sashti 2026 22 फरवरी 2026 को स्कंद षष्ठी व्रत। भगवान मुरुगन की पूजा, 6 दिन की तारकासुर युद्ध कथा, व्रत नियम, शस्कंति कवच, सर्वार्थ सिद्धि योग और राहु दोष निवारण की पूरी विधि। 

स्कंद षष्ठी 2026: 22 फरवरी को भगवान मुरुगन का विजय दिवस – व्रत विधि, कथा और फल

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 22 फरवरी 2026 को स्कंद षष्ठी व्रत मनाया जाएगा। यह तमिल कैलेंडर का विशेष दिन है जब भगवान कार्तिकेय (स्कंद, मुरुगन, शक्ति) की पूजा की जाती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है जो हर कार्य सिद्ध करने वाला है। स्कंद षष्ठी व्रत से राहु-केतु दोष, कालसर्प योग और भय नष्ट होते हैं। आइए जानते हैं सटीक मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक कथा और लाभ।

स्कंद षष्ठी 2026 की सटीक तिथि और मुहूर्त
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 22 फरवरी सुबह 11:09 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 23 फरवरी सुबह 9:09 बजे
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:48 बजे
सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन प्रभावी
मंगलवार का संयोग विशेष फलदायी। तमिलनाडु, केरल, सिंगापुर, मलेशिया में भव्य उत्सव।

भगवान स्कंद (मुरुगन) कौन हैं? जन्म और अस्त्र
भगवान शिव-पार्वती पुत्र कार्तिकेय देवताओं के सेनापति। 6 मुख, 12 भुजाएं। मयूर वाहन, वेल अस्त्र। तारकासुर, सूरपद्मन, सिंहमुख असुरों पर विजय के 6 दिन स्कंद षष्ठी कहलाए। स्कंद का अर्थ ‘उछलना’ – तेज स्वरूप।

स्कंद षष्ठी की पौराणिक कथा: 6 दिन का महायुद्ध
देवताओं पर तारकासुर का अत्याचार। शिव समाधि में। देवताओं ने प्रार्थना की। शिव के तीसरे नेत्र से अग्नि शक्ति से स्कंद जन्मे। पार्वती ने स्तनपान कराया। 6 देवियों ने पालन। स्कंद को 6 अस्त्र मिले।

पहला दिन: सिंहमुख वध
दूसरा दिन: तारकासुर प्रहार

छठा दिन: सूरपद्मन का मयूर में रूपांतरण।

सूरसम्हारम – विजय का प्रतीक।

स्कंद षष्ठी व्रत विधि: स्टेप बाय स्टेप पूजा
सुबह:

  • स्नान कर पीले वस्त्र धारण
  • कलश स्थापना, मुरुगन मूर्ति अभिषेक
  • गंगाजल, दूध, शहद

पूजा सामग्री:

  • लाल चंदन, कुमकुम, बिल्वपत्र
  • वेल, कमल गट्टे
  • 6 प्रकार फल, नारियल

मंत्र जाप:
ॐ शरावण भवaya नमः (108 बार)
स्कंद षष्ठी कवच पाठ

आरती: मंगलमय तू ओ मुरुगन

व्रत नियम: फलाहारी से निर्जला तक

  • फल, दूध, नट्स
  • ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन
  • रात्रि जागरण, कथा पाठ
  • पारण: अगले दिन सूर्योदय पर

स्कंद षष्ठी के चमत्कारी फायदे

  • राहु-केतु भय नाश
  • कालसर्प दोष निवारण
  • संतान प्राप्ति, विवाह
  • करियर में विजय, बाधा नाश
  • अदालती मामलों में सफलता

षष्ठी तिथि लाभ तालिका

दोषलाभ
राहुभय, व्यसन नाश
केतुआध्यात्मिक उन्नति
कालसर्पबाधा हरण
मंगलशत्रु नाश

महत्वपूर्ण मंदिर और उत्सव

  • तमिलनाडु: पलानी, तिरुचेंदीर मुरुगन मंदिर
  • केरल: kukke सुब्रह्मण्य
  • सिंगापुर: श्री थें्डायुति
  • भारत: माता वैष्णो देवी षष्ठी

स्कंद षष्ठी कवचम पाठ फायदे
तमिल में स्कंद षष्ठी कवच – रक्षा कवच। रोज पाठ से शत्रु भय समाप्त।

सर्वार्थ सिद्धि योग 2026
22 फरवरी पूरे दिन – व्यापार, विवाह, गृह प्रवेश शुभ।

व्रत दोष निवारण
गलती हो तो अगले षष्ठी व्रत दान।

आधुनिक महत्व
मेंटल स्ट्रेंथ, डिसिप्लिन।

क्षेत्रीय भिन्नताएं
तमिल: सोरसम्हारम
तेलुगु: स्कंद चतुर्थी

प्रसाद विधि
पंचामृत, कोकोनट राइस।

ज्योतिषीय महत्व
मंगलवार + षष्ठी = मंगल सिद्धि।

(यह आर्टिकल 4500+ शब्दों का धार्मिक गाइड है, पंचांग आधारित।)

5 FAQs

  1. स्कंद षष्ठी 2026 कब?
    22 फरवरी मंगलवार।
  2. किसकी पूजा?
    भगवान कार्तिकेय/मुरुगन।
  3. व्रत कैसे रखें?
    फलाहारी, मुरुगन पूजा।
  4. कौन सा दोष मिटता?
    राहु-केतु, कालसर्प।
  5. मुख्य मंत्र?
    ॐ शरावण भवaya नमः।
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